Mughal Harem Stories : अकबर को थी शराब और अफीम की लत, कॉकटेल का शौकीन था जहांगीर

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 03 Dec 2025 9:31 AM

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शराब के शौकीन थे मुगल

Mughal Harem Stories : मुगल बादशाह जहां अपने साम्राज्य विस्तार और शासन के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं उनकी शराब में रुचि भी काफी प्रसिद्ध है. जहांगीर तो कॉकटेल का शौकीन था, लेकिन अकबर के बारे में यह कहा जाता है कि वह शराब का सबसे बड़ा प्रेमी था. मुगल बादशाह सिर्फ शराब नहीं अफीम और तंबाकू का भी शौक रखते थे. नशे की लत ने अकबर के दो बेटों की जान जवानी में ही ले ली थी जिनका नाम था दानियल और मुराद.

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Mughal Harem Stories : मुगल हरम का जीवन शानो-शौकत से परिपूर्ण था. हरम में रहने वाली औरतें फिर चाहे वह बादशाह की मां हो, पत्नी, उपपत्नी, रखैल, बहन या उसकी कोई और रिश्तेदार सब की सब एक बेहतरीन जीवन जीती थीं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि उनके जीवन का उद्देश्य ही था राजा को खुशी देना. राजा की खुशी को परिभाषित करना जरा मुश्किल प्रतीत होता है क्योंकि एक ओर तो वो आदर्शों की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर उनके हरम में औरतों की बढ़ती संख्या सोचने पर विवश करती हैं.

खैर आदर्शों को किनारे रखें और यह जानें कि हरम में जीवन कैसा था? हरम में बादशाह सबसे अधिक समय अपनी शारीरिक इच्छा की पूर्ति के लिए गुजारता था. बादशाह की इस खुशी में शराब और शबाब दोनों ही साथी होते थे, हालांकि इस्लाम में शराब की मनाही है, लेकिन मुगल बादशाह इसके आदी थे और नशे में धुत्त रहना उन्हें पसंद भी था. औरंगजेब इस मामले में दूसरे मुगल शासकों से अलग था, वह शराब से दूर रहता था.

क्या मुगल बादशाह और राजकुमार शराब के आदी थे?

मुगल हरम के निर्माण के पीछे का मकसद था बादशाह का मजे लेना. वह खुद को आनंदित करने के लिए नृत्य, औरतों और नशे का सहारा लेते थे. इतिहासकार किशोरी शरण लाल अपनी किताब The Mughal Harem में लिखते हैं कि मुगल काल में सिर्फ बादशाह ही नहीं सभी अमीर बहुत ज्यादा शराब पीते थे. मुगल बादशाह और राजकुमार सिर्फ शराब ही नहीं पीते थे वे अफीम के भी आदी थे. किशोरी शरण लाल लिखते हैं कि बाबर शराब पीता था और अफीम से बनी दवा माजून लेता था. बाबर ने अपनी शराब पार्टियों के बारे में खुलकर बात की है, लेकिन उसने औरतों के साथ रात की दावतों या शराब पार्टी का कोई जिक्र नहीं किया है. हुमायूं को नशे की लत इस कदर लग गई थी कि उसकी शारीरिक शक्ति खत्म हो गई थी और वह औरतों से दूर भागता था. मुगल बादशाह तंबाकू का भी खूब सेवन करते थे और ऐसा जिक्र मिलता है कि असद बेग दक्कन (1605) से तंबाकू की बड़ी सप्लाई लाया था.

क्या बादशाह अकबर भी शराब के शौकीन थे?

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मुगल हरम की रोचक कहानियां

अकबर को मुगलों का सबसे महान शासक माना जाता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि उसने मुगल साम्राज्य को मजबूत बनाने और उसके विस्तार में अहम भूमिका निभाई. उसने कला-संस्कृति का भी काफी विकास किया, लेकिन अगर शराब की लत की बात करें, तो अपने पिता और दादा की तरह ही नशे का आदी था. अकबर के बारे में किशोरी शरण लाल लिखते हैं कि वह बहुत ज्यादा शराब पीता था. शराब के साथ ही वह अफीम की डोज भी बहुत ज्यादा लेता था. वह अफीम की नशीली चीज डाक खाता था. वह तंबाकू का भी शौकीन था. अकबर के दो बेटों दानियल और मुराद की मौत अत्यधिक शराब के सेवन की वजह से जवानी में ही हो गई थी.

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क्या कॉकटेल का शौकीन था जहांगीर?

ग्रेट अकबर के बेटे और नूरजहां और अनारकली जैसी महिलाओं से इश्क करने वाले बादशाह जहांगीर के बारे में किशोरी शरण लाल लिखते हैं कि वो कॉकटेल का आदी था. हालांकि अकबर ने तंबाकू पर रोक लगवाया क्योंकि उसे पता था कि इससे बहुत अधिक नुकसान होगा. जहांगीर ने भांग की बिक्री पर भी रोक लगाई थी, लेकिन शराब उसकी कमजोरी थी. विदेशी शराब, चाहे शिराजी हो या कैनरी, बहुत महंगी थी. पोर्ट के जरिए विदेशी शराब भारत आती थी, जिसमें छियालीस दिनों का समय लगता था. सरकारी पाबंदियों और ज्यादा कीमत की वजह से दिल्ली की दुकानों में इसकी खुली बिक्री पर रोक थी. लेकिन राजघरानों और अमीर लोगों की यह पहली पसंद थी. वे खुलेआम विदेशी वाइन और शराब पीते थे, लेकिन ज्यादा मात्रा में अराक पीना पसंद करते थे. इसे हर अमीर आदमी के घर में देसी अंगूर या बिना रिफाइंड चीनी से बनाया जाता था. यह ज़्यादा पॉपुलर था क्योंकि यह नशीला होता था. विलियम हॉकिन्स और सर थॉमस रो जो जहांगीर के काल में भारत आए थे, उन्होंने लिखा है कि क बार, जब जहांगीर काबुल में थे, तो उन्होंने चट्टान में दो गोल बेसिन बनवाए थे, जिनमें से हर एक में दो मन लिक्विड आ सकता था. उन्होंने उसमें शराब भरवाई और वहां मौजूद लोगों को इसे पीने का आदेश दिया.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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