विलुप्त होने के कगार पर हैं तारा पहाड़ के दुर्लभ फॉसिल्स

Updated at : 08 Sep 2024 11:36 PM (IST)
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विलुप्त होने के कगार पर हैं तारा पहाड़ के दुर्लभ फॉसिल्स

चहारदीवारी का निर्माण नहीं होने के कारण नहीं हो पा रही देखरेख

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मंडरो. संरक्षण के अभाव में तारा पहाड़ पर बिखरे पड़े फॉसिल्स अब विलुप्त होते नजर आ रहे हैं. तारा पहाड़ पर प्रचुर मात्रा में फॉसिल्स लोगों को दिखायी पड़ते थे. पर यहां पर आनेवाले लोगों द्वारा फॉसिल्स को तोड़ कर कुछ हिस्से अपने साथ लेकर चले जाते हैं, जिसके कारण अब बड़े-बड़े फॉसिल्स छोटे-छोटे टुकड़ों में दिखाई पड़ने लगे हैं. फॉसिल्स को संरक्षित नहीं किया गया तो आनेवाले समय में यह दोबारा देखने को नहीं मिलेंगे. तारा पहाड़ पर राज सरकार व जिला प्रशासन की पहल पर चहारदीवारी निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था. पर विवाद से घिरे तारा पहाड़ पर फॉसिल्स को संरक्षित नहीं किया जा सका. इस जगह पर गर्मी पहाड़ में फॉसिल्स को संरक्षित करने के लिए पार्क का निर्माण कराया गया. सारा पहाड़ पर बिखरे फॉसिल्स यूं ही अपना अस्तित्व होते नजर आने लगे हैं. राजमहल की पहाड़ियों में प्रखंड के गुर्मी पहाड़ पर अवस्थित फॉसिल पार्क व ऑडिटोरियम सह म्यूजियम का उद्घाटन सीएम हेमंत सोरेन ने किया था. इसके साथ ही पर्यटक 15 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म को देखने पहुंच रहे हैं. ब्रह्मांड की संरचना के बारे में जानकारी मिलती है. बात करे तारा पहाड़ की तो यहां कई बार कई टूरिस्ट भू-वैज्ञानिकों का आगमन हो चुका है. राजमहल पर्वत शृंखला के मंडरो प्रखंड क्षेत्र के भुतहा वन चप्पा धौकुट्टी में अपरलेयर मोड़ वाले जीवाश्म की खोज हुई है. कहा जाता है कि इन पहाड़ी क्षेत्रों में डॉ बीरबल साहनी ने 14 प्रकार के जीवाश्म की पहचान की थी. 280 मिलियन वर्ष पुराने हैं जीवाश्म राजमहल की पहाड़ी पर जीवाश्म के रूप में यहां कदम-कदम पर जैव प्रजातियों के क्रमिक विकास के साक्ष्य बिखरे हैं. पेड़-पौधों के ये जीवाश्म करीब 280 मिलियन वर्ष पुराने हैं. तब यहां से गंगा की लहरें दिखती थी. चौंकिए नहीं, यह हकीकत है. लखनऊ के बीरबल साहनी पुरा वनस्पति विज्ञान संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान की टीम ने शोध में इसे साबित किया है. गोंडवाना बेसिन की राजमहल पहाड़ियों में ऊपर शैल परतों में मिले जीवाश्मों का अध्ययन कर इसके सबूत तलाशे हैं. क्या कहते हैं ग्राम प्रधान ग्राम प्रधान लच्छु मालतो का कहना था कि हम लोग बरसों से इस पहाड़ पर बिखरे पड़े फॉसिल्स की सुरक्षा की है. जिला प्रशासन के द्वारा चहारदीवारी का निर्माण भी करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था. हमलोगों की यही मांग थी कि यहां पर चहारदीवारी का निर्माण हो. पर हमलोगों को इसी से जोड़ कर वे रोजगार को रोजगार भी मुहैया कराया जाये. पर ना ही हमलोगों को रोजगार मिला और न ही यहां पर फॉसिल्स की संरक्षण के लिए चहारदीवारी का निर्माण कराया गया. इस वजह से आज बड़े-बड़े दिखने वाले फॉसिल्स आज छोटे हिस्सों में बंट गयी है. फॉसिल्स देखने आने वाले लोगों को जागरूक भी करते थे. क्या कहते हैं भूगर्भ शास्त्र के वैज्ञानिक यह बहुमूल्य धरोहर करोड़ों साल पुराना है, लेकिन जिस तरह जीवाश्म की चोरी व बर्बादी हो रही है. बहुत जल्द समाप्त हो जायेगी. जिला प्रशासन को चाहिए कि फॉसिल्स को संरक्षित करने के लिए यहां चहारदीवारी का निर्माण कराये. डॉ रंजीत कुमार सिंह, भूगर्भ शास्त्र के वैज्ञानिक क्या कहते हैं डीएफओ तारा पहाड़ पर बिखरे पड़े फॉसिल्स पार्क की जितनी भी एरिया है. वह रैयत की जमीन है. रैयत अपनी जमीन को नहीं देना चाहते हैं, जिसके चलते यहां पर फॉसिल्स की समुचित संरक्षण नहीं हो पाया है. यदि यहां पर रैयत अपनी जमीन को दे देते तो यहां भी अच्छे पार्क का निर्माण हो सकता था. प्रबल गर्ग, डीएफओ

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