कोल्हान की सड़कों पर अंधेरे से उजड़ गया 324 परिवार, कोल्हान रक्षा संघ ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :23 Apr 2026 3:03 PM (IST)
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Chakradharpur News

उपायुक्त से मुलाकात करने जाते कोल्हान रक्षा संघ के पदाधिकारीगण. फोटो: प्रभात खबर

Chakradharpur News: कोल्हान क्षेत्र में सड़कों की खराब स्थिति और अंधेरे को लेकर कोल्हान रक्षा संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है. पांच प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइट और पेयजल की मांग की गई है. 324 मौतों के आंकड़े के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है और आंदोलन की चेतावनी दी गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चक्रधरपुर से अनिल तिवारी और शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Chakradharpur News: चक्रधरपुर में कोल्हान रक्षा संघ ने सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम जिले की मुख्य सड़कों की बदहाली और वहां पसरे अंधेरे को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संघ ने उपायुक्त और आरक्षी अधीक्षक को पत्र सौंपकर पांच प्रमुख मार्गों पर तत्काल स्ट्रीट लाइट और पेयजल सुविधा बहाल करने की मांग की है. इन सड़कों को क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन वर्तमान हालात बेहद चिंताजनक हैं.

भारी वाहनों से मुनाफा, जनता को मिल रहा अंधेरा

संघ के अध्यक्ष डिबार जोंको ने मामले की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि टाटा, एसीसी और श्री सीमेंट जैसी बड़ी कंपनियों के भारी वाहन इन्हीं सड़कों से गुजरकर करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं. लेकिन स्थानीय लोगों को बदले में सिर्फ धूल, अंधेरा और खतरा ही मिलता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति सामाजिक असंतुलन और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है.

324 मौतें बनीं चिंता का बड़ा कारण

संघ के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान इन सड़कों पर 324 लोगों की मौत हो चुकी है. डिबार जोंको ने कहा कि यह आंकड़े सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि 324 परिवारों के उजड़ने की दर्दनाक कहानी हैं. उन्होंने साफ कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन अंधेरे और असुरक्षा की कीमत पर लोगों की जान जाना स्वीकार्य नहीं है.

बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर प्रशासन से सवाल

संघ के सक्रिय सदस्य रविंद मंडल ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर देश डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले की मुख्य सड़कें आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं. उन्होंने कहा कि रात के समय ये सड़कें पूरी तरह ब्लैक स्पॉट बन जाती हैं, जहां न रोशनी होती है और न ही यात्रियों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था.

5 प्रमुख मार्गों पर तत्काल कार्रवाई की मांग

महासचिव मान सिंह हेम्ब्रम द्वारा सौंपे गए पत्र में पांच प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है. इनमें सरायकेला से चाईबासा मार्ग, सरायकेला से खरसावां मार्ग, सरायकेला से राजनगर मार्ग, राजनगर से चाईबासा (गितिलपी) मार्ग और चाईबासा से चक्रधरपुर मार्ग शामिल हैं. यह पत्र 22 अप्रैल 2026 को उपायुक्त कार्यालय में औपचारिक रूप से सौंपा गया.

उग्र आंदोलन की चेतावनी

संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इन संवेदनशील मार्गों पर जल्द स्ट्रीट लाइट और पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई, तो कोल्हान रक्षा संघ उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा. संघ का कहना है कि लौह अयस्क और कोयला लदे भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इन सड़कों पर सुरक्षा मानक तय करना प्रशासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है.

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आंदोलन में कई प्रमुख सदस्य रहे मौजूद

इस मौके पर संघ के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें डिबार जोंको, सुमित्रा जोंको, मानसिंह हेंब्रम, जयसिंह हेंब्रम, दुर्गा चरण हेंब्रम, चंद्र मोहन मुर्मू, मानशुख कुजूर, मंगल सिंह लागुरी, रविंद्र मंडल और लक्ष्मण मंडल सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे. सभी ने एकजुट होकर क्षेत्र की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाई.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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