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जस्टिस संजय मिश्रा UP के लोकायुक्‍त नियुक्‍त, SC ने पूर्व आदेश किया निरस्‍त

Updated at : 28 Jan 2016 11:58 AM (IST)
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जस्टिस संजय मिश्रा UP के लोकायुक्‍त नियुक्‍त, SC ने पूर्व आदेश किया निरस्‍त

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त करने का 16 दिसंबर का अपना आदेश निरस्त करते हुए एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश को लोकायुक्त के रूप में नियुक्त किया है. शीर्ष अदालत ने अपना फैसला वापस लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त करने का 16 दिसंबर का अपना आदेश निरस्त करते हुए एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश को लोकायुक्त के रूप में नियुक्त किया है. शीर्ष अदालत ने अपना फैसला वापस लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय मिश्रा को उत्तर प्रदेश का नया लोकायुक्त बनाया है.

न्यायमूर्ति सिंह के नाम पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उठायी गयी आपत्तियों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा, ‘अब हमें लोकायुक्त के रूप में न्यायमूर्ति सिंह की पात्रता पर गंभीर संदेह है.’ न्यायमूर्ति राजन गोगोई और न्यायमूर्ति पीसी पंता की पीठ ने लोकायुक्त पद के लिए सर्वसम्मति पर पहुंचने में मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की अक्षमता को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया. पीठ ने अपना आदेश निरस्त करते हुए शीर्ष अदालत के पूर्व के एक फैसले का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि इस तरह की नियुक्तियों में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के विचारों को प्रमुखता मिलनी चाहिए.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 16 दिसंबर को एक असामान्य आदेश में अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति सिंह को उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था. न्यायालय ने इस बात पर नाराजगी जतायी थी कि पद पर नियुक्ति करने का निर्देश देने से संबंधित इसके कई आदेशों पर संवैधानिक पदाधिकारियों मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने ‘ध्यान’ नहीं दिया.

हालांकि, नियुक्ति को बाद में न्यायालय ने खुद ही तब स्थगित कर दिया जब सच्चिदानंद गुप्ता नाम के उत्तर प्रदेश निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि राज्य सरकार ने यह तथ्य छिपाकर ‘शीर्ष अदालत से फर्जीवाडा किया है’ कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह के नाम पर आपत्ति जतायी थी.

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