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UP News: अतीक-अशरफ हत्याकांड में पुलिस को क्लीन चिट, जांच आयोग ने सौंपी फाइनल रिपोर्ट

Updated at : 01 Aug 2024 10:37 PM (IST)
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Atiq Ahmed Murder Case

Atiq Ahmed Murder Case

UP News: गैंगस्टर और राजनेता अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने पुलिस को क्लीन चिट दे दी है. जांच आयोग ने इसे पूर्व नियोजित साजिश या पुलिस की लापरवाही की संभावना से इनकार किया है.

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UP News: माफिया डॉन और राजनेता अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड मामले में यूपी पुलिस को बड़ी राहत मिली है. जांच आयोग ने हत्याकांड मामले में यूपी पुलिस को क्लीन चिट दे दी है. गुरुवार को यूपी विधानसभा राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने जांच आयोग की रिपोर्ट पेश की है. जिसमें पुलिस को इस मामले में बेदाग बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अतीक अहमद और अशरफ की हत्या सुनियोजित नहीं थी. पुलिस के लिए इस घटना को टालना संभव नहीं था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई.

सदन में पेश की गई जांच आयोग की रिपोर्ट
आयोग की रिपोर्ट शुक्रवार को मानसून सत्र के आखिरी दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई. इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग को 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की जांच करने का काम सौंपा गया था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 15 अप्रैल, 2023 की घटना में पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की तीन अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, उसे राज्य पुलिस की ओर से अंजाम दी गई पूर्व नियोजित साजिश का नतीजा नहीं कहा जा सकता.

पुलिस को मिली क्लीन चिट
जांच आयोग ने पुलिस को मामले में क्लीन चिट देते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि 15 अप्रैल 2023 की घटना जिसमें आरोपी अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को अज्ञात हमलावरों ने मार डाला. पुलिस की लापरवाही का नतीजा नहीं थी और न ही उनके लिए घटना को टालना संभव था. यह देखते हुए कि अतीक और उसके भाई की गोली मारकर हत्या करने वाले तीन हमलावरों ने खुद को पत्रकार बताया था, आयोग ने मीडिया को ऐसी घटनाओं को कवर करते समय कुछ संयम बरतने का सुझाव भी दिया.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मीडिया को किसी भी अपराध की जांच के चरणों जैसे कि आरोपी को आपत्तिजनक वस्तुओं की बरामदगी के लिए ले जाने के बारे में जानकारी नहीं दी जानी चाहिए. इसमें कहा गया कि जब सार्वजनिक महत्व के किसी अपराध की जांच चल रही हो, तो मीडिया को कोई भी टॉक शो आयोजित करने से बचना चाहिए, जिससे चल रही जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है.

बता दें, अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ गुजरात की साबरमती जेल और बरेली जिला जेल में बंद थे. दोनों को पुलिस उमेश पाल की हत्या की पूछताछ के सिलसिले में प्रयागराज लायी थी. उमेश 2005 में बहुजन समाज पार्टी विधायक राजू पाल की हत्या का गवाह था. उमेश पाल की फरवरी 2023 में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. भाषा इनपुट से साभार

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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