अब खेतों तक फिर पहुंचेगा सोना जलाशय का पानी, जानें क्या है तैयारी
कुचाई के केरकेट्टा स्थित सोना सिंचाई योजना का डैम .
खरसावां की सोना सिंचाई योजना की जर्जर वितरणियों के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू हो गई है. प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही किसानों को सिंचाई में बड़ी राहत मिलेगी.
खरसावां | वर्षों से जर्जर सोना सिंचाई योजना की चार वितरणियों के दिन अब बहुरने की उम्मीद जगी है. सोना सिंचाई योजना के वितरणियों की बदहाली का मामला खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने सोमवार को विधानसभा में तारांकित प्रश्न के जरीये उठाया. विधायक दशरथ गागराई ने अपने सवाल में कहा - सोना सिंचाई योजना के अंतर्गत शाखा नहर से निकलने वाली छह अदद वितरणियों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है. इनमें से चार अदद वितरणियां भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं. उन्होंने सरकार से इन वितरणियों के ईआरएम कार्य को स्वीकृति देने के संबंध में जानकारी मांगी.
विभाग ने वितरणियों की जर्जर स्थिति को स्वीकार किया
विधायक दशरथ गागराई के सवाल पर जल संसाधन विभाग ने लिखित उत्तर में वितरणियों की जर्जर स्थिति और उनके जीर्णोद्धार की आवश्यकता को स्वीकार किया है. विभाग ने बताया - वितरणियों के ईआरएम कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने की कार्रवाई की जा रही है. विभाग ने स्वीकार किया कि वितरणियों के बेड में गाद जमा होने, जगह-जगह झाड़ी उगने व नहर के बैंक के अस्तित्व समाप्त होने के कारण सिंचाई का पानी कुछ ही दूरी तक पहुंच पाता है. इन वितरणियों के जीर्णोद्धार के लिए कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, चाईबासा द्वारा प्राक्कलन समर्पित किया जा चुका है.
प्राक्कलन तैयार, अब प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार
जल संसाधन विभाग ने अपने जवाब में बताया - चार वितरणियों के जीर्णोद्धार के लिए कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, चाईबासा की ओर से प्राक्कलन समर्पित किया जा चुका है. अब इस महत्वपूर्ण सिंचाई योजना के वितरणियों के ईआरएम कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति देने की प्रक्रिया चल रही है. स्वीकृति मिलने के बाद नहर एवं वितरणियों की मरम्मत का रास्ता साफ हो जायेगा.
कभी तीन प्रखंडों के खेतों को मिलता था पर्याप्त पानी
सोना जलाशय योजना (केरकेट्टा डैम) से पिछले चार दशकों से खरसावां, कुचाई और सरायकेला क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती रही है. लेकिन वर्षों से वितरणियों की नियमित सफाई और मरम्मत नहीं होने के कारण योजना की सिंचाई क्षमता करीब करीब 40 फिसदी घट गयी है. जल संग्रहण स्थल (बियर) में मिट्टी-बालू जमा होने के साथ वितरणियों की खराब स्थिति भी इसकी बड़ी वजह बनी हुई है. किसानों का कहना है कि वितरणियों का जीर्णोद्धार होने से नहर का पानी फिर खेतों तक पहुंच सकेगा. इससे खरीफ के साथ अन्य फसलों की खेती को भी सहारा मिलेगा और सिंचाई पर निर्भर किसानों को सीधा लाभ होगा.
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लेखक के बारे में
By शचिंद्र कुमार दाश
शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।
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