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Fact Check: संभल की जामा मस्जिद के सर्वे में मिलीं मूर्तियां, जानें क्या है सच?

Updated at : 13 Dec 2024 7:03 PM (IST)
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Fact Check Sambhal Jama Masjid Viral

Fact Check: सोशल मीडिया में भगवान की मूर्तियों की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है, मूर्तियां संभल जामा मस्जिद के सर्वे में मिलीं हैं.

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Fact Check: सोशल मीडिया पर 4 तस्वीरों का एक कोलाज वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के संभल में मुगलकालीन मस्जिद के सर्वे के दौरान 1,500 साल पुरानी ये मूर्तियां मिलीं हैं. कोलाज में शिवलिंग, हिंदू भगवान विष्णु की दो मूर्तियां और सुदर्शन चक्र (विष्णु द्वारा धारण किया जाने वाला एक चक्र) जैसी एक और वस्तु दिखाई गई है.

फेसबुक पर एक यूजर ने कोलाज को तेलुगु में कैप्शन के साथ शेयर किया, जिसका अनुवाद है, ‘संभल मस्जिद के सर्वे के दौरान 1500 साल पुरानी विष्णु मूर्ति, सुदर्शन चक्र और हिंदू प्रतीक मिले. हर हिंदू को शेयर करना चाहिए और हिंदू धर्म को बचाना चाहिए.’ इसी तरह की पोस्ट के आर्काइव यहां और यहां देखे जा सकते हैं.

वायरल पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट. (सोर्स : फेसबुक/स्क्रीनशॉट)

यह दावा उत्तर प्रदेश के संभल की मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वे के लिए एक अदालत के आदेश के बाद आया है, जिसके बाद हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें 5 लोग मारे गए थे. एक स्थानीय अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद विवादास्पद सर्वे का आदेश दिया, जिसमें कहा गया था कि जिस भूमि पर मस्जिद स्थित है, वहां कभी एक हिंदू मंदिर हुआ करता था.

हालांकि, यह दावा कि मूर्तियां संभल मस्जिद से बरामद की गई थीं, फैक्ट चेक में गलत साबित हुआ है. तस्वीर में दिखाई दे रही तीन मूर्तियां फरवरी 2024 में कर्नाटक में पाई गईं थीं, जब मस्जिद का सर्वे भी नहीं हुआ था.

सच्चाई कैसे पता चली?

वायरल कोलाज में मौजूद तस्वीरों पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें एनडीटीवी (आर्काइव यहां) द्वारा 7 फरवरी 2024 को पोस्ट किया गया एक एक्स-पोस्ट मिला. कैप्शन में लिखा है, ‘कर्नाटक के नदी के किनारे सदियों पुरानी विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग मिला.’ इसमें दिख रही 3 तस्वीरें वर्तमान में वायरल हो रही तस्वीरों से मेल खाती हैं.

वायरल पोस्ट और एनडीटीवी एक्स-पोस्ट की तुलना. (सोर्स: फ़ेसबुक/एक्स/स्क्रीनशॉट)

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी 6, 2024 को कर्नाटक के रायचूर जिले के शक्ति नगर क्षेत्र में कृष्णा नदी के किनारे से 1,000 साल पुरानी विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग बरामद किया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मूर्तियों को पुल निर्माण के दौरान बरामद किया गया था और उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को सौंप दिया गया था.

ये तस्वीरें फरवरी 2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया और स्थानीय न्यूज़ चैनल TV9 कन्नड़ की रिपोर्ट में भी प्रकाशित की गई थीं, जो ऊपर दी गई जानकारियों की पुष्टि करती हैं.

लॉजिकली फैक्ट्स ने रायचूर में कर्नाटक पुरातत्व विभाग के इंचार्ज से बात की, जिन्होंने पुष्टि की कि विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग रायचूर में पाए गए थे.

इसके अलावा, हमने कोलाज में चौथी तस्वीर का पता लगाया, जिसमें गोलाकार चक्र को सुदर्शन चक्र बताया गया है, जो इंडियामार्ट (आर्काइव यहां) नामक एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर उपलब्ध है. तस्वीर के नीचे कैप्शन में लिखा है, ‘मटेरियल : पीतल का सुदर्शन चक्र कलशम, मंदिर.’ वेबसाइट के अनुसार, यह मटेरियल हैदराबाद स्थित कोलचरम आर्ट क्रिएशन द्वारा निर्मित और बेची जाती है.

यह ध्यान देने की बात है कि संभल मस्जिद का पहला सर्वे 19 नवंबर 2024 को किया गया था, जबकि ये मूर्तियां कई महीने पहले मिल चुकी थीं.

निर्णय

कर्नाटक में मिली मूर्तियों की तीन तस्वीरें और एक शॉपिंग वेबसाइट की तस्वीर को गलत तरीके से यह दावा करते हुए शेयर किया गया कि ये मूर्तियां उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान पाई गई थीं.

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(डिस्क्लेमर : इस खबर का फैक्ट चेक लॉजिकली फैक्ट्स ने किया है. प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) ने शक्ति कलेक्टिव के साथ भागीदारी के तहत इस फैक्ट चेक को पुनर्प्रकाशित किया है.)

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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