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राष्ट्रीय पुस्तक मेला: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की 10 पुस्तकों पर संवाद, पद्मश्री बलबीर दत्त ने बताया हरिवंश पुराण का नया संस्करण

Updated at : 20 Jan 2025 12:44 AM (IST)
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राष्ट्रीय पुस्तक मेले में मंच पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और पद्मश्री बलबीर दत्त समेत अन्य

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में मंच पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और पद्मश्री बलबीर दत्त समेत अन्य

National Book Fair 2025 Ranchi: रांची के जिला स्कूल मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है. रविवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की दस किताबों पर संवाद हुआ. पद्मश्री बलबीर दत्त ने हरिवंश के रचना संसार को हरिवंश पुराण का नया संस्करण बताया.

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National Book Fair 2025 Ranchi: रांची-राजधानी रांची के जिला स्कूल मैदान में लगे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में रविवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की 10 पुस्तकों पर संवाद हुआ. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से प्रो विनय भरत ने पुस्तक संवाद किया. पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि हरिवंश पुराण में 25 प्रकरण हैं. हरिवंश की पुस्तकों की संख्या भी पच्चीस हो गयी है. इसलिए इसे हरिवंश पुराण का नया संस्करण माना जा सकता है. रवि दत्त वाजपेयी ने श्री परमहंस योगानंद की पुस्तक ‘योगी कथामृत’ पर चर्चा की. दयामनी बारला ने कहा कि हरिवंश के संपादकीय में जो भी घटनाएं घटीं, उन घटनाओं का यथासंभव दृश्य इन पुस्तकों में दिखाई पड़ता है. हरीश चंद्र शर्मा ने कहा कि अशिक्षित लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से पिछड़ते जा रहे हैं, जबकि शिक्षित लोग सरकारी योजनाओं से जुड़ रहे हैं.

हरिवंश ने की है तेवर की पत्रकारिता-अनुज कुमार सिन्हा


वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का जन्म 30 जून यानी हूल दिवस के दिन हुआ. इन्होंने तेवर की पत्रकारिता की. महादेव टोप्पो ने कहा कि उन्हें दो पत्रकारों ने अखबार में जगह दी है. एक बलबीर दत्त और दूसरे हरिवंश. कुशल संचालन अनीश अंकुर और धन्यवाद ज्ञापन चंद्रभूषण ने किया. इस अवसर पर डॉ जेबी पांडेय, डॉ विनोद कुमार, अशोक कुमार प्रमाणिक समेत कई गणमान्य उपस्थित थे.

पुस्तक मेले में उमड़ी भीड़


रविवार को काफी संख्या में पुस्तक प्रेमी मेले में पहुंचे और पुस्तक मेले का आनंद लिया. यह पुस्तक मेला 26 जनवरी तक है. पुस्तक प्रेमियों के लिए मेला परिसर में प्रवेश सुबह 11 बजे से रात 7:30 बजे तक है. बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता संपन्न हुई. इस प्रतियोगिता में तीनों आयु वर्ग के बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और रंगों के सहारे अपने भावों को व्यक्त किया. बच्चों की चित्रकला में जहां प्रकृति का खूबसूरत संसार रंगों और रेखाओं के माध्यम से चित्रित हुआ, वहीं सामाजिक जीवन और पर्यावरण से जुड़े गहरे सरोकारों को भी जीवंत किया.

कविता सुनाओ/कहानी लेखन प्रतियोगिता सोमवार को


पुस्तक मेले में बच्चों की कविता सुनाओ/कहानी लेखन प्रतियोगिता सोमवार अपराह्न 3 बजे आयोजित है. इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी कविता सुनाने और कहानी लेखन की कला का प्रदर्शन कर सकेंगे. प्रतियोगिता प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क है. सायं 4 बजे पुस्तक पठन संस्कृति पर संवाद कार्यक्रम आयोजित है. इस कार्यक्रम में पुस्तक प्रेमी, लेखक, पत्रकार और संस्कृतिकर्मी अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित हैं.

ये किताबें भी हैं उपलब्ध


राजपाल एंड संस, नैय्यर बुक सर्विस, प्रकाशन संस्थान, हिन्द युग्म, दिव्यांश पब्लिकेशन, लक्ष्मी प्रकाशन के स्टॉल्स पर बच्चों की सस्ती और अच्छी पुस्तकें उपलब्ध हैं. इन पुस्तकों में आप का भविष्य आपके हाथ में, गुरुनानक अर्जुन, शिव और पार्वती, हनुमान, चाणक्य, सुभाष चन्द्र बोस, अशोक, महात्मा गांधी, राम, कृष्ण, झांसी की रानी, जातक कहानियां (3 खण्ड), जादू नगरी, रोबिन हुड, गुलिवर की यात्राएं, तीसमार खां आदि उपलब्ध हैं. यह पुस्तकें बच्चों को भारतीय परंपरा, इतिहास, चरित्र नायकों, पौराणिक कथाओं और रोमांचक यात्राओं से समृद्ध करने में समर्थ हैं. यश प्रकाशन के स्टॉल पर कबीर के दोहे, गबन, गोदान, अपनी शक्ति पहचानें, बड़ी दीदी, निर्मला, वरदान, तितली, पंचतंत्र, हितोपदेश, बुलन्दियों की ओर, ऐसे रहें हमेशा खुश, चुनाव जीतने के अचूक नुस्खे, मन की 100 बातें, यू कैन डू इट जैसी चर्चित पुस्तकें हैं. योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा श्री श्री परमहंस योगानंद जी का जीवनवृत्त ‘योगी कथामृत’ भी उपलब्ध है.

झारखंड पर केन्द्रित ये हैं पुस्तकें


प्रकाशन संस्थान के स्टॉल पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की झारखंड: संपन्न धरती, उदास बसंत, डॉ रामदयाल मुंडा की आदिवासी अस्तित्व और झारखंडी अस्मिता के सवाल, शैलेन्द्र महतो की झारखंड की समरगाथा, महादेव टोप्पो की झारखंड में विद्रोह का इतिहास: आदिवासी विश्व चेतना जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं. समय प्रकाशन के स्टॉल पर सरिता कुमारी की झारखंड के इतिहास पर एक अध्ययन और चन्द्र भूषण की झारखंड पर्यटन पुस्तक है. यह पुस्तक रंगीन चित्रों से सुसज्जित है. झारखंड झरोखा के स्टॉल पर झारखंड पर केन्द्रित कई महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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