Ranchi News : ब्लैकबोर्ड से स्मार्ट बोर्ड, बदलती शिक्षा, बदलते शिक्षक

Updated at : 04 Sep 2025 9:40 PM (IST)
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Ranchi News : ब्लैकबोर्ड से स्मार्ट बोर्ड, बदलती शिक्षा, बदलते शिक्षक

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे विकास ने शिक्षा को भी नयी दिशा दी है.

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शिक्षक दिवस आज. पहले ग्लोब और चार्ट, अब ऑडियो-वीडियो और 3डी एनीमेशन

रांची. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे विकास ने शिक्षा को भी नयी दिशा दी है. चॉक और ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ सफर आज स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुका है. यह सिर्फ तकनीक का परिवर्तन नहीं है, बल्कि शिक्षा की दशा और दिशा में बड़ा बदलाव है. इस बदलाव ने शिक्षकों को भी बदला है. जो शिक्षक हमेशा दूसरों को पढ़ाते और सिखाते थे, उन्हें खुद सीखने और ट्रेनिंग लेने की जरूरत पड़ी. जो शिक्षक स्मार्टफोन से दूर थे, उन्होंने कोरोना काल में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाने के लिए खुद को अपग्रेड किया. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर क्लास ली, वीडियो और नोट्स तैयार किये और छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखा.

कोरोना काल में बदल गयी शिक्षा की तस्वीर

कोरोना महामारी शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई. स्कूल-कॉलेज बंद हो गये और पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन हो गयी. यह बदलाव अचानक था. न छात्र तैयार थे, न शिक्षक. लेकिन, ऐसे हालात में शिक्षकों ने मोर्चा संभाला. मोबाइल फोन, लैपटॉप और इंटरनेट ही नये क्लासरूम बन गये. गूगल मीट और जूम जैसे ऐप्स पर वर्चुअल लेक्चर शुरू हुए. जिन शिक्षकों ने कभी कंप्यूटर तक ठीक से इस्तेमाल नहीं किया था, वे भी स्क्रीन शेयर कर बच्चों को पढ़ाने लगे. यह बदलाव आसान नहीं था. लेकिन, शिक्षकों ने इसे स्वीकार किया. उन्होंने खुद को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया और बच्चों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया.

शिक्षक अब डिजिटल कंटेंट कर रहे तैयार

ब्लैक बोर्ड और डस्टर की जगह अब स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल पेन ने ले ली है. विजुअल और डिजिटल लर्निंग ने पढ़ाई को ज्यादा रोचक और इंटरेक्टिव बनाया है. प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग और एक्टिविटी ड्रिवेन क्लास ने छात्रों की रचनात्मकता और भागीदारी को बढ़ाया है. ऑनलाइन असाइनमेंट और क्विज का प्रचलन बढ़ रहा है. जरूरत के अनुसार हाइब्रिड क्लास भी लिए जा रहे हैं. शिक्षक सिर्फ किताब से पढ़ाने वाले नहीं रहे, बल्कि डिजिटल कंटेंट बनाने और बच्चों को समझाने वाले मल्टी-टास्किंग गाइड बन गये हैं.

नयी पीढ़ी के साथ नयी चुनौतियां

पहले के स्टूडेंट और आज के स्टूडेंट में काफी अंतर है. पहले इंफॉर्मेशन सीमित होता था. स्टूडेंट किताबों में ज्यादा समय बिताते थे, अब इंफॉर्मेशन असीमित हो गया है. चारों तरफ से इंफॉर्मेशन मिल रहे हैं. बच्चों को पहले से ही जानकारी होती है. ऐसे में उसे छात्र को सही जानकारी देना चुनौतीपूर्ण होता है. स्टूडेंट जो पहले सीख चुका है, उसको सही करने व सुधारने की चुनौती होती है. शिक्षकों को वर्तमान समय के अनुसार हर दिन खुद को अपडेट रखना पड़ता है. आजकल परीक्षा में भी योग्यता आधारित सवाल होते हैं. ऐसे में रट्टा कर नहीं पढ़ा सकते हैं. अब बेहतर समझ के साथ पढ़ने की जरूरत होती है. इंटरनेट पर उपलब्ध अपार जानकारी में से सही और गलत को अलग करना भी आसान नहीं होता है.

अचानक से नयी चीजों को सीखना चुनौतीपूर्ण रहा

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बरियातू के प्रिंसिपल दीपक कुमार ने बताया कि कोविड के बाद शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव आया है. शिक्षकों को भी नयी तकनीक के बारे में सीखना पड़ा. तब हम जेसीइआरटी में डेपुटेशन पर थे. इस दौरान हमने ई-कंटेंट बनाये, यूट्यूब वीडियो तैयार किये. सिलेबस, क्लास और विषय के अनुसार लींक सभी जिलों के स्कूलों में उपलब्ध करवाते थे. अचानक से नयी चीजों को सीखना चुनौती पूर्ण रहा. लेकिन, सभी शिक्षकों ने एक-दूसरे की मदद करते हुए नयी तकनीक को सीखे. अब पुराने शिक्षक भी वेबसाइट हैंडल कर लेते हैं. गूगल शीट से तैयार कर लेते हैं. ऑनलाइन क्लास लेते हैं. डिजिटल बोर्ड पर क्लास लेते हैं.

क्लासरूम के लिए चॉक, वॉक और टॉक जरूरी

केरली स्कूल के प्रिंसिपल राजेश पिल्लई ने बताया कि क्लासरूम टीचिंग के लिए चॉक, वॉक, टॉक बेहद ही महत्वपूर्ण है. इसमें बदलाव आया है चॉक की जगह डिजिटल पेन ने जगह ले ली है. वॉक, टॉक अभी भी उतना ही महत्वपूर्ण है. पहले जहां टीचर ग्लोब, चार्ट लेकर आते थे, अब ऑडियो वीडियो से समझते हैं. थ्रीडी एनीमेशन के माध्यम से समझाया जाता है. स्कूल में 35% टीचर 50 या उससे ज्यादा की उम्र के हैं. सभी ने खुद को अपग्रेड कर लिया है.

खुद सीखे दूसरे शिक्षकों को भी सिखाए

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बरियातू की शिक्षका डॉ श्वेता सिंह ने बताया कि कोविड से पहले टेक्नोलॉजी का ज्यादा अनुभव नहीं था. लेकिन, कोविड के बाद जरूरत के अनुसार खुद को अपग्रेड किये. खुद वीडियो बनाना सीखे, विभिन्न प्लेटफाॅर्म से ऑनलाइन क्लास लेना सीखे. पहले से इन चीजों को समझते थे, हमें बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. लेकिन, स्कूल में कई ऐसे शिक्षक थे जो स्मार्टफोन चलाना नहीं जानते थे. उन्हें इन चीजों के बारे में बताये. मैंने चॉक बोर्ड टू कीबोर्ड पर रिसर्च पेपर भी तैयार किया है. आज के समय में बच्चों को पढ़ाने के लिए हर दिन अपडेट होना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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