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भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, धैर्य व धर्म पालन की मिसाल : डीसी

Updated at : 03 Oct 2025 10:04 PM (IST)
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भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, धैर्य व धर्म पालन की मिसाल : डीसी

आतिशबाजी के बीच किया गया रावण दहन, जय श्रीराम के नारे से गूंज उठा स्टेडियम

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सिमडेगा. नवरात्र की भक्ति और नौ दिनों तक चली पूजा-अर्चना के बाद विजयादशमी पर्व सिमडेगा में धूमधाम से मनाया गया. असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व जिला मुख्यालय स्थित अलबर्ट एक्का स्टेडियम रावण दहन के साथ संपन्न हुआ. रावण दहन कार्यक्रम के दौरान बंगाल से आये कलाकारों द्वारा प्रस्तुत आतिशबाजी ने पूरे वातावरण को भव्य और रोमांचक बना दिया. रावण के पुतले में अग्निबाण प्रज्वलित होते आकाश रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा. उपस्थित जनसमूह जय श्रीराम के उद्घोष के साथ उत्सव के रंग में सराबोर दिखा. मौके पर उपायुक्त कंचन सिंह और पुलिस अधीक्षक एम अर्शी मौजूद थे. उन्होंने राम व लक्ष्मण बने बच्चों के साथ मिल कर अग्निबाण प्रज्वलित कर अधर्म और असत्य के प्रतीक रावण का दहन किया. रावण पुतला धू-धू कर जल उठा और विजयादशमी का संदेश एक बार फिर गूंज उठा कि सत्य की हमेशा विजय होती है. कार्यक्रम से पूर्व रावण दहन समिति की ओर से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा, उपायुक्त कंचन सिंह, पुलिस अधीक्षक एम अर्शी, उपविकास आयुक्त दीपांकर चौधरी तथा अनुमंडल पदाधिकारी प्रभात रंजन ज्ञानी सहित सभी आगंतुक अतिथियों का चुनरी ओढ़ा कर और तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया. मौके पर उपायुक्त ने कहा कि सरकार ने जिस उद्देश्य के साथ उन्हें जिले में पदस्थापित किया है, उसे पूरा करने और विकास योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के लिए जनसहयोग और आशीर्वाद की आवश्यकता है. उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया. राम का जीवन त्याग, धैर्य और धर्मपालन की मिसाल है. कहा कि रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ. उपायुक्त ने कहा कि राम इसलिए आज भी पूज्य हैं, क्योंकि उनमें करुणा, मर्यादा और दूसरों के कल्याण की भावना थी. हमें अपने अंदर के रावण को पहचान कर उसका अंत करना चाहिए. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा समेत अन्य अतिथियों ने भी विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे आत्ममंथन का पर्व बताया. सभी ने एक स्वर में कहा कि हमें अपने भीतर छिपे अहंकार, द्वेष और बुराइयों दूर करना होगा. पुलिस अधीक्षक एम अर्शी ने कहा कि हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति इस उत्सव की भव्यता को दर्शाती है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि उत्सव के दौरान अपनी और दूसरों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें.

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