रिम्स में ओपीडी पर्ची कटाना पड़ेगा महंगा, अब देने होंगे 10 रुपये

झारखंड का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स है.
RIMS OPD Charges: रांची स्थित रिम्स में ओपीडी इलाज अब महंगा होगा. शासी परिषद की बैठक में पर्ची शुल्क पांच से बढ़ाकर 10 रुपये करने का फैसला लिया गया है. साथ ही कैंपस थ्री निर्माण, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और जीडीएमओ नियुक्ति से जुड़े कई अहम निर्णय भी किए गए हैं. नीचे पूरी खबर पढ़ें.
RIMS OPD Charges: झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में इलाज कराना अब पहले से महंगा हो जाएगा. आने वाले दिनों में रिम्स के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में पर्ची कटाने की फीस पांच रुपये के बदले 10 रुपये देने होंगे. यह फैसला रिम्स शासी परिषद की 64वीं बैठक में लिया गया. अब मरीजों को डॉक्टर से परामर्श लेने से पहले 10 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा.
शासी परिषद की बैठक में 18 एजेंडों पर चर्चा
रिम्स शासी परिषद की 64वीं बैठक में कुल 18 एजेंडों पर विचार-विमर्श किया गया. बैठक में ओपीडी शुल्क को बढ़ाकर 20 रुपये करने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन सदस्यों के विरोध के बाद सदर अस्पताल रांची की तर्ज पर इसे 10 रुपये तक सीमित रखने पर सहमति बनी. बैठक में रिम्स के आधारभूत ढांचे के विस्तार और प्रशासनिक फैसलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
कैंपस थ्री के निर्माण पर मुहर
बैठक में रिम्स कैंपस थ्री (डीआईजी ग्राउंड) के निर्माण को लेकर भी सहमति बनी. यहां ओपीडी और आईपीडी (वार्ड) कॉम्प्लेक्स के साथ-साथ 50 बेड का सुपर स्पेशियलिटी यूनिट बनाया जाएगा. यह रिम्स के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए यह परियोजना अहम होगी.
पुरानी बिल्डिंग तोड़कर बनेगा नया आधुनिक भवन
रिम्स की करीब 60 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर नया भवन बनाने का भी निर्णय लिया गया है. नया भवन पूरी तरह तैयार होने के बाद ओपीडी और आईपीडी सेवाओं को यहां शिफ्ट किया जाएगा. इसके बाद कैंपस थ्री को 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल घोषित करने की योजना है. इससे न सिर्फ मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि रिम्स की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा.
63वीं बैठक के फैसलों पर भी लगी मुहर
शासी परिषद की 63वीं बैठक में लिए गए कई फैसलों पर अब अंतिम रूप से मुहर लगा दी गई है, क्योंकि वे अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाए थे. हालांकि नगर निकाय चुनाव के चलते बैठक तो हुई, लेकिन जीबी अध्यक्ष सह स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी और रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार ने फैसलों की विस्तृत जानकारी मीडिया को नहीं दी.
बैठक में ये रहे प्रमुख चेहरे
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी, कांके विधायक सुरेश बैठा, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, वित्त विभाग के निदेशक, रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार और पर्यवेक्षक के तौर पर झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अमरेश्वर सहाय मौजूद थे.
जीडीएमओ की नियुक्ति पर सहमति
बैठक में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (जीडीएमओ) की नियुक्ति को लेकर भी अहम फैसला लिया गया. तय हुआ कि सरकारी अस्पतालों में तैनात जीडीएमओ को मिलने वाली सैलरी के बराबर वेतन पर ही नियुक्ति की जाएगी. पदोन्नति को लेकर पहले पांच साल का प्रस्ताव था, लेकिन विचार-विमर्श के बाद छह साल में पदोन्नति पर सहमति बनी.
रोगी कल्याण और सुविधाओं पर जोर
शासी परिषद ने अस्पताल की रोगी कल्याण मद में आय बढ़ाने, साफ-सफाई व्यवस्था सुधारने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुविधाओं के बेहतर रखरखाव पर भी निर्णय लिया. अधिकारियों का मानना है कि इससे मरीजों को बेहतर माहौल और सुविधाएं मिल सकेंगी.
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रिम्स में मरीजों का बढ़ता दबाव
रिम्स में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1,900 से 2,200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. आईपीडी में 250 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं, जबकि इमरजेंसी में रोजाना 280 से 350 मरीजों को भर्ती किया जाता है. ऐसे में ओपीडी शुल्क में बढ़ोतरी आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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