घर-घर पेयजल पहुंचाने का उद्देश्य पर लगा ग्रहण

Updated at : 05 Mar 2025 8:17 PM (IST)
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घर-घर पेयजल पहुंचाने का उद्देश्य पर लगा ग्रहण

आठ करोड़ रुपये से अधिक खर्च तो हुए मगर लोगों को योजना का कोई लाभ नहीं हुआ

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बरहरवा. पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में तेज लू ने लोगों को काफी परेशान किया था. लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया था. उसी तरह इस वर्ष मार्च का पहले सप्ताह में ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. ऐसे में यदि उन गर्मी के दिनों में आप घर पर तो हैं लेकिन पेयजल की सुविधा नहीं मिल सके तो परेशानी और बढ़ सकती है. इसका कारण बरहरवा पेयजलापूर्ति योजना आठ माह से बंद है. इस योजना में सरकार ने 8 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च तो कर तो दी लेकिन इसका शत-प्रतिशत लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. बरहरवा के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए जाने के लिए राज्य सरकार के द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में जलापूर्ति की योजना की स्वीकृति दी गयी थी. विभाग के द्वारा योजना को पूरा करने का टेंटेटिव तारीख 30 नवम्बर 2019 दी गयी थी लेकिन विभाग की वेबसाइट पर योजना को सितंबर 2022 में पूरा किया गया, ऐसा दर्शाया गया है. वहीं, इस योजना का उद्देश्य घर-घर पेयजल पहुंचाना था. इस योजना में बरहरवा के अलावे पतना प्रखंड के भी गांव को जोड़ा गया है. इसमें बरहरवा प्रखंड के बरहरवा पार्ट, झिकटिया, रतनपुर के साथ साथ पतना प्रखंड के धरमपुर गांव को भी जोड़ा गया है. इनमें से बरहरवा प्रखंड के जुड़े गांव अब नगर पंचायत बरहरवा में हैं. वहीं, इस योजना के लिए राज्य सरकार के द्वारा 919.82 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी थी. योजना पर काम होते-होते तीन वित्तीय वर्ष में 822.80483 लाख रुपये की निकासी भी कर ली गयी. यानि अभी इस योजना में महज 97 लाख रुपये की ही राशि शेष रह गयी है. अभी पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के द्वारा इस योजना को नगर पंचायत बरहरवा को हैंड ओवर कराने पर बात हो रही है. 18 माह से मजदूरों को नहीं मिली मजदूरी, काम किया बंद योजना का लाभ बरहरवा प्रखंड के चार व पतना प्रखंड की दो पंचायतों के आधे दर्जन से अधिक गांवों के घरों को इसमें जोड़ा गया. कई गांव में पाइपलाइन बिछाने का भी काम हुआ. हालांकि बरहरवा प्रखण्ड के बरहरवा पूर्वी के तरफ पाइपलाइन तो बिछी लेकिन तकनीकी समस्या के कारण जलापूर्ति संभव नहीं हो सकी. योजना में काम करनेवाले मजदूरों के द्वारा भी कई बार मानदेय की समस्या को लेकर कार्य बंद कर दिया गया था. अभी इस योजना में काम करने वाले एक दर्जन से अधिक मजदूरों को 18 माह से मजदूरी नहीं मिल सकी है. जिस कारण से उन्होंने काम करना बंद कर दिया है. इस योजना के इंटेकवेल डहुआ आमझोर नदी के पास 2 कर्मी, डब्ल्यूटीपी पम्प हाउस में 4 कर्मी, बोरना पहाड़ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 2 कर्मी, पीएचडी धरमपुर स्थित पानी टँकी में 4 कर्मियों के अलावे पाइपलाइन मेंटेनेंस में भी चार कर्मी कार्य करते थे. कर्मी मुसुई किस्कु, जेठा किस्कु, सोम पवारिया, अर्जुन पावरिया, रोबिन हेम्ब्रम, जोगेश पावरिया, आबिल मालतो, बसंती मालतो सहित अन्य ने बताया कि उनलोगों की जमीन पर योजना के लिए प्लांट लगाया गया है. योजना की शुरुआत से ही वे लोग काम कर रहे हैं. लेकिन 18 माह की मजदूरी उन्हें अब तक नहीं मिली है. जिस कारण से उन्होंने काम बंद कर दिया है. उन्होंने बताया कि संवेदक के द्वारा करीब 2 वर्ष तक उन्हें 133 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी मिली थी. उसके बाद विभाग ने उन्हें करीब वर्ष 2023 के सितंबर माह तक 166 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान किया है. लेकिन उसके बाद से भुगतान नहीं हो सका है. बजट में बरहरवा पेयजलापूर्ति परियोजना की भी हुई है घोषणा झारखंड सरकार के द्वारा पेश किए गए बजट में बरहरवा नगर में भी पेयजलापूर्ति परियोजना शुरू किए जाने की बात कही गई है. बजट मे बरहरवा के अलावे 11 नगर निकायों चास, गिरिडीह, धनवार, कपाली,गुमला,लोहरदग्गा, विश्रामपुर, श्रीबंशीधर नगर, छतरपुर और हरिहरगंज में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पेयजलापूर्ति परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात कही गई है. इधर, बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र में पेयजलापूर्ति परियोजना को लेकर काम भी चल रहा है. जिसमें कर्मियों के द्वारा डब्ल्यूटीपी के लिए जमीन की खोज कर ली गई है. वहीं, इएसआर के लिए भी जमीन चिन्हित करने का काम चल रहा है. कहते हैं पदाधिकारी…… पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के सहायक अभियंता सुनील कुमार दत्त ने बताया कि बरहरवा पेयजलापूर्ति योजना को नगर पंचायत बरहरवा को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है. हैंडओवर होने के बाद इस योजना का लाभ लोगों को मिल सकेगा और इसमें कार्यरत कर्मियों को भी मजदूरी का भुगतान हो सकेगा. विभाग द्वारा इस पर काम चल रहा है.

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