लोहरदगा में हार-जीत के अंतर से अधिक था नोटा का विकल्प

Updated at : 06 Apr 2024 12:27 AM (IST)
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लोहरदगा में हार-जीत के अंतर से अधिक था नोटा का विकल्प

लोहरदगा लोकसभा सीट पर पिछले दो चुनाव में जितने वोट से हार-जीत का फैसला हो रहा, उससे अधिक लोग किसी प्रत्याशी को वोट नहीं दे रहे हैं. लोगों ने किसी प्रत्याशी को वोट देने के बजाय नोटा का विकल्प चुना है.

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रांची. लोहरदगा लोकसभा सीट पर पिछले दो चुनाव में जितने वोट से हार-जीत का फैसला हो रहा, उससे अधिक लोग किसी प्रत्याशी को वोट नहीं दे रहे हैं. लोगों ने किसी प्रत्याशी को वोट देने के बजाय नोटा का विकल्प चुना है. इस सीट पर पिछले तीन चुनाव से भाजपा जीत दर्ज कर रही है. तीनों चुनाव में हार-जीत का फैसला लगभग एक फीसदी वोट के अंतर से हो रहा है. इस वर्ष भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है. वर्तमान सांसद सुदर्शन भगत की जगह राज्यसभा सांसद समीर उरांव को अपना प्रत्याशी बनाया है. जबकि इंडिया गठबंधन के तहत सीट कांग्रेस के हिस्से में गयी है. कांग्रेस ने एक बार फिर से यहां सुखदेव भगत को अपना प्रत्याशी बनाया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सुखदेव भगत 10357 वोट से चुनाव हार गये थे, जबकि 10770 लोगों ने नोटा का विकल्प चुना था. वर्ष 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर उरांव भाजपा के सुदर्शन भगत से 6489 वोट से चुनाव हार गये थे. जबकि नोटा का विकल्प चुनने वाले लोगों की संख्या 16764 थी. वर्ष 2009 से वर्ष 2019 तक के चुनाव में हार-जीत का फैसला लगभग एक फीसदी वोट से हुआ है. वर्ष 2019 में भाजपा को 45.41 फीसदी व कांग्रेस को 44.14 फीसदी, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 34.78 फीसदी व कांग्रेस को 33.79 फीसदी वोट मिले थे. वर्ष 2009 में भाजपा को 27.69 फीसदी व निर्दलीय चुनाव लड़े चमरा लिंडा को 26.10 फीसदी वोट मिला था. वर्ष 2009 में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. कांग्रेस को 24.81 फीसदी वोट मिले थे. वर्ष 2009 में भी सुदर्शन भगत ने जीत दर्ज की थी.

चमरा लिंडा को मिला था एक लाख से अधिक वोट

लोहरदगा सीट पर हार-जीत तय करने में त्रिकोणीय मुकाबला एक प्रमुख फैक्टर रहा है. वर्ष 2009 व 2014 में विधायक चमरा लिंडा को एक लाख से अधिक वोट मिला था. चमरा लिंडा वर्तमान में विशुनपुर विधानसभा सीट से झामुमो के विधायक है. वर्ष 2014 में चमरा लिंडा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे थे. वर्ष 2014 में उन्हें 1,18,355 वोट मिले थे, जबकि वर्ष 2009 में 1,36,345 वोट मिले थे. वर्ष 2009 में चमरा लिंडा निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे.

वर्ष 2019 में देवकुमार धान तीसरे स्थान पर

वर्ष 2019 में चमरा लिंडा चुनाव नहीं लड़े, इसका असर भाजपा व कांग्रेस के वोट पर भी देखने को मिला. वर्ष 2014 की वोट की तुलना में भाजपा व कांग्रेस दोनों के वोट में लगभग 10-10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई. वर्ष 2019 में देवकुमार धान तीसरे स्थान पर रहे, हालांकि उन्हें वोट 2.39 फीसदी वोट से मिले. देवकुमार धान को कुल 19546 वोट मिले थे. निर्दलीय चुनाव लड़ रहे संजय उरांव को 10663 वोट मिले थे.

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