एक यूनिट ब्लड से बच सकती हैं तीन जिंदगियां

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14th june world blood donor day concept poster

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आज विश्व रक्तदाता दिवस है. वर्ष 1868 में आज ही के दिन यानी 14 जून को कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म हुआ था. जिन्होंने इंसानों में अलग-अलग ब्लड ग्रुप का पता लगाया.

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विश्व रक्तदाता दिवस

रांची. आज विश्व रक्तदाता दिवस है. वर्ष 1868 में आज ही के दिन यानी 14 जून को कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म हुआ था. कार्ल, जिन्होंने इंसानों में अलग-अलग ब्लड ग्रुप का पता लगाया. इसी खोज के बाद ही एक इंसान से दूसरे इंसान में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (शरीर में रक्त चढ़ाना) मुमकिन हो सका. कार्ल का यह प्रयास जिंदगियां बचा रहा है. बावजूद इसके ब्लड डोनेशन को लेकर लोगों के मन में कई गलतफहमियां हैं. जैसे : खून देने से कमजोरी आती है. खून से शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है. बार-बार बीमार होते हैं. हमें को यह समझना होगा कि हमारी रगों में बह रहे खून (रक्त) को कृत्रिम रूप से तैयार नहीं किया जा सकता है. स्वैच्छिक रक्तदान से ही खून की कमी को दूर किया जा सकता है. झारखंड में भी खून दान करने के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. क्योंकि एक यूनिट ब्लड से तीन जिंदगियां बचायी जा सकती है.

लक्ष्य के करीब झारखंड, लेकिन स्वैच्छिक रक्तदान कम

झारखंड में आबादी के मुताबिक सालाना 3,50,000 से 3,60,000 यूनिट खून की आवश्यकता होती है. हालांकि पिछले दो वर्षों से झारखंड इस लक्ष्य के करीब पहुंचता जा रहा है, लेकिन चिंता की बात यह है कि स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या में वृद्धि नहीं हो पा रही है. यह लक्ष्य हम रिप्लेसमेंट से मिलने वाले रक्त से प्राप्त कर रहे है. ऐसे में मरीजों को अक्सर रक्त की समस्या से जूझना पड़ता है. परिजनों को दर-दर भटकना भी पड़ता है. झारखंड में ्रअप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 3,50,698 यूनिट खून संग्रहित किया गया है, जिसमें स्वैच्छिक रक्तदान 1,24,726 यूनिट हुआ है.

झारखंड में 50 और रांची में ब्लड सेंटर

झारखंड में 50 ब्लड सेंटर हैं, जिसमें 20 सेंटर रांची में हैं. जानकारों के अनुसार रांची के 20 सेंटर पर ही खून की उपलब्धता का संकट रहता है. ब्लड नहीं मिलने की वजह से कई बार लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है. रिम्स और सदर अस्पताल ब्लड बैंक पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है. सदर अस्पताल ब्लड बैंक में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून मुहैया कराने की चुनौती रहती है. वहीं, रिम्स ब्लड बैंक में सिकल सेल एनीमिया, गरीब और रक्तदाता उपलब्ध नहीं होने वाले मरीजों का मुफ्त रक्त देने का दबाव रहता है.

रक्तदाता कार्ड नहीं मिलने से उत्साह में कमी

स्वैच्छिक रक्तदान में कमी होने की मूल वजह रक्त दान करने के बाद रक्तदाता कार्ड (डोनर कार्ड) नहीं मिलना है. रक्तदाताओं का कहना है कि रक्तदान के बाद जब उनको जरूरत होती है, तो ब्लड नहीं मिल पाता है. डोनर कार्ड होने से एक वर्ष के भीतर खून मिल जाता था. वहीं, जेसेक्स की दलील यह है कि डोनर कार्ड का दुरुपयोग होने लगा था. लोगों ने डोनर कार्ड बेचना शुरू कर दिया था, जिस कारण इसे बंद कर दिया गया.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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