सुदेश महतो ने नामधारी से मिलने के लिए घुमाया काफिला, पुराने दिनों को याद कर भावुक हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 08 Jun 2026 4:58 PM
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात करते आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू में युवा आजसू सम्मेलन के बाद रांची लौट रहे सुदेश महतो ने वरिष्ठ नेता और झारखंड के पहले विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी से मिलने के लिए अपना काफिला वापस मोड़ दिया. दोनों नेताओं ने राज्य निर्माण आंदोलन, पुराने राजनीतिक संस्मरणों और झारखंड की राजनीति पर आत्मीय चर्चा की. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: राजनीति में व्यस्त कार्यक्रमों और तय समय-सारिणी के बीच कई बार ऐसे पल भी सामने आते हैं, जो नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों और पुराने जुड़ावों की झलक दिखाते हैं. ऐसा ही एक भावुक क्षण रविवार को पलामू में देखने को मिला, जब आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सह झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने वरिष्ठ नेता और झारखंड विधानसभा के पहले अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी से मिलने के लिए अपना काफिला बीच रास्ते से वापस मोड़ दिया.
सम्मेलन के बाद रांची लौट रहे थे सुदेश महतो
सुदेश कुमार महतो रविवार को युवा आजसू के पलामू प्रमंडलीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए मेदिनीनगर पहुंचे थे. सम्मेलन के समापन के बाद वे सर्किट हाउस पहुंचे और वहां कुछ समय बिताने के बाद शाम करीब छह बजे रांची के लिए रवाना हो गए. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उनका काफिला शहर से बाहर निकल चुका था और रांची की ओर बढ़ रहा था. इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि झारखंड के वरिष्ठ राजनेता और राज्य के पहले विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी सर्किट हाउस में मौजूद हैं. यह जानकारी मिलते ही सुदेश महतो ने बिना देर किए अपना काफिला वापस सर्किट हाउस की ओर मोड़ने का निर्देश दिया.
सूचना मिलते ही वापस लौट आया काफिला
राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच इस तरह अचानक कार्यक्रम में बदलाव ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. सुदेश महतो का काफिला शहर की सीमा से बाहर निकल चुका था, लेकिन वरिष्ठ नेता से मिलने की इच्छा ने उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया. सर्किट हाउस पहुंचकर उन्होंने इंदर सिंह नामधारी से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना. लंबे समय बाद इस तरह अचानक हुई मुलाकात दोनों नेताओं के लिए विशेष रही. सुदेश महतो को अपने सामने देखकर नामधारी भी भावुक हो उठे और दोनों के बीच आत्मीय माहौल में लंबी बातचीत हुई.
पुराने दिनों की यादों में खोए दोनों नेता
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने झारखंड राज्य गठन के दौर की राजनीति, उस समय के संघर्षों और आंदोलन से जुड़े कई संस्मरण साझा किए. बातचीत के दौरान पुराने राजनीतिक सहयोग, राज्य निर्माण की चुनौतियों और उस दौर की घटनाओं को भी याद किया गया. जानकारों के अनुसार, झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण के विभिन्न चरणों में दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. यही कारण रहा कि मुलाकात के दौरान कई पुरानी यादें ताजा हो गईं. दोनों नेताओं ने राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया.
नामधारी हुए भावुक
सुदेश महतो का अचानक वापस लौटकर मिलने आना इंदर सिंह नामधारी के लिए सुखद आश्चर्य साबित हुआ. वरिष्ठ नेता ने इस आत्मीयता की सराहना की. बातचीत के दौरान कई अवसर ऐसे आए, जब दोनों नेता पुराने अनुभवों को याद करते हुए भावुक नजर आए. राजनीति में बदलते समय और रिश्तों के बीच इस मुलाकात ने यह संदेश भी दिया कि वैचारिक मतभेदों और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से परे व्यक्तिगत संबंधों का अपना अलग महत्व होता है.
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कई वरिष्ठ नेता भी रहे मौजूद
इस अवसर पर आजसू पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत और केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर भी मौजूद रहे. दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक बताया. राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच हुई यह मुलाकात पलामू में चर्चा का विषय बनी रही. सुदेश महतो द्वारा वरिष्ठ नेता के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता और सम्मान को लोगों ने सकारात्मक रूप से लिया. वहीं, इंदर सिंह नामधारी के साथ हुई आत्मीय बातचीत ने झारखंड की राजनीति के पुराने अध्यायों को एक बार फिर जीवंत कर दिया.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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