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Seraikela Kharsawan News : ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी बाराबाना के किसान की किस्मत

Updated at : 02 Nov 2025 11:33 PM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी बाराबाना के किसान की किस्मत

सरायकेला के बाराबाना गांव के किसान सतीश देवगम ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और अपनी सफलता की नयी कहानी लिखी.

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सरायकेला.

सरायकेला के बाराबाना गांव के किसान सतीश देवगम ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और अपनी सफलता की नयी कहानी लिखी. यह प्रयास उनके लिए एक सफल स्टार्टअप साबित हुआ. इस वर्ष सतीश को ड्रैगन फ्रूट की खेती से लगभग डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हुई. हालांकि, बारिश के कारण इस बार उपज में थोड़ी कमी आयी, लेकिन उत्पादन और लाभ दोनों ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं.

सतीश के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की खेती कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली फसल है. शुरुआती चरण में पौधे लगाने और तैयारी में थोड़ी पूंजी लगती है, लेकिन इसके बाद कई वर्षों तक इससे स्थायी आय होती है. एक बार लगाये गये पौधे आठ से 10 वर्षों तक फल देते हैं. सतीश के खेत में फिलहाल 600 से अधिक पौधे हैं, जिन पर उगने वाले गुलाबी-लाल ड्रैगन फ्रूट लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं.

पारंपरिक खेती छोड़ नवाचार की राह पर

सतीश को जब पारंपरिक खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने जोखिम उठाकर ड्रैगन फ्रूट जैसी नयी फसल अपनायी. उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों का सहारा लिया, जिनमें मृदा परीक्षण, स्वॉयल हेल्थ कार्ड, ड्रिप सिंचाई और उन्नत फसल प्रबंधन शामिल है. बांस के सहारे उन्होंने खुद ड्रिप सिंचाई प्रणाली तैयार की और प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल की. उनके परिश्रम और नवाचार ने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी. सतीश की पहल इस बात का उदाहरण है कि नयी फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से ग्रामीण किसान भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं. उनका अनुभव यह दर्शाता है कि निरंतर मेहनत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सरकारी योजनाओं का सहयोग सफलता की कुंजी है.

बाजार में सतीश के ड्रैगन फ्रूट की मांग

सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में सतीश देवगम के उगाये ड्रैगन फ्रूट की भारी मांग है. अधिकतर फल स्थानीय बाजार में ही बिक जाते हैं, जबकि बाहर से आये व्यापारी भी खरीदारी के लिए उनके खेतों तक पहुंचते हैं. इस वर्ष बाजार में ड्रैगन फ्रूट 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक बिका है. सतीश ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कम पानी में अच्छी उपज देता है और गर्म व सूखी जलवायु इसके लिए अनुकूल होती है. एक पौधा साल भर में 20 से 25 फल तक देता है. ड्रैगन फ्रूट की इस खेती ने उन्हें आत्मनिर्भरता का नया रास्ता दिखाया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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