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बैंक ऋण ग्रामीण क्षेत्रों में पति-पत्नी के झगड़े का बन रहा कारण : चंपाई सोरेन

Updated at : 08 Jan 2019 8:15 PM (IST)
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बैंक ऋण ग्रामीण क्षेत्रों में पति-पत्नी के झगड़े का बन रहा कारण : चंपाई सोरेन

– महिलाओं कोस्‍वावलंबी बनाने के लिए पांच-पांच लाख अनुदान दे सरकार सरायकेला : स्वावलंबन के नाम पर महिलाओं को बैंक से ऋण दिलाया जा रहा है ताकि वे सदैव कर्ज में डूबे रहे. उक्त बातें स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन ने टाउन हॉल में मंगलवार को आयोजित सखी संवाद के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. […]

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– महिलाओं कोस्‍वावलंबी बनाने के लिए पांच-पांच लाख अनुदान दे सरकार

सरायकेला : स्वावलंबन के नाम पर महिलाओं को बैंक से ऋण दिलाया जा रहा है ताकि वे सदैव कर्ज में डूबे रहे. उक्त बातें स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन ने टाउन हॉल में मंगलवार को आयोजित सखी संवाद के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. विधायक ने कहा कि जेएसएलपीएस के नाम पर ग्रामीण महिलाओं का शोषण किया जा रहा है. जेएसएलपीएस के लोग मोटी तनख्वाह लेकर ग्रामीण महिलाओं को बैंक से कर्ज दिला रहे हैं, जो आगे चल कर पति-पत्नी में झगड़े का कारण भी बन रही है.

जेएसएलपीएस कार्यालय में कार्यरत पदाधिकारी मोटी-मोटी तनख्वाह में काम कर रहे हैं. जबकि, गांव की महिलाओं को महीने में 1500 रुपये देकर दिनभर दौड़ाया जा रहा है. विधायक ने कहा कि सरकार महिलाओं का विकास नहीं चाहती है. स्वावलंबन के नाम पर अधिकारियों के वेतन में करोड़ों रुपये खर्च करने वाली राज्य सरकार गांव-गांव में सिंचाई योजनाओं को दुरुस्‍त करें.

किसानों के खेतों में पानी पहुंचने का काम करें. जिससे क्षेत्र का विकास होगा. साथ ही प्रत्येक महिला समिति को पांच-पांच लाख रुपये का अनुदान दे ताकि महिलाएं उक्त पैसे से खेती कर स्ववलंबी बन सकें. विधायक ने कहा कि सरकार केवल गांव में समितियां बनाकर गांव में फूट डालने का काम कर रही है.

पंचायत प्रतिनिधि जिला परिषद् को सरकार निधि नहीं दे पा रही है और विभिन्न समितियां बनाकर पैसा देने की बात कह रही है. विधायक ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है इसलिए शहरी ग्रामीण का भेदभाव कर आदिवासी मूलवासियों का शोषण कर रही है. कहा कि पीएम आवास में ग्रामीण क्षेत्र के लाभुक को 1.3 लाख व शहरी लाभुक को 2.6 लाख दिया जा रहा है.

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