SIR पर रार : सिमडेगा में 78% बढ़े मुस्लिम वोटर, बाबूलाल ने पेश किये आंकड़े, कांग्रेस-झामुमो-राजद पर बरसे

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते बाबूलाल मरांडी.
SIR Protest Politics in Jharkhand: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष में रार ठन गयी है. भाजपा इसके समर्थन में खड़ी है, तो राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन झामुमो-कांग्रेस-राजद ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया है. विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया. बाबूलाल मरांडी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी भाजपा इसका विरोध करेगी. उन्होंने बताया कि कैसे साजिश के तहत झारखंड की डेमोग्राफी बदली जा रही है. बांग्लादेशी मुस्लिमों और रोहिंग्या को झारखंड में बसाया जा रहा है.
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SIR Protest Politics in Jharkhand: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि झारखंड सरकार ने एसआईआर का विरोध वोट बैंक की राजनीति के लिए किया है. झारखंड प्रदेश में जिस प्रकार से डेमोग्राफी बदली है या बदल रही है, इनका मकसद बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुसलमानों को वोट बैंक बनाये रखना है. प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए बाबूलाल रमांडी ने कहा कि झारखंड के लिए यह अलार्मिंग सिचुएशन है. इससे तो पूरा राज्य, देश प्रभावित होगा ही, लेकिन इससे सीधा और तत्काल कोई अगर प्रभावित होगा, तो वह है आदिवासी समाज.
आने वाले दिनों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी बनेंगे विधायक, सांसद – बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संताल परगना और झारखंड में दर्जनों आदिवासी महिलाएं हैं, जिससे इन रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमानों ने न केवल शादी की, बल्कि मुखिया, जिला परिषद भी बने हैं. यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में आदिवासी महिलाओं से शादी करके रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमान सांसद, विधायक भी बनेंगे. यह दृश्य साफ दिख रहा है.
1951 में 35.38 फीसदी थे आदिवासी, आज 26.20 प्रतिशत
उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में की पहली जनगणना में झारखंड में आदिवासियों की संख्या 35.38 प्रतिशत थी. मुस्लिम आबादी 8.9 प्रतिशत थी. वर्ष 2011 की जनगणना में आदिवासियों की संख्या 35.38 प्रतिशत से घटकर 26.20 प्रतिशत रह गयी. वहीं, मुसलमानों की जनसंख्या 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गयी. आदिवासियों की जनसंख्या में गिरावट आयी, जबकि मुसलमानों की आबादी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. ओवरऑल की बात करें, तो वर्ष 1951 में सनातनियों की आबादी 87.79 प्रतिशत थी. वर्ष 2011 में सनातनियों की संख्या घटकर 81.17 प्रतिशत रह गयी.
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‘झारखंड में घुसपैठियों के पक्षधर कांग्रेस, झामुमो, राजद’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह नेचुरल तरीके से नहीं हुआ. यह बदलाव कृत्रिम तरीके से हुआ है. बांग्लादेश से लगातार घुसपैठ होना इसका प्रमुख कारण है. कांग्रेस, झामुमो, राजद जैसे दल इसके पक्षधर हैं. ऐसे घुसपैठियों का वोटर कार्ड, राशन कार्ड बनाना, जन्म प्रमाण पत्र बनाना, उनकी जमीन उपलब्ध कराना, उनको बसाना इनकी मंशा है, ताकि वोट में इसका फायदा उठाया जा सके. विधानसभा में उनकी मंशा साफ दिखी.
- वोट बैंक की राजनीति के लिए एसआईआर का विरोध, कांग्रेस, झामुमो और राजद पर बरसे बाबूलाल मरांडी
- बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को केवल बसाना नहीं, बल्कि वोटर बनाना भी इन दलों का मकसद
- जनसंख्या और मतदाताओं की संख्या से जुड़े कई आंकड़े पेश कर भाजपा अध्यक्ष ने विपक्षी दलों को दिखाया आईना
5 साल में देश में 10.1 फीसदी बढ़े वोटर, झारखंड में 16.7 प्रतिशत
उन्होंने कहा कि अभी मतदाता सूची ज्वलंत मुद्दा है. उदाहरण देते हुए मरांडी ने कहा कि वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के बीच देश में मतदाताओं में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई. झारखंड में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वर्ष 2019 से वर्ष 2024 के बीच देश में मत प्रतिशत में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि झारखंड में यह वृद्धि 16.7% दर्ज की गयी. कहा कि 2019 से 2024 के बीच यहां किसकी सरकार रही, बताने की जरूरत नहीं है.

नेशनल ग्रोथ से ज्यादा वोटर बढ़वा चिंता का विषय – मरांडी
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच नेशनल ग्रोथ से भी ज्यादा वोट प्रतिशत झारखंड में बढ़ा. यह चिंता का विषय है कि इतनी रफ्तार से यहां की आबादी कैसे बढ़ी. यह भी गहन जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि चूंकि वर्ष 2014 से 2019 के बीच झारखंड में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार थी, इसलिए यहां पर अवैध घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं थी. वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसे लोगों को वोटर बनाकर बसाया जा रहा है. इसलिए हंगामा कर रहे हैं.
भाजपा ने पेश किया आरक्षित विधानसभा का आंकड़ा
बाबूलाल मरांडी ने कुछ आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों का आंकड़ा भी पेश किया. कहा कि सिमडेगा विधानसभा में 2019 में 2.21 लाख मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर 2.44 लाख हो गये. इसमें 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी. यहां पर 2019 में 9,308 मुस्लिम मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर 16,605 हो गये. यानी मुस्लिम मतदाताओं में 78.4 प्रतिशत की वृद्धि. वहीं, गैर-मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में 7.2 प्रतिशत ही वृद्धि हुई.
‘सुनियोजित प्लानिंग के तहत डेमोग्राफी बदली जा रही है’
झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ संताल परगना का मामला नहीं है. एक प्लानिंग के तहत सब कुछ हो रहा है. कोल्हान के जगन्नाथपुर विधानसभा में 2019 में 1.71 लाख वोटर थे. 2024 में 1.98 लाख वोटर हो गये. वृद्धि 15.7 प्रतिशत रही. मुस्लिम वोटर 52 फीसदी बढ़े, तो गैर मुस्लिम वोटर में 13 फीसदी की. ये कुछ उदाहरण हैं, जो दर्शाते हैं कि पूरे राज्य की डेमोग्राफी सुनियोजित तरीके से बदली जा रही है. इनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कराया जा रहा है. यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है.

घाटशिला में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बने
भाजपा नेता ने कहा कि चाकुलिया, घाटशिला जैसे क्षेत्रों में देखा गया है कि जहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं, वहां एक-एक गांव में सैकड़ों मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बनाये गये. बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने मंईयां सम्मान योजना का लाभ लिया. जांच हुई, तो कोई मुर्शिदाबाद तो कोई मालदा का रहने वाला पाया गया. इसी प्रकार चतरा के प्रतापपुर में कुछ पंचायत में इतने जन्म प्रमाण पत्र बनाये गये, जितनी वहां की शायद जनसंख्या भी नहीं है.
असेंबली में एसआईआर के प्रस्ताव का भाजपा करेगी विरोध
मरांडी ने कहा कि जब झारखंड सहित पूरे देश में डेमोग्राफी बदल रही है, चुनाव आयोग फर्जी और विदेशी मतदाताओं को हटाने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की बात करता है, तो उसे रोकने और फर्जी मतदाताओं को बचाने के लिए वोट बैंक की राजनीति हो रही है. विधानसभा में एसआईआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जा रहा है, भाजपा इसका विरोध करेगी.
SIR: एक-एक वास्तविक मतदाता का सत्यापन करे चुनाव आयोग
उन्होंने कहा, ‘हम चुनाव आयोग से मांग करेंगे कि एक-एक वास्तविक मतदाता का सत्यापन किया जाये. जो यहां के नागरिक हैं, वही सूची में रहें. फर्जी मतदाताओं को तत्काल सूची से हटाया जाये. झारखंड में अभी चुनाव नहीं है. भले एक साल लग जायें, एक-एक मतदाता को सत्यापित कराना भाजपा सुनिश्चित करेगी. तभी डेमोग्राफी ठीक होगी. इस दौरान प्रेसवार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता रामाकांत महतो भी मौजूद थे.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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