उत्तर प्रदेश : आवंटित सरकारी बंगलों का बाजार भाव से देना होगा राजनैतिक दलों को किराया
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 May 2018 3:11 PM
हरीश तिवारी लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगलों को खाली करने के आदेश के बाद प्रदेश का राज्य संपत्ति विभाग बंगलों को खाली कराने के लिए सक्रिय हो गया है. विभाग की नजर अब राजनैतिक दलों को आंवटित सरकारी बंगलों पर है. विभाग ने एक दर्जन मान्यता प्राप्त दलों को आवंटित […]
हरीश तिवारी
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगलों को खाली करने के आदेश के बाद प्रदेश का राज्य संपत्ति विभाग बंगलों को खाली कराने के लिए सक्रिय हो गया है. विभाग की नजर अब राजनैतिक दलों को आंवटित सरकारी बंगलों पर है. विभाग ने एक दर्जन मान्यता प्राप्त दलों को आवंटित कार्यालयों को निरस्त करने के बाद अब बाजार दर पर किराये का बिल भेजना शुरू कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने चार दिन पहले राज्य सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगलों का खाली करने का आदेश दिया था. यह बंगले सरकार के आदेश पर राज्य संपत्ति विभाग द्वारा आवंटित किये जाते हैं. हालांकि, पिछली सपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिये गये आदेश के मद्देनजर एक नियम बना कर फिर से पूर्व मुख्यमंत्रियों को फिर से बंगले आवंटित किये थे. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर बंगलों को खाली करने का आदेश दे दिया है. राज्य संपत्ति विभाग की नजर राजनैतिक दलों आवंटित सरकारी बंगलों पर है, जिन्हें काफी सस्ती दरों राजनैतिक दलों का दिया गया था.
इस संबंध में विभाग का कहना है कि इन बंगलों का बाजार भाव किराया काफी ज्यादा है. जबकि, काफी सस्ती दरों पर दलों को बंगले आवंटित किये गये हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के नियमों के खिलाफ है. लिहाजा राज्य संपत्ति निदेशालय ने सभी पार्टी कार्यालयों का किराया बाजार दर पर वसूलने के लिए नोटिस जारी कर दिया है. राज्य संपत्ति विभाग ने सपा सरकार के कार्यकाल में सरकारी बंगलों का उपयोग करनेवालों से उनके किराये की वसूली दो गुनी कर दी थी.
विधानसभा के सामने स्थित कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के कार्यालय का किराया अभी छह हजार रुपये है, जबकि इस बंगले का बाजार किराया 76 हजार रुपया प्रति माह हो गया है. इसी तरह सपा, बसपा, भाजपा और रालोद के पार्टी कार्यालयों का किराया भी 75 हजार रुपये प्रति माह से ज्यादा है. सभी पार्टी कार्यालयों को बाजार दर पर किराया वसूलने के लिए राज्य संपत्ति निदेशालय ने बिल तैयार किया है. बहरहाल, जिन पार्टी कार्यालयों के आवंटन का नवीनीकरण नहीं किया गया है, उनको निरस्त मानते हुए राज्य संपत्ति निदेशालय ने बाजार दर पर बिल की नोटिस जारी किया है.
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