Prabhat Khabar Special: संथाल परगना के पानी में घुला आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन, झारखंड सरकार की रिपोर्ट

Prabhat Khabar Special: दुमका जिले की 53 बस्तियों में पानी में आयरन की मात्रा अधिक हो गयी है, जबकि पाकुड़ की 5, जामताड़ा की 4 और साहिबगंज की 3 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो गयी है. साहिबगंज के राजमहल प्रखंड में पानी में आर्सेनिक की पुष्टि हुई है.
Prabhat Khabar Special: संथाल परगना के भू-जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक है, जो इंसान की सेहत के लिए खतरनाक है. इनकी वजह से लोगों को कई तरह की घातक बीमारियां हो सकती हैं. झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की एक रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि संथाल परगना में कम से कम 65 गांवों/टोलों/बस्तियों में लोग प्रदूषित पानी पी रहे हैं.
झारखंड सरकार ने बताया है कि पिछले दिनों 2.19 लाख से अधिक पानी के सैंपल की जांच के बाद मालूम हुआ कि झारखंड की 106 बस्तियों के भू-जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड या आयरन की मात्रा अधिक पायी गयी है. दुमका जिले की 53 बस्तियों में पानी में आयरन की मात्रा अधिक हो गयी है, जबकि पाकुड़ की 5, जामताड़ा की 4 और साहिबगंज की 3 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो गयी है. साहिबगंज के राजमहल प्रखंड में पानी में आर्सेनिक की पुष्टि हुई है.
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दुमका जिला के 5 प्रखंडों (दुमका, जामा, जरमुंडी, मसलिया और सरैयाहाट) की 27 बस्तियों का पानी ‘जहरीला’ हो चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुमका की एक पंचायत, जामा की 4 पंचायतों, जरमुंडी की 3 पंचायतों, मसलिया की 7 पंचायतों और सरैयाहाट की सबसे ज्यादा 12 पंचायतों के पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा पायी गयी है.
दुमका प्रखंड की भुरकुंडा पंचायत अंतर्गत भुरकुंडा गांव के कुम्हार टोला के पानी में आयरन की मात्रा अधिक पायी गयी है. इसी तरह जामा प्रखंड की 4 पंचायतों चिगलपहाड़ी, चिकनिया, खटंगी, सरसाबाद के भू-जल में लौह तत्व की मात्रा ज्यादा है. चिगलपहाड़ी पंचायत के घोघरा, नोनी और पलासबनी गांवों के पानी में आयरन घुला हुआ है. घोघरा की नीचे टोला बस्ती, नोनी की मध्य टोला और रानीगर टोला, पलासबनी की मुख्य टोला और पलासबनी के पानी में लोहा हानिकारक स्तर तक पहुंच चुका है. चिकनिया पंचायत के खिलकिनारी गांव के हरिजन टोला में भी पानी में लोहा अधिक मिला है.
खटंगी पंचायत में बिचकोरा, चोरकटा, चोरकटा कीता, हेटबहियार और पहाड़ीडीह गांव के पानी में आयरन की मात्रा सामान्य से ज्यादा पायी गयी है. बिचकोरा गांव के संथाल टोला में, चोरकटा के संथाल टोला में, चोरकटा कीता के चोरकटा कीता में, हेटबहियार के पहाड़ी टोला में और पहाड़ीडीह गांव के ऊपर टोला में भी यह समस्या पायी गयी है.
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सरसाबाद पंचायत में मुन्नाला और मुरमाला दो ऐसे गांव हैं, जहां के पानी में आयरन की मात्रा अधिक पायी गयी है. मुनमाला की मुंडमाला संथाल टोला बस्ती में जबकि मुरमाला की संथाल टोला बस्ती में ऐसी स्थिति देखी गयी है.
जरमुंडी प्रखंड की दो पंचायतों में पानी में आयरन की मात्रा मान्य स्तर से ज्यादा है. चोरखेदा पंचायत के चोरखेदा गांव स्थित चोरखेदा बस्ती और पुतली डाबर पंचायत के मंडलडीह गांव में स्थित संथाल टोला के पानी में आयरन की मात्रा अब नुकसान पहुंचाने की स्थिति में आ गयी है.
मसलिया प्रखंड की 7 पंचायतों के पानी में सामान्य से ज्यादा मात्रा में आयरन घुल चुका है. जिन पंचायतों में यह स्थिति है, उनमें आमगाछी, डलाही, गोलबांधा, गुमरो, हारोरायडीह, मसानजोर और रंगा शामिल हैं. आमगाछी पंचायत के आमगाछी गांव के डहरलंगी बस्ती, डलाही पंचायत के चुहादाहा गांव के चितन टोला, गोलबांधा पंचायत के धुनाबासा गांव की धुना बासा और राना पाड़ा बस्ती, गुमरो पंचायत के पडरिया गांव स्थित बंगाली टोला, हारोरायडीह पंचायत स्थित पलासी गांव के जिलिंग टोला, मारीडीह टोला और पलासी बस्ती के पानी में आयरन खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है. इसी पंचायत के तालडांगल गांव के संथाली टोला में भी स्थिति ऐसी ही हो गयी है.
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मसानजोर पंचायत के सिंगटूटा गांव के हरिजन टोला, संथाल टोला, सिंगटूटा बस्ती के साथ-साथ रांगा पंचायत के झिलुवा गांव स्थित बंगाली पाड़ा में आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक मात्रा में घुल चुका है, जो लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.
सरैयाहाट प्रखंड की सबसे ज्यादा 12 पंचायतों बाभनखाता, बनियारा, धौनी, गाड़ीझोपा, हंसडीहा, केंदुआ, कुशियारी, लकरबांक, मंडलडीह, माथाकेशो, नावाडीह और रक्सा में भू-जल में आयरन की मात्रा अधिक पायी गयी है. बाभनखाता पंचायत के खुरवा गांव की कुरवा बस्ती, बनियारा पंचायत के बरियारा गांव स्थित तेली टोला, धौनी पंचायत के धौनी गांव स्थित मंडल टोला, गाड़ीझोपा पंचायत स्थित कुसबेदिया गांव की कुसबेदिया बस्ती, हंसाडीह पंचायत में हंसाडीह गांव के हटिया टोला, हंसडीहा पंचायत के पारखेता गांव, केंदुआ पंचायत के खुटाहारी गांव के ऊपर टोला, कुशियारी पंचायत के बशेरवा उर्फ ढोबा गांव के बसबेरवा में पानी में आयरन अधिक है.
लकरबांक पंचायत के जमजोरी गांव, लकरबांक गांव के खेतौरी टोला, लकरबांक, सेमरा घाघरबाड़ी गांव के सिमरघाघर में जो पानी जमीन से निकालते हैं, उसमें आयरन की मात्रा सामान्य मात्रा से ज्यादा है. इसी तरह मंडलडीह पंचायत के चिलरा गांव के प्रधान टोला, मंडलडीह गांव, मटिहारा गांव के नीचे टोला, तेतरिया गांव, माथाकेशो गांव के हरिजनटोला, मंडल नीचे टोला और मंडलकेशो एवं तेतरिया गांव में पानी में लौह तत्व की मात्रा अधिक है.
नावाडीह पंचायत के टिटमो गांव के मध्य टोला, रक्सा पंचायत के धावाटांड़ गांव के धावाटांड़ और रक्शा गांव के मंडल टोला में आयरन की मात्रा पायी गयी है.
जामताड़ा जिला के फतेहपुर प्रखंड की धसनिया पंचायत के दो गांवों की 4 बस्तियों के भू-जल में फ्लोराइड की मात्रा जरूरत से ज्यादा है. धसनिया पंचायत में धातुला गांव की धातुला और नया पाड़ा बस्ती में और रूपडीह गांव के महतो टोला 2 और नया टोला में पानी विषाक्त हो गया है.
संथाल परगना के ही पाकुड़ जिला में 3 प्रखंडों की 4 पंचायतों में स्थित 4 गांवों की 5 बस्तियों में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक पायी गयी है. जिन प्रखंडों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पायी गयी है, उनमें लिट्टीपाड़ा, महेशपुर और पाकुड़िया शामिल हैं. लिट्टीपाड़ा प्रखंड की बड़ा घघारी पंचायत के धरमपुर गांव की धरमपुर बस्ती में पानी में फ्लोराइड घुल चुका है.
महेशपुर प्रखंड की दो पंचायतों छाकुधारा और दमदमा के छाकुधारा और एठा पाड़ा गांव की क्रमश: सड़क टोला और एठा पाड़ा के पानी में भी यह विषाक्त तत्व ज्यादा मात्रा में पाया गया है. पाकुड़िया प्रखंड की बनियापासर पंचायत के सिंहलिबोना गांव के पहाड़िया टोला और सिंहलिबोना बस्ती का पानी पीना सेहत के लिए हानिकारक हो गया है.
साहिबगंज में 2 प्रखंडों (बरहेट और राजमहल) की दो पंचायतों (बर बांध और महासिंहपुर) के दो गांवों इलाकी और महासिंहपुर में पानी दूषित पाया गया है. बरहेट प्रखंड के इलाकी गांव के जेनुम टोला और रजवार टोला में फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है, तो राजमहल प्रखंड के महासिंहपुर गांव के बुधन टोला में आर्सेनिक की मात्रा पायी गयी है.
उल्लेखनीय है कि रांची की दो बस्तियों के पानी में आयरन की मात्रा अधिक है, तो हजारीबाग की 23 बस्तियों में फ्लोराइड और दो बस्तियों में आयरन की मात्रा अधिक पायी गयी है. चतरा की 14 बस्तियों में फ्लोराइड सामान्य से अधिक मात्रा में मौजूद है.
फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से फ्लोरोसिस नाम की बीमारी होती है, जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर होकर टूट जाती हैं. लोगों के हाथ-पैर टेढ़े हो जाते हैं. बच्चों के दांत पीले हो जाते हैं. कहा जाता है कि इसकी वजह से कैंसर और गुर्दे की बीमारी के अलावा बांझपन जैसी समस्या भी बढ़ जाती है. पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक विदेशों में मान्य है, जबकि भारत में यह मात्रा 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है.
पानी में अगर आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है, तो उसकी वजह से लोगों को पेट संबंधी बीमारियां होने लगती हैं. खाना ठीक से नहीं पकता. अधपका भोजन ठीक से हजम नहीं होता और पेट दर्द एवं दस्त की समस्या बढ़ जाती है. लगातार पानी पीने से किडनी में परत जमती जाती है और बाद में यह पथरी का रूप ले लेता है.
पानी में सामान्य से अधिक आर्सेनिक घुल जाये और लोग उसका सेवन करें, तो इससे हड्डी व चमड़े की बीमारियां होती हैं. मोटापा बढ़ जाता है. हथेलियों और तलवों पर घाव निकल आते हैं. आर्सेनिक की वजह से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है. आंशिक पक्षाघात की आशंका बढ़ जाती है. अंधापन, ऐंठन आदि की भी समस्या बढ़ जाती है.
इनर वॉयस फाउंडेशन (आईवीएफ) का दावा है कि 30 वर्षों में भारत में आर्सेनिकयुक्त पानी पीने की वजह से 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गयी है. भारत में 5 करोड़ लोग आर्सेनिक के प्रभाव में हैं. त्वचा रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि आर्सेनिक की अधिकता से गर्भपात, स्टिलबर्थ, प्रीटर्म बर्थ हो सकता है. जन्म के समय बच्चे का वजन कम रह जाता है. नवजात की मृत्यु का जोखिम 6 गुना तक बढ़ जाता है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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