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Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद हिंसा के शरणार्थियों ने झारखंड पहुंचकर सुनायी रूह कंपा देनेवाली आपबीती

Updated at : 14 Apr 2025 9:43 PM (IST)
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Murshidabad Violence refugee

आपबीती सुनाते मुर्शिदाबाद हिंसा के शरणार्थी

Murshidabad Violence: वक्फ कानून पर बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. मुर्शिदाबाद जिले से झारखंड के लोगों का पलायन जारी है. कई परिवार वहां से भागकर पाकुड़ और राजमहल के आसपास के इलाकों में शरण ले रहे हैं. सीमा पार कर झारखंड पहुंचे शरणार्थियों ने रूह कंपाने वाली हिंसा की कहानी सुनायी है. इन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है.

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Murshidabad Violence: राजमहल (साहिबगंज)/पाकुड़-पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के शमशेर गंज थाना क्षेत्र के जयदेव सरकार अपनी पत्नी पूजा सरकार एवं एक छोटे बच्चे के साथ किसी तरह जान बचाकर झारखंड के साहिबगंज जिले के राजमहल पहुंचे. जयदेव ने बताया कि वहां जान बचाने की चिंता सता रही थी. पश्चिम बंगाल में लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. शमशेर गंज थाना क्षेत्र के जाफराबाद गांव में हिंसा में मारे गए 72 वर्षीय हरि गोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास (44 वर्ष) के चचेरे भाई हृदय दास राजमहल पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि उपद्रवियों ने गांव में घुस कर घर जलाए, पानी में जहर मिलाया और महिलाओं से छेड़खानी की. लोगों को घर से भागने को विवश कर दिया. इस कारण राजमहल में परिवारजनों के साथ शरण लेनी पड़ी है.

चाचा और चचेरे भाई को उपद्रवियों ने मार डाला था-हृदय दास


हृदय दास ने कहा कि 11-12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद में हिंसक प्रदर्शन हुआ था. हजारों उपद्रवियों की भीड़ ने उनके चाचा और उनके चचेरे भाई को दुकान से खींच कर धारदार हथियार से मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद अपनी वृद्ध मां को एंबुलेंस में लिटाकर उसके ऊपर कपड़ा डालकर शव बता कर वहां से निकले. 13 लोग एक एंबुलेंस में सवार हुए और किसी प्रकार राजमहल तक का सफर तय किया. जो 13 लोग राजमहल पहुंचे हैं उनके हृदय दास, नीलिमा दास, मोटेरी बाला दास, बापी दास, सुचेरिता सरकार, रूपचंद सरकार, सुष्मिता सरकार, संचिता सरकार, संगीता सरकार, सुचित्रा सरकार, पार्थो माझी, रूद्र सरकार, आराध्या दास आदि शामिल हैं.

धुलियान में हालात बेहद खराब, ऐसा पहले नहीं देखा


सोमवार को धुलियान से कई परिवार पाकुड़ पहुंचे. कुछ परिवार यहां से अपने संबंधियों के घर रामपुरहाट और मालदा की ओर रवाना हो गये. पाकुड़ भाजपा के नेता सोहन मंडल के भी कई रिश्तेदार धुलियान से भागकर पाकुड़ पहुंचे हैं. उनके भाई मोहन मंडल अपने पूरे परिवार के साथ सुरक्षित पाकुड़ पहुंचे. सोहन मंडल ने बताया कि उनके भाई की धुलियान में करीब 70 साल पुरानी दुकान है. लेकिन जब विरोध-प्रदर्शन ने उग्र रूप लिया और दंगे भड़क उठे, तो उनकी दुकान को भी निशाना बनाया गया. सामने की दुकान में आग लगा दी गयी. सौभाग्य से पुलिस समय पर पहुंच गयी और उनकी दुकान जलने से बच गयी. मोहन मंडल ने बताया कि उन्होंने धुलियान में कभी इस तरह का भयावह मंजर नहीं देखा था. चारों तरफ दहशत का माहौल है. कई दुकानों को फूंक दिया गया, लूटपाट की गयी और घरों पर हमले हुए. गाड़ियों में तोड़फोड़ की गयी. पूरा इलाका मानो युद्धभूमि में तब्दील हो गया हो.

सीमावर्ती इलाकों ने पुलिस गश्ती बढ़ी


मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गयी है और हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. इस संबंध में पाकुड़ एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि सीमा पार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. पाकुड़ में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और हर इलाके की पल-पल की खबर ली जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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