विस्थापित 300 बच्चों का भविष्य अंधकारमय

अमड़ापाड़ा : बरमसिया गांव से विस्थापित बच्चों के भविष्य गढ़ने को लेकर पैनम कंपनी की ओर से स्थापित किये गये पचुवाड़ा कोल ब्लॉक विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू तो बहा ही रहा है, वहीं उपरोक्त विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे का भविष्य भी अंधकार हो गया है. सरकार जहां क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था […]
अमड़ापाड़ा : बरमसिया गांव से विस्थापित बच्चों के भविष्य गढ़ने को लेकर पैनम कंपनी की ओर से स्थापित किये गये पचुवाड़ा कोल ब्लॉक विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू तो बहा ही रहा है, वहीं उपरोक्त विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे का भविष्य भी अंधकार हो गया है. सरकार जहां क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं पैनम से विस्थापित लोगों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तो दूर प्राथमिक शिक्षा भी मयस्सर नहीं हो रही है.
मालूम हो कि वर्ष 2013 में तत्कालीन उपायुक्त सुनील कुमार सिंह के कार्यकाल में उक्त विद्यालय का शुभारंभ विस्थापितों के बच्चों को शिक्षा देने के लिए हुआ था. उक्त विद्यालय पंजाब इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड व बंगाल एंटा के जाइंट वेंचर पैनम के देख-रेख में संचालित था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्टा कोल ब्लॉक की एमडीओ रद्द होने के बाद से अगस्त 2015 से विद्यालय बंद हो चुका है. जिसके बाद उक्त विद्यालय को चालू कराये जाने को लेकर न तो पैनम के द्वारा ही कोई पहल की गयी
और न ही स्थानीय प्रशासन की नजर इस पर पड़ी. कोलनगरी कहे जाने वाले अमड़ापाडा में पैनम कंपनी की एक मात्र स्कूल का बंद रहना विस्थापितों को कोल कंपनी द्वारा सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंसबिलिटी) के तहत उपलब्ध करायी जाने वाली बिजली, पानी, चिकित्सा, शिक्षा, मजदूरी जैसी खोखले वादों की कहानी बयां कर रही है.
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