Mughal Harem Stories : बादशाह पर प्रभाव के लिए रानियां दूसरी औरतों का कराती थीं अबॉर्शन; फैलाती थीं ये झूठी खबर

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मुगल हरम की कहानियां

The Mughal Harem Stories : मुगल हरम में बादशाह की प्रिय औरतें एक व्यवस्था के तहत एक साथ रहती थीं, जहां वो आपसी मेलजोल और प्यार का दिखावा करती थीं, जबकि सच्चाई यह थी कि उनके अंदर जलन, ईर्ष्या और नफरत की भावना होती थी. ये औरतें ना सिर्फ आपस में नफरत का भाव रखती थीं, बल्कि वे अपने पतियों के बुरे व्यवहार के प्रति भी क्रोध की भावना रखती थीं और मौका मिलने पर उसे प्रदर्शित भी कर देती थीं.

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Mughal Harem Stories : जब भी मुगल हरम की चर्चा होती है, तो वहां राजा बाबर से बहादुर शाह जफर तक की चर्चा होती है, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि मुगल हरम तब अपने परवान पर था, जब उसकी बागडोर अकबर, उसके बेटे जहांगीर और उसके बाद शाहजहां और औरंगजेब के पास रही. उसके बाद जिस प्रकार मुगल साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा उसी तरह हरम की आन-बान और शान भी कम होने लगी. हरम को मुगल पवित्र जगह मानते थे, जहां औरतें एक राजा की अधीनता स्वीकार कर रहती थीं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह अधीनता कभी प्रेमवश होती थी और कभी बेमन से से. जब प्रेम या अधीनता बेमन से होती थी, तो रानियां षडयंत्र भी करती थीं.

बुरे बर्ताव के बाद क्या करती थीं अच्छे घर की औरतें?

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मुगल हरम में साजिशें

हरम में जो औरतें होती थीं, वे सभी राजा से बहुत प्यार करती थीं या उनका राजा के साथ बहुत मधुर संबंध था. ऐसा नहीं है. कई औरतें कई बार मजबूरीवश बादशाह से प्रेम करती थीं. इतिहासकार किशोरी शरण लाल ने अपनी किताब The Mughal Harem में लिखा है कि अच्छे घर की औरतें अपने पति के बुरे बर्ताव और छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करती थीं. ऐसे में वो उनके साथ सामने में तो इज्जत के साथ रहती थीं, लेकिन अंदर ही अंदर उनके अंदर गुस्सा होता था, जो षडयंत्र के रूप में सामने आता था. शाह आलम के बेटे और औरंगजेब के पोते सुल्तान मुइज-उद-दीन को अपनी पत्नी से बहुत जलन थी, सिर्फ इसलिए कि वह बहुत खूबसूरत थी. किशोरी शरण लाल बताते हैं कि मनुची लिखते हैं, वह सबसे प्यारी और एकदम सही बनावट वाली लड़की थी, उसका पति इसीलिए उससे चिढ़ता था, उसके पति ने उसे कई बार जहर दिया,लेकिन मनुची उसे एंटीडोट देता था. बाद में उसकी पत्नी ने उसे जहर देकर मार डाला, क्योंकि वह उसके व्यवहार से दुखी थी.

रानियां, दूसरी औरतों को कैसे बनाती थीं बांझ?

मुगल काल की औरतों को एक इज्जत, एक हिम्मत, एक खासियत मिलती थी जिसे वे मुश्किल समय में दिखाने में कभी नहीं चूकती थीं. औरतों में जलन के कई उदाहरण देखे जा सकते हैं. औरतें जिसे अपना राइवल मानती थीं, उसके बारे में दुष्प्रचार करती थीं. साथ ही उसे राजा की प्रिय बनने से रोकने के लिए उसे बांझ बनाने की साजिश की जाती थी. राइवल को हराने का सबसे अच्छा तरीका यह देखना था कि उसके कोई बच्चे न हों, खासकर बेटे. अगर यह साजिश सफल हो जाती थी, तो ऐसी औरतें राजा के लिए बेकार हो जाती थीं और उनका प्यार खो देती थीं. बाबर अपनी अफगानी पत्नी बीबी मुबारिका का बहुत बड़ा फैन था. हरम की साजिशों के जरिए उसे मां बनने से रोकने के लिए दवाएं दी गईं और अकबर के राज की शुरुआत में ही वह बिना बच्चे के मर गई.

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ऐसे माहौल में एक औरत के लिए समय-समय पर यह कहना ज़रूरी था कि वह मां बनने वाली है. इस वजह से कई औरतें इस बात की अफवाह फैलाती थीं कि वो मां बनने वाली हैं. मुगल हरम में अबॉर्शन का इस्तेमाल पावर पॉलिटिक्स के खेल में दुश्मन राजकुमारों के जन्म को रोकने के लिए किया जाता था।.जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर बताते हैं. वे लिखते हैं क्योंकि यह रिवाज है कि पहला बेटा गद्दी पर बैठता है, भले ही वह गुलाम का बेटा हो, जैसे ही राजा के हरम को पता चलता है कि रानी या कोई और औरत गर्भवती है उसका मिसकैरेज कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाती थी. इस गलत काम के लिए वे कभी-कभी यूरोपियन डॉक्टरों की सर्विस लेती थीं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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