Rourkela News: रसोई गैस संकट : डीजल भट्ठी की ओर लौटे कई होटल मालिक, फास्ट फूड और स्ट्रीट वेंडरों के रोजगार पर मंडरा रहा संकट

Updated at : 14 Mar 2026 11:38 PM (IST)
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Rourkela News: रसोई गैस संकट : डीजल भट्ठी की ओर लौटे कई होटल मालिक, फास्ट फूड और स्ट्रीट वेंडरों के रोजगार पर मंडरा रहा संकट

Rourkela News: रसोई गैस संकट के बीच राउरकेला व आसपास के क्षेत्रों में होटल मालिकों ने डीजल भट्ठी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.

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Rourkela News: रेलनगरी बंडामुंडा में इन दिनों रसोई गैस सिलिंडर की कमी ने फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड बेचने वाले छोटे कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है. गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कुछ होटल संचालकों और वेंडरों के सामने अपनी दुकानें बंद करने की नौबत आ गयी है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है.

कोयला या लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन के सीमित उपयोग की अनुमति की मांग की

जानकारी के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर फास्ट फूड कारोबार पर देखने को मिल रहा है. बंडामुंडा में समोसा, चाउमीन, पकौड़ी समेत अन्य तली-भुनी चीजें बेचने वाले कई स्टॉल संचालक गैस की कमी के कारण नियमित रूप से दुकानें नहीं चला पा रहे हैं. स्थानीय फास्ट फूड विक्रेताओं और स्ट्रीट वेंडरों का कहना है कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने से उनकी आय पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए अस्थायी तौर पर खाना पकाने के लिए कोयला या लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन के सीमित उपयोग की अनुमति दी जाये, ताकि उनका कारोबार जारी रह सके और परिवार का भरण-पोषण प्रभावित न हो.

रेलवे के रनिंग रूम में इलेक्ट्रिक चूल्हे पर पकाया जा रहा खाना

इधर रेलवे के रनिंग रूम में भी गैस सिलिंडर की कमी का असर देखने को मिल रहा है. बंडामुंडा के डूमेरता स्थित रनिंग रूम में रेलवे कर्मचारियों के लिए फिलहाल इलेक्ट्रिक चूल्हे पर खाना पकाया जा रहा है. वहां के एक कर्मचारी ने बताया कि फिलहाल स्टॉक में केवल एक गैस सिलिंडर बचा है. यदि वह भी खत्म हो जाता है, तो खाना पकाने में परेशानी हो सकती है. हालांकि इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इलेक्ट्रिक चूल्हा और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेने की तैयारी की गयी है. गैस आपूर्ति की समस्या से बंडामुंडा के छोटे कारोबारियों और रेलवे से जुड़े संस्थानों, दोनों को जूझना पड़ रहा है. ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द गैस सिलिंडर की आपूर्ति सामान्य की जाये, ताकि छोटे व्यापारियों और कर्मचारियों को राहत मिल सके.

लागत बढ़ने पर समोसा-वड़ा और आलूचॉप के दाम बढ़ाकर 15 रुपये प्रति पीस किया

कॉमर्शियल सिलेंडर की अनुपलब्धता का असर अब बाजार में दिखने लगा है. कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं कर पाने पर कुछ होटलों ने डीजल भट्ठी का इस्तेमाल शुरू किया है. वहीं इससे लागत के आधार पर खाद्य सामग्री के नये मूल्य निर्धारित कर दिये गये हैं. समोसा कई जगह 10 की जगह 12 और 12 की जगह 15 रुपये प्रति पीस बिकना शुरू हो गया है. यही हाल वड़ा और कचौड़ी का भी है. डेली मार्केट स्थित प्रसिद्ध नवरंग होटल के मालिक सुरेश शर्मा ने बताया कि अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. कमर्शियल गैस सिलिंडर मिल नहीं रहा, नतीजतन हमें अब पुराने तरीके से ही उत्पादन करना पड़ रहा है. लागत में फर्क आने के कारण दरों पर भी इसका असर पड़ा है. श्री शर्मा ने बताया कि पहले कोयला के चूल्हे का इस्तेमाल होता था. बाद में डीजल भट्ठी और अब हम एलपीजी का इस्तेमाल कर रहे थे. लेकिन एलपीजी नहीं होने के कारण अब दोबारा डीजल भट्ठी पर शिफ्ट करना पड़ गया है. अभी डीजल के रेट तो स्थिर हैं, लेकिन अगर इसमें भी किसी तरह की बढ़ोतरी होती है, तो फिर कोयला चूल्हा की ओर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. हालांकि हमें उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान निकलेगा और स्थितियां सामान्य होंगी, ताकि दरें सामान्य रह सकें.

120 रुपये में बिक रहा जलावन लकड़ी का बंडल

मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण व्यावसायिक गैस सिलिंडरों का संकट मंडरा रहा है, जिससे होटल, नाश्ते की दुकानें और फास्ट फूड सेंटर प्रभावित हो रहे हैं. ऐसी स्थिति में कुछ नाश्ते की दुकानों के मालिक लकड़ी के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं. वहीं कुछ दुकानदार लकड़ी के चूल्हे के सहारे अपना कारोबारी जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं. इससे लकड़ी का काम भी बढ़ गया है और अब लकड़ी का एक बंडल 120 रुपये में बिकने लगा है. राउरकेला रेलवे स्टेशन चौक के पास नाश्ते की दुकान चलाने वाले सुरेश साहू पहले व्यावसायिक गैस सिलिंडरों का इस्तेमाल करते थे. उन्होंने बताया कि पहले की तरह सिलिंडर आसानी से उपलब्ध नहीं होने के कारण मैंने लकड़ी के बंडल खरीदने का फैसला किया. पिछले दो दिनों से वे 120 रुपये प्रति बंडल की दर से लकड़ी खरीदकर अपनी दुकान चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस दिन लकड़ी नहीं मिलेगी, उन्हें दुकान बंद करने के लिए विवश होना पड़ेगा.

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BIPIN KUMAR YADAV

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