उद्योग विभाग के अधिकारियों ने कोल्हान समेत पूरे राज्य में रेशम उत्पादन बढ़ाने पर किया मंथन

Updated at : 29 Aug 2020 3:46 AM (IST)
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उद्योग विभाग के अधिकारियों ने कोल्हान समेत पूरे राज्य में रेशम उत्पादन बढ़ाने पर किया मंथन

राज्य में तीन हजार मीट्रिक टन रेशम उत्पादन का लक्ष्य, कोल्हान व संथाल परगना प्रक्षेत्र में 12-12 सौ मीट्रिक टन तसर का होगा उत्पादन

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खरसावां : कोल्हान समेत पूरे राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिये प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरु कर दी गयी है. हस्तकरघा, रेशम व हस्तशील्प निदेशालय के निदेशक उदय प्रताप (भाप्रसे) ने खरसावां के अग्र परियोजना केंद्र में कोल्हान प्रक्षेत्र के अधिकारियों के साथ बैठक कर रेशम उत्पादन बढ़ाने पर मनंथन किया.

बैठक के पश्चात विभागीय निदेशक उदय प्रताप ने बताया कि रेशम से संबंधित योजनाओं के क्रियांवयन के लिये निर्देशालय से तैयार कर विभाग को भेजा गया है. विभाग में योजनाओं के स्वीकृति पर विचार चल रहा है. योजनाओं को स्वीकृति मिलते ही उनका क्रियांवयन भी शुरु हो जायेगा. पिछले वर्ष राज्य में 2694 मीट्रिक टनरेशम का उत्पादन हुआ था.

इस वर्ष तीन हजार मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य है. इसमें कोल्हान व संथाल परगना में समान रुप से 12-12 सौ मीट्रिक टन तसर का उत्पादन होने का लक्ष्य है. साथ ही पलामु, लातेहार क्षेत्र में दो-तीन सौ मीट्रिक टन का रेशम का उत्पादन किया जायेगा. रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिये सरकार कार्य योजना बना कर क्रियांवित करेगी. आने वाले एक दो वर्षों में सात हजार मीट्रिक टन रेशम उत्पादन किया जायेगा.

सिल्क से सात सौ करोड़ की हुई आमदानी, अब प्री कोकून के साथ पोष्ट कोकून पर भी होगा काम

हस्तकरघा, रेशम व हस्तशील्प निदेशालय के निदेशक उदय प्रताप (भाप्रसे) ने बताया कि सिल्क के जरीये राज्य को सात सौ करोड़ से अधिक की आमदानी हुई है. आने वाले समय में सिल्क उद्योग को ओर अधिक बढ़ावा दिया जाये जायेगा. प्री कोकून के साथ साथ पोष्ट कोकून पर भी कार्य होगा. यानी की कोल्हान क्षेत्र भी तसर कोसा के उत्पादन के साथ साथ सुत कताई व कपड़ों की बुनाई का कार्य किया जायेगा. इससे स्थानीय स्तर पर लोगों का रोजगार बढ़ेगा.

तसर सिल्क को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिये हुई है जीआई टैग की पहल

भारतीय प्रसाशनिक सेवा के अधिकारी उदय प्रताप ने कहा कि तसर डाबा का उदगम स्थल कोल्हान है. तसर डाबा के उदगम स्थल पर इसे ओर अधिक बढ़ावा दिया जायेगा. डाबा रेशम को विश्व पटल पर ख्याति दिलाने के लिये जीआई टैग की पहल की गयी है. राज्य में कुल डेढ़ लाख से अधिक रेशम कृषक रेशम के जरीये रोजगार कर रहे है. कोरोना संकट काल में भी रेशम के जरीये बड़ी संख्या में किसानों को रोजगार मिला.

बैठक में ये थे मौजूद

बैठक में मुख्य रुप से हस्तकरघा, रेशम व हस्तशील्प निदेशालय के निदेशक उदय प्रताप, डिप्टी डायरेक्टर निरंजन तिर्की, सहायक उद्योग निदेशक (मुख्यालय) अनील कुमार, सहायक उद्योग निदेशक (कोल्हान) डॉ प्रियदर्शी अशोक, उद्योग विभाग के अवर सचिव मनोज कुमार, अग्र परियोजना पदाधिकारी खरसावां-कुचाई सुनील कुमार शर्मा, पीपीओ चाईबासा कृष्णकांत यादव, पीपीओ हाटगम्हरिया अनुपम कुमार सिन्हा, पीपीओ घाटशिला कृष्णानंद यादव, पीपीओ चक्रधरपुर विनोद कुमार सिन्हा आदि उपस्थित थे.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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