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Success Story: व्योमिका सिंह और सोफिया कुरेशी के बाद चर्चा में हैं CISF की गीता समोता, जानें क्यों

Updated at : 24 May 2025 5:47 PM (IST)
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geeta samota cisf everest

एवरेस्ट फतह करने के बाद सीआईएसएफ की गीता समोता.

Success Story: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार की ओर से चलाये गये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की 2 बेटियों ने सफल बनाया. पाकिस्तान के गुरूर को चूर-चूर कर दिया. अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की एक महिला अधिकारी ने इतिहास रचा है. गीता समोता ने एवरेस्ट की चोटी को फतह करके अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया है. वर्ष 2011 में गीता समोता केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में शामिल हुईं. सेवा के शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने देश के पर्वतारोहण को एक ऐसा क्षेत्र देखा, जिसे बल में बहुत कम लोग जानते थे.

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Success Story: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार की ओर से चलाये गये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की 2 बेटियों ने सफल बनाया. पाकिस्तान के गुरूर को चूर-चूर कर दिया. अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की एक महिला अधिकारी ने इतिहास रचा है. इस महिला अधिकारी का नाम है गीता समोता. गीता ने एवरेस्ट की चोटी को फतह करके अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया है. सीआईएसएफ ने इसे मानवीय सहनशक्ति, अदम्य साहस और अटूट संकल्प की मिसाल करार दिया है. CISF की महिला उप-निरीक्षक गीता समोता ने 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करके इतिहास रच दिया है. रविवार, 19 मई 2025 की सुबह, गीता जब ‘दुनिया की छत’ पर खड़ी थीं, तो यह सिर्फ उनकी सफलता नहीं थी, बल्कि सीआईएसएफ की शान और भारत की अदम्य साहस का प्रतीक भी बन गया.

राजस्थान के सीकर जिले की हैं गीता समोता

राजस्थान के सीकर जिले के छोटे से गांव से निकलकर सीआईएसएफ की इस महिला अधिकारी ने हर बाधा को पार करके एक असाधारण उपलब्धि का संकल्प बनाया. 4 बहनों वाले एक साधारण परिवार में जन्मी गीता समोता का पालन-पोषण राजस्थान के सीकर जिले के एक गांव में पारंपरिक ग्रामीण परिवेश में हुआ. उन्होंने अपनी स्कूल और कॉलेज की शिक्षा स्थानीय संस्थानों से ही पूरी की. बचपन से ही उन्होंने लड़कों की उपलब्धियों के किस्से तो खूब सुने, लेकिन जब लड़कियों की सफलताओं की बात आती, तो एक खालीपन-सा महसूस होता.

खेलों में विशेष रुचि थी गीता समोता की

यही खालीपन उनके भीतर अपनी अलग पहचान बनाने की ललक को जन्म देता गया. गीता समोता खेलों में विशेष रुचि रखती थीं और कॉलेज के दिनों में वह एक होनहार एथलीट खिलाड़ी के रूप में जानी जाती थीं. मगर एक दुर्भाग्यपूर्ण चोट ने उनके खेल करियर की राहें रोक दीं. यह एक ऐसा झटका था, जिसने उन्हें अनजाने ही एक नयी दिशा की ओर मोड़ दिया. एक ऐसी राह, जहां उन्होंने न केवल खुद को फिर से खोजा, बल्कि देश और बल का गौरव भी बढ़ाया.

राजस्थान के छोटे से गांव सीकर से निकलकर गीता समोता ने स्थापित किये कई कीर्तिमान.

2011 में सीआईएसएफ में शामिल हुईं गीता समोता

वर्ष 2011 में गीता समोता केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में शामिल हुईं. सेवा के शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने देश के पर्वतारोहण को एक ऐसा क्षेत्र देखा, जिसे बल में बहुत कम लोग जानते थे. उस समय तक CISF के पास कोई समर्पित पर्वतारोहण दल भी नहीं था. गीता समोता ने इस स्थिति को एक चुनौती नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखा. वर्ष 2015 उन्हें एक निर्णायक मोड़ पर ले आयी, जब उन्हें ऑल इंडिया भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) प्रशिक्षण संस्थान में छह सप्ताह के बुनियादी पर्वतारोहण पाठ्यक्रम के लिए चयनित किया गया.

प्रशिक्षण के दौरान दिखा पर्वतारोहण के प्रति जुनून

उत्कृष्ट रूप से वह अपने बैच की एकमात्र महिला प्रतिभागी थीं. प्रशिक्षण के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उनके भीतर न केवल आत्मविश्वास और हौसला को मजबूत किया, बल्कि पर्वतारोहण के प्रति जुनून और कौशल को भी नयी ऊंचाई दी. इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2017 में उत्तर पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया. ऐसा करने वाली पहली तथा एकमात्र CISF कर्मी बनीं.

गीता समोता के अलग-अलग अंदाज.

2019 में माउंट सतोपंथ, माउंट ल्होत्से की चढ़ाई की

उनकी अटूट हिम्मत ने वर्ष 2019 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का रूप ले लिया, जब वे उत्तराखंड की माउंट सतोपंथ (7,075 मीटर) और नेपाल की माउंट ल्होत्से (6,119 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की पहली महिला बन गयीं. हालांकि, वर्ष 2021 की शुरुआत में माउंट एवरेस्ट के लिए निर्धारित CAPF अभियान, जिसमें गीता भी प्रमुख सदस्य थीं, तकनीकी कारणों से रद्द कर दिया गया. यह एक ऐसा क्षण था, जो किसी के लिए निराशा और ठहराव का कारण बन सकता था, लेकिन गीता के लिए यह नयी प्रेरणा का स्रोत बन गया. इसी मोड़ पर उन्होंने एक और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को अपनाया- ‘Seven Summits’ अभियान, जिसमें सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर चढ़ाई करना शामिल है.

6 माह 27 दिन में की 4 दुर्गम चोटियों की चढ़ाई

वैश्विक COVID-19 महामारी जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों के बावजूद, गीता समोता अपने ‘Seven Summits’ अभियान के लक्ष्य को कभी नहीं भूलीं. वर्ष 2021 और वर्ष 2022 की शुरुआत के बीच, उन्होंने इस शृंखला के तहत 4 दुर्गम चोटियों (ऑस्ट्रेलिया में माउंट कोसियस्को (2,228 मीटर), रूस में माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर), तंजानिया में माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर), और अर्जेंटीना में माउंट अकॉन्कागुआ (6,961 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की. इन 4 शिखरों को मात्र 6 महीने 27 दिन में फतह करने वाली गीता समोता सबसे तेज भारतीय महिला बन गयीं.

3 दिन में 5 चोटियों की चढ़ाई कर बनीं सबसे तेज महिला पर्वतारोही

गीता की ऐतिहासिक उपलब्धियों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. दक्षिण अमेरिका के रूप में भी उन्होंने महज 3 दिन के भीतर 5 चोटियों पर सफल चढ़ाई की. इसमें तीन 6,000 मीटर से अधिक और दो 5,000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियां थीं. ऐसा करने वाली वह पहली तथा सबसे तेज महिला पर्वतारोही बन गयीं.

गीता समोता को मिल चुके हैं कई सम्मान

इन अद्वितीय उपलब्धियों के लिए गीता समोता को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं. दिल्ली महिला आयोग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पुरस्कार 2023 और नागरिक उद्यम मंत्रालय द्वारा ‘गिविंग विंग्स टू ड्रीम्स अवॉर्ड 2023’ गीता को मिले हैं. वह कहतीं हैं, ‘पर्वतारोहण बहादुरों के लिए है, यह लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता. केवल वही लोग इन ऊंचाइयों को छू सकते हैं, जिनके भीतर एक खास ‘एक्स-फैक्टर’ होता है.’

युवा लड़कियों के लिए गीता का ये है संदेश

गीता समोता का युवा लड़कियों के लिए उनका संदेश स्पष्ट और सरल है, ‘बड़े सपने देखो, मेहनत करो और कभी हार मत मानो.’ उनकी यह सोच हर प्रेरणा से बढ़कर, उस असंभव को संभव में बदलने की शक्ति देती है. उनकी ऐतिहासिक सफलता से प्रेरित होकर CISF ने वर्ष 2026 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए पूर्णतः समर्पित CISF पर्वतारोहण दल भेजने की योजना बनायी है. यह केवल एक अभियान नहीं, साहस, समर्पण और संगठनात्मक आत्मविश्वास का प्रतीक होगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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