Ranchi News : स्वास्थ्य का बजट बढ़ाना जरूरी, तभी गांवों को मिलेगा लाभ
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Feb 2025 12:17 AM
नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) यानी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट, कैंसर और सांस की बीमारी बढ़ रही है. ऐसे में इसकी रोकथाम बहुत जरूरी है.
रांची (मुख्य संवाददाता). नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) यानी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट, कैंसर और सांस की बीमारी बढ़ रही है. ऐसे में इसकी रोकथाम बहुत जरूरी है. चिंता इस बात की है, क्योंकि ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे है. ऐसे में स्वास्थ्य बजट को बढ़ाने बेहद जरूरी है, जिससे स्क्रीनिंग बढ़े और समय से पूर्व इसकी पहचान हो पाये. इसके अलावा सरकार टैक्स में कमी करें, जिससे सरकारी अस्पताल में उकपरण कम कीमत पर उपलब्ध हो जाये. जानें क्या मानना है रांची के डॉक्टरों का. डॉ अनित कुजूर ने कहा कि मरीजों को स्वास्थ्य के मद में पैसा खर्च नहीं करना पड़े, इस पर ध्यान देने की जरूरत है. हेल्थ वर्कर को स्वास्थ्य बीमा से जोड़ा जाना चाहिए. इसके लिए स्वास्थ्य के बजट को बढ़ाना चाहिए. मातृ व शिशु मृत्यु दर में राज्य राष्ट्रीय स्तर से नीचे है. इसे केरल के बराबर लाना होगा. डॉ स्टीफन खेस ने कहा कि सरकार को सदर अस्पताल और पीएचसी-सीएचसी में सुविधा बढ़ाने की जरूरत है. रांची सदर अस्पताल में सुपरस्पेशियलिटी विंग भी है, लेकिन यहां भी मैनपावर की कमी है. मैनपावर बढ़ने से चिकित्सीय सेवा का दायरा बढ़ेगा और ज्यादा से ज्यादा मरीजों को लाभ मिल पायेगा. डॉ प्रतीश प्रणय ने कहा कि सरकार के सहयोग से मोतियाबिंद की सर्जरी बढ़ी है. अंधापन नियंत्रण विभाग भी सहयोग कर रहा है, लेकिन सदर अस्पतालों में उत्तम क्वालिटी की मशीनों की जरूरत है. इससे गुणवत्तापूर्ण सर्जरी होगी. सरकार मशीना उपलब्ध तो करा रही है, लेकिन क्वालिटी उस स्तर की नहीं है. डॉ विमलेश सिंह ने कहा कि आधारभूत संरचना बढ़े, लेकिन साथ-साथ उसके संचालन के लिए मैनपावर भी उसी अनुरुप बढ़ायी जाये. आउटसोर्सिंग से मैनपावर की कमी को दूर करने से कोई खासा लाभ नहीं होता है. सरकार अनुबंध पर दक्ष लोगोंं को नियुक्त करे. इसी के मुताबिक स्वास्थ्य का फंड बढ़ाया जाये. डॉ देवनीश खेस ने कहा कि गलत लाइफ स्टाइल की वजह से असाध्य रोगियों की संख्या बढ़ रही है. आयुष्मान कार्ड में भी असाध्य रोग यानी गठिया और वात की बीमारी के इलाज के लिए अपेक्षाकृत कम फंड आवंटित है, इससे इलाज करने में परेशानी होती है. राज्य सरकार को इस पर पहल करने की जरूरत है. डॉ दिप्ती मलिका कुजूर ने कहा कि नॉन कम्युनिकेबल डिजीज यानी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट, कैंसर और सांस की बीमारी तेजी से बढ़ रही है. महिलाओं की बात करें तो उनमें सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित है. प्रजनन क्षमता वाली प्रत्येक महिला की स्क्रीनिंग हो इसको सुनिश्चित किया जाना चाहिए. डॉ अजीत कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य को आम जनों तक पहुंचाने का जिम्मा सिर्फ अकेले सरकार का नहीं है. प्राइवेट पार्टनर के रूप में संस्थाओं को जोड़ना होगा. आयुष्मान भारत योजना में आवंटित फंड व बिल का समय पर भुगतान नहीं होने से निजी अस्पताल कतराते हैं. इसकी व्यवस्था सुगम करने की जरूरत है. डॉ रविराज ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति पर सरकार ध्यान दे. वेतनमान और अन्य सुविधाओं को बढ़ाया जाये, जिससे डॉक्टर सरकारी सेवा में आने के लिए रुचि दिखाये. वर्तमान में डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए आवेदन निकलते हैं तो लेकिन डॉक्टर साक्षात्कार में नहीं आते हैं. डॉ मुसर्रत यामिनी ने कहा कि स्वास्थ्य के बजट को बढ़ाया जाये. पीएचसी-सीएचसी स्तर के अस्पतालों पर राज्य सरकार पहले से ही काम कर रही है, लेकिन और सुगम करने के लिए मोबाइल सेवा शुरू की जा सकती है. इससे वाहनों की परेशानी के कारण चिकित्सीय लाभ से वंचित लोग अपना इलाज करा पायेंगे.
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