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Jharkhand News: चतरा के 8 प्रखंड की 12 पंचायतों की 14 बस्तियों में लोग पी रहे फ्लोराइडयुक्त पानी

Updated at : 21 Sep 2022 6:16 PM (IST)
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Jharkhand News: चतरा के 8 प्रखंड की 12 पंचायतों की 14 बस्तियों में लोग पी रहे फ्लोराइडयुक्त पानी

Jharkhand News: चतरा प्रखंड की तीन पंचायतों आरा, देवरिया, टिकर में पानी फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है. आरा पंचायत के आरा गांव की निचली आरा बस्ती, देवरिया पंचायत के देवरिया गांव की देवरिया बस्ती, टिक्कर पंचायत के टिकर गांव की कासियाडीह बस्ती में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पायी गयी है.

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Jharkhand News: बिहार से सटे झारखंड के चतरा जिला में लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं. जिला के 8 प्रखंड की 12 पंचायतों की कम से कम 14 बस्तियों में लोगों के फ्लोरोसिस से ग्रस्त होने की आशंका बढ़ गयी है. झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से 2.19 लाख से अधिक पानी के सैंपल की जांच करायी गयी है, जिसमें पता चला है कि चतरा जिले की 14 बस्तियों के भू-जल में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक है.

इन पंचायतों का पानी हो चुका है दूषित

चतरा प्रखंड की 3 पंचायतों (आरा, देवरिया और टिकर) की 3 बस्तियों, हंटरगंज प्रखंड में बालुरी पंचायत के बालुरी गांव की 2 बस्तियों, इटखोरी प्रखंड की धुना पंचायत की एक बस्ती, लावालौंग प्रखंड की कोलकोले पंचायत की एक बस्ती, मयूरहंड प्रखंड की हुसिया पंचायत की एक बस्ती, प्रतापपुर प्रखंड की चदरीगोविंदपुर पंचायत की एक बस्ती, सिमरिया प्रखंड की चौपे पंचायत की एक बस्ती, टंडवा प्रखंड की दो पंचायतों बाचारा-1 (उत्तर) और बहेरा की 4 बस्तियों में भू-जल दूषित हो चुका है.

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फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक

चतरा प्रखंड की तीन पंचायतों आरा, देवरिया, टिकर में पानी फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है. आरा पंचायत के आरा गांव की निचली आरा बस्ती, देवरिया पंचायत के देवरिया गांव की देवरिया बस्ती, टिक्कर पंचायत के टिकर गांव की कासियाडीह बस्ती में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पायी गयी है. हंटरगंज प्रखंड के बालुरी पंचायत के बालुरी गांव में नीमटांड़ रविदास टोला और सोझघटिया कहार टोला में पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक है.

इन बस्तियों का पानी पीने लायक नहीं

इटखोरी प्रखंड की धुना पंचायत के रक्सी गांव की रक्सी बस्ती में भी पानी पीने योग्य नहीं रह गया है. चतरा जिला के ही लावालौंग प्रखंड स्थित कोलकोले पंचायत में कोलकोले कलां गांव की कोलकोले कलां बस्ती में पानी में फ्लोराइड सामान्य से अधिक मात्रा में मिला है. मयूरहंड प्रखंड अंतर्गत हुसिया पंचायत के केंदुवा बामनडीह गांव की दानापुर बस्ती में पानी प्रदूषित हो चुका है. प्रतापपुर प्रखंड की चदरीगोविंदपुर पंचायत के दौनापुर गांव की दौनापुर बस्ती का भी पानी पीने लायक नहीं रहा.

दूषित हो चुका है सिमरिया प्रखंड के इन गांवों का पानी

सिमरिया प्रखंड की चौपे पंचायत में स्थित बरगांव गांव की टिलारा बस्ती में भी पानी दूषित हो चुका है. टंडवा प्रखंड अंतर्गत बचारा-1 (उत्तर) और बहेरा पंचायतों का पानी दूषित हो चुका है. इनमें बचारा -1 (उत्तर) पंचायत के बचारा (पूर्व) गांव के बचारा और बाजार टांड़ का पानी पीने लायक नहीं रहा. बचारा (पूर्व) गांव के सीसीएल बस्ती में भी पानी में फ्लोराइड घुल चुका है. बहेरा पंचायत में स्थित कारो गांव के हरिजन टोला का पानी भी दूषित हो चुका है.

फ्लोराइड से होती हैं कई बीमारियां

फ्लोराइड की वजह से गर्दन, पीठ, कंधे व घुटनों में दर्द रहता है. जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है. कैंसर के साथ-साथ गुर्दे की बीमारी और बांझपन जैसी समस्या बढ़ जाती है. स्मरण शक्ति कमजोर हो जाता है. विकसित देशों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक मान्य है, जबकि भारत में यह 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है.

फ्लोराइड का दंश झेल रहा है गढ़वा का प्रतापपुर गांव

पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा का दंश गढ़वा का प्रतापपुर गांव झेल रहा है. यहां कई लोग बिस्तर पर पड़े हैं और अपनी मौत का इंतजार कर रहे हैं. ये चलने-फिरने में अक्षम हैं. इनके हाथ-पैर टेढ़े हो गये हैं. लोगों की हड्डियां कमजोर हो गयीं हैं. हड्डियां टूट रही हैं. बच्चों के दांत पीले हो गये हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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