रांची में बन रही मेगा लाइब्रेरी में पढ़ें 5000 बच्चे, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने किया निरीक्षण

Updated at : 29 Mar 2026 3:31 PM (IST)
विज्ञापन
Modern Mega Library

रांची के मोराबादी में निर्माणाधीन लाइब्रेरी का निरीक्षण करते राज्यपाल संतोष गंगवार और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ. फोटो: प्रभात खबर

Modern Mega Library: रांची के मोराबादी में 65 करोड़ की लागत से बन रही आधुनिक लाइब्रेरी शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगी. इसमें 5000 छात्रों के बैठने की क्षमता है. सीनियर सिटीजन्स के लिए अलग व्यवस्था और परमवीर चक्र विजेताओं की गैलरी इसकी खासियत है. जून-जुलाई तक उद्घाटन की संभावना है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

विज्ञापन

रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट

Modern Mega Library: झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल तेजी से आकार ले रही है. यहां पर करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से मेगा अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाई जा रही है. यह लाइब्रेरी सूबे के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आ रही है. रविवार को झारंखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसका निरीक्षण कर कार्य की प्रगति का जायजा लिया.

कैपेटेरिया में रिफ्रेशमेंट की सुविधा

यह लाइब्रेरी अपने आप में बेहद खास होगी, जहां एक साथ करीब 5,000 छात्र बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे. हर फ्लोर पर मॉडर्न रीडिंग रूम बनाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को बेहतर और शांत वातावरण मिल सके. इसके साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर कैफेटेरिया की सुविधा भी विकसित की जा रही है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के बीच आराम और रिफ्रेशमेंट मिल सके.

सीनियर सिटीजन्स के लिए विशेष व्यवस्था

इस लाइब्रेरी की खास बात यह होगी कि इसमें हर आयु वर्ग के लोगों को सुविधा मिलेगी. पहली मंजिल पर सीनियर सिटीजन्स के लिए अलग व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य यह है कि बुजुर्ग भी यहां आकर पढ़ें और समय बिताएं.

परमवीर चक्र विजेताओं को मिलेगा सम्मान

इस लाइब्रेरी को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र भी बनाया जा रहा है. प्रस्ताव रखा गया है कि यहां परमवीर चक्र से सम्मानित 21 वीर सपूतों के चित्र लगाए जाएं. राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि पूरी पहली मंजिल को इन वीरों को समर्पित किया जाए, जहां उनके शौर्य और बलिदान की कहानियां भी प्रदर्शित होंगी.

जून तक पूरा होने की उम्मीद

निर्माण कार्य तेजी से जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह लाइब्रेरी जून तक बनकर तैयार हो जाएगी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जून या जुलाई में इसका उद्घाटन कर दिया जाए, ताकि छात्र जल्द से जल्द इसका लाभ उठा सकें.

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलेगा लाभ

इस लाइब्रेरी को एक ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे छात्रों तक महंगी किताबें और संसाधन पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी के कारण उन्हें खरीद नहीं पाते. इससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर को बढ़ावा मिलेगा.

कोल इंडिया और सीसीएल का अहम योगदान

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड (सीसीएल) का बड़ा योगदान रहा है. इनके सहयोग से यह लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रही है.

इसे भी पढ़ें: सरायकेला के भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह को पार्टी में मिली बड़ी जिम्मेवारी, तीसरी बार प्रदेश मंत्री बने

शिक्षा का नया केंद्र बनेगा मोराबादी

रांची के बीचों-बीच, कई विश्वविद्यालयों के पास स्थित यह लाइब्रेरी आने वाले समय में पूरे झारखंड के छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा केंद्र बन सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल सिर्फ एक इमारत तक सीमित रहती है या राज्य के भविष्य को नई दिशा देने वाला ज्ञान का सबसे बड़ा हब बनती है.

इसे भी पढ़ें: हजारीबाग में शिक्षकों ने लगाई दौड़, बनाई पेंटिंग और फिर निबंध भी लिखा, मिला पुरस्कार

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola