मानव को मर्यादित जीवन जीना सिखाता है श्रीरामचरितमानस
Updated at : 21 Apr 2024 10:22 PM (IST)
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Birsa Munda
श्रीरामचरितमानस एक दर्पण की तरह स्पष्टवादी ग्रंथ है. मानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है.
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पिपरवार
श्रीरामचरितमानस एक दर्पण की तरह स्पष्टवादी ग्रंथ है. मानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है. एक मानव का जीवन कैसे मर्यादित, पवित्र व श्रेष्ठ हो, यह बातें हमें मानस ग्रंथ से प्राप्त होता है. उक्त बातें कथाकार समीक्षा पांडेय ने शनिवार रात किरिगड़ा में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में प्रवचन के दौरान कही. उन्होंने कहा कि बाइबिल ईसाइयों को ईसाई बनाता है, कुरान मुस्लिमों को मुसलमान बनाता है. पर, श्रीरामचरितमानस हर ईसाई, हर मुसलमान व हर हिंदू को इंसान बनने की कला सिखाता है. कहा कि मानव जीवन में सत्संग की बहुत बड़ी महिमा है. क्योंकि संसार का संग भांग का नशा है. परंतु सत्संग तुलसी दल के समान है. कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जैसे भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए प्रभु श्रीराम के भजन की आवश्यकता होती है. जब बहुकाल करिय सतसंगा। तब होइहैं सब संसय भंगा।। इसलिए सत्संग को दुर्लभ बताया गया है. जब तक हम सत्संग से नहीं जुड़ेंगे तब तक हमारे जीवन का संशय समाप्त नहीं होगा. कहा कि कथा सुनना गोल्डेन चांस नहीं है, बल्कि डाइमंड चांस है. अत: प्रत्येक व्यक्ति को श्रीरामचरितमानस व प्रभु श्रीराम को अपने जीवन का आदर्श बनाना चाहिए.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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By Prabhat Khabar News Desk
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