सरायकेला कोर्ट का बड़ा फैसला, गैर इरादतन हत्या के केस में आरोपी को 10 साल की जेल, जानें पूरा मामला

भारतीय कोर्ट की तस्वीर, Pic Credit- Chatgpt AI
Seraikela Court News: सरायकेला कोर्ट ने मारपीट और गैर इरादतन हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. आरोपी शिवशंकर रजक को IPC 304 के तहत 10 साल जेल की सजा और जुर्माना लगाया है. जानिए पूरा मामला और अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा.
Seraikela Court News, सरायकेला (प्रताप मिश्रा): सरायकेला में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाशंकर सिंह की अदालत ने गुरुवार को मारपीट और गैर इरादतन हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने आरोपी शिवशंकर रजक को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता 304 के तहत 10 साल जेल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त जेल में गुजारना होगा.
जुर्माना नहीं देने पर 1-1 माह अतिरिक्त जेल की सजा का प्रावधान
अदालत ने आरोपी को अन्य धाराओं में भी दोषी पाया है. भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत 6 माह का साधारण कारावास, धारा 341 के तहत 1 माह का साधारण कारावास, जबकि धारा 504 और 506 के तहत एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गयी है. इन धाराओं में जुर्माना नहीं देने पर एक-एक माह का अतिरिक्त जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.
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क्या था मामला
मामला सरायकेला थाना क्षेत्र के सीनी ओपी अंतर्गत बांकसाई गांव से जुड़ा है. गांव के रहने वाले अविनाश हरिजन ने 3 दिसंबर 2023 को सीनी ओपी में आरोपी शिवशंकर रजक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया था कि आरोपी रात करीब 10 बजे अविनाश के घर में घुस आया और गाली-गलौज करते हुए उसे घर से बाहर खींचकर सड़क पर ले गया, जहां उसके साथ मारपीट की गयी. मारपीट के दौरान अविनाश के पिता नेपाल हरिजन बीच-बचाव करने पहुंचे. इसी दौरान आरोपी ने उन्हें जोर से धक्का दे दिया, जिससे वे सिर के बल सड़क पर गिर पड़े और बेहोश हो गये. आनन-फानन में अविनाश के छोटे भाई श्रवण हरिजन उन्हें इलाज के लिए सरायकेला सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने नेपाल हरिजन को मृत घोषित कर दिया.
घटना के बाद पुत्र अविनाश हरिजन ने दर्ज कराया था मामला
घटना के बाद अविनाश हरिजन ने सीनी ओपी में मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया. सुनवाई के दौरान आदालत में दिये गये प्रूफ और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई. अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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