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बोकारो जमीन घोटाले में भी आरोपी अफसर की भूमिका

Updated at : 20 Nov 2024 12:26 AM (IST)
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कांके जमीन घोटाला मामले में 3.5 करोड़ रुपये कमीशन लेनेवाले पूर्व सीओ दिवाकर द्विवेदी ने बोकारो स्टील सिटी की जमीन की खरीद बिक्री में भी अहम भूमिका निभायी थी. वहीं, जमीन की गलत जमाबंदी खोलनेवाले चास के पूर्व सीओ निर्मल कुमार टोप्पो को भी बर्खास्त कर दिया गया है.

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शकील अख्तर (रांची). कांके जमीन घोटाला मामले में 3.5 करोड़ रुपये कमीशन लेनेवाले पूर्व सीओ दिवाकर द्विवेदी ने बोकारो स्टील सिटी की जमीन की खरीद बिक्री में भी अहम भूमिका निभायी थी. वहीं, जमीन की गलत जमाबंदी खोलनेवाले चास के पूर्व सीओ निर्मल कुमार टोप्पो को भी बर्खास्त कर दिया गया है. कांके अंचल में अपने पदस्थापन के दौरान कमलेश सिंह के लिए जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी करनेवाले सीओ दिवाकर द्विवेदी, बोकारो जिले के चास अंचल में पदस्थापित रहे हैं.

मार्च 2021 तक चास में सीओ के पद पर रहे

दिवाकर द्विवेदी चास में सीओ के पद पर 28 फरवरी 2019 से आठ मार्च 2021 तक पदस्थापित रहे हैं. उनके कार्यकाल में ही बोकारो स्टील सिटी की खाली पड़ी जमीन में से 74 एकड़ जमीन इजहार ने शैलेंद्र सिंह को 10.30 करोड़ रुपये में बेची थी. जमीन की रजिस्ट्री के लिए तत्कालीन सीओ दिवाकर द्विवेदी जारी एक प्रमाण पत्र जारी किया गया था. इस प्रमाण पत्र के बिना जमीन की खरीद बिक्री संभव नहीं थी. उनके द्वारा जारी प्रमाण पत्र में कहा गया था कि मौजा तेतुलिया के थाना नंबर 38, खाता नंबर 158, रकबा 77.92 एकड़ जमीन की जमाबंदी इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन के नाम पर कायम है. दिवाकर ने यह प्रमाण पत्र नौ फरवरी 2021 को जारी किया था. इस प्रमाण पत्र के आधार पर 10 फरवरी 2021 को जमीन की रजिस्ट्री शैलेंद्र सिंह के नाम पर हुई. जमीन की रजिस्ट्री से पहले वर्ष 2018 में ही राज्य सरकार ने चास अंचल के तत्कालीन सीओ निर्मल कुमार टोप्पो को तेतुलिया स्थित 103 एकड़ जमीन की गलत जमाबंदी खोलने के आरोप में बर्खास्त कर दिया था. जांच में पाया गया कि मौजा तेतुलिया के थाना नंबर 38 की जमीन सरकारी दस्तावेज के अनुसार गैरमजरुआ खास, किस्म जंगल झाड़ है. वर्ष 1958 में इस जमीन को प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट के रूप में अधिसूचित किया गया था. लेकिन श्री टोप्पो में जांच किये बिना ही वनभूमि का गलत ढंग से नामांतरण कर दिया. विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित होने के बाद अन्य सभी प्रक्रिया पूरा करने के बाद सरकार ने निर्मल टोप्पो को बर्खास्त करने का फैसला किया. साथ ही चार मई 2018 को बर्खास्तगी से संबंधित आदेश जारी किया.

वर्ष 1933 में पुरुलिया रजिस्ट्री कार्यालय से नीलामी में 138.42 एकड़ जमीन खरीदने का दावा

उल्लेखनीय है कि इजहार हुसैन ने अख्तर हुसैन की ओर से यह दावा किया था कि उसके पूर्वज समीर महतो ने वर्ष 1933 में पुरुलिया रजिस्ट्री कार्यालय से नीलामी में 138.42 एकड़ जमीन खरीदी थी. जमीन की इस खरीद के लिए पुरुलिया रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा सेल सर्टिफिकेट नंबर 191/1933 जारी किया था. मामले की जांच के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने इस सेल सर्टिफिकेट के अस्तित्व में होने की लिखित सूचना दी. इसके अलावा स्टील मंत्रालय ने भी सेल के चेयरमैन को पत्र लिख कर 1536.40 एकड़ वनभूमि मिलने और इसमें से 756.94 एकड़ जमीन का उपयोग नहीं होने की जानकारी दी थी. साथ ही खाली पड़ी जमीन की गलत ढंग से खरीद बिक्री होने की आशंका जतायी थी.

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