चाईबासा प्रशासन के कार्यशैली पर भड़के पूर्व CM अर्जुन मुंडा, कहा- यह प्रशासनिक अकड़ है या शिष्टाचार की कमी?

Published by : Sameer Oraon Updated At : 17 May 2026 7:06 PM

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अर्जुन मुंडा की फाइल फोटो, Pic Credit- X

Arjun Munda: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने चाईबासा जिला प्रशासन पर प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की अनदेखी का आरोप लगाया है. उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखकर इसे प्रशासनिक अकड़ और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता बताया है. पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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Arjun Munda, चाईबासा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में जनजातीय मंत्री रह चुके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता अर्जुन मुंडा ने राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. चाईबासा दौरे के दौरान जिला प्रशासन के रवैये से आहत होकर पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है. उन्होंने चाईबासा जिला प्रशासन पर सामान्य शिष्टाचार, आवश्यक औपचारिकताओं के निर्वहन की अनदेखी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता बरतने का सीधा आरोप लगाया है.

“पद पर नहीं हूं, लेकिन संवैधानिक गरिमा का तो ख्याल रखें”: अर्जुन मुंडा

अर्जुन मुंडा ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये प्रशासन को उनकी संवैधानिक पृष्ठभूमि की याद दिलाई. उन्होंने लिखा, “वर्तमान में मैं न तो विधायक हूं, न सांसद और न ही मंत्री, लेकिन मैं झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री और भारत सरकार में मंत्री के संवैधानिक पद पर रहा हूं.” उन्होंने आगे आगे एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उनका चाईबासा सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम हुआ था. परंतु इस दौरान चाईबासा जिला प्रशासन द्वारा सामान्य शिष्टाचार और तय औपचारिकताओं का भी पालन नहीं किया गया, जो कि बेहद खेद और चिंता का विषय है.

प्रशासनिक अकड़ और अनुभव की कमी पर उठाया सवाल

प्रशासन के इस रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है. उन्होंने कहा, “यह स्थिति या तो प्रशासनिक शिष्टाचार एवं अनुभव की कमी को दर्शाती है, अथवा प्रशासनिक अकड़ को, या फिर राज्य सरकार के लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सामान्य सामाजिक मर्यादाओं के प्रति उदासीनता को प्रकट करती है.”

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संवाद की स्वस्थ परंपरा खत्म होने का जताया दुख

अर्जुन मुंडा ने प्रशासनिक व्यवस्था की पुरानी और सुदृढ़ परंपराओं का जिक्र करते हुए वर्तमान वर्ककल्चर पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि पूर्व में यह एक स्वस्थ परंपरा रही है कि जब भी सार्वजनिक जीवन से जुड़ा कोई वरिष्ठ व्यक्ति जिले में आता था, तो जिला प्रशासन के अधिकारी उनसे मुलाकात करते थे. इस दौरान जिले की सामान्य परिस्थितियों, चल रहे विकास कार्यों और जनता से जुड़े सीधे सरोकारों (जनसरोकारों) पर सार्थक संवाद स्थापित किया जाता था. बीजेपी के इस दिग्गज नेता की मानें तो यह कोई केवल दिखावे की औपचारिकता भर नहीं होती थी, बल्कि इससे प्रशासन की सकारात्मक वर्क कल्चर, जनता के प्रति जवाबदेही और खुद जिले की गरिमा दिखाई पड़ती थी.

पश्चिम सिंहभूम की ऐतिहासिक गरिमा का दिया हवाला

अपने पोस्ट में अर्जुन मुंडा ने चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम सिंहभूम एक ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिला है, जिसकी अपनी एक विशिष्ट सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान रही है. ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिले में प्रशासन का इस प्रकार का उदासीन व्यवहार और कार्यशैली निश्चित रूप से एक गंभीर चिंतन का विषय है.

राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठने की नसीहत

आर्टिकल के अंत में अर्जुन मुंडा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए नौकरशाही को नसीहत दी है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ब्यूरोक्रेसी (प्रशासन) से यह साफ तौर पर उम्मीद की जाती है कि वह राजनीतिक भिन्नताओं और मतभेदों से ऊपर उठे. अधिकारियों को हर हाल में संवैधानिक मर्यादाओं, प्रशासनिक शिष्टाचार और सामाजिक सौजन्यता का समुचित पालन सुनिश्चित करना चाहिए.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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