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Video: महाकुंभ में श्रद्धालु ईश्वर से कर रहे थे प्रार्थना, हे भगवान, गिरने से बचा लेना, रांची की रानी देवी ने बताई भगदड़ की कहानी

Updated at : 30 Jan 2025 3:51 PM (IST)
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Mahakumbh Stampede Story Rani Devi Ranchi

प्रयागराज से लौटीं हिनू के साकेत नगर की रानी देवी.

Mahakumbh Stampede Story: महाकुंभ में त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए प्रयागराज गयी रांची की रानी देवी ने वहां भगदड़ के बाद का नजारा देखा, तो रो पड़ीं. रांची लौटने के बाद उन्होंने बताया कि महाकुंभ क्षेत्र में भगदड़ मची कैसे.

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Mahakumbh Stampede Story: मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में पुण्य स्नान करने के लिए झारखंड की राजधानी रांची की रानी देवी भी गईं थीं. हिनू की रहने वाली रानी देवी गुरुवार तड़के करीब ढाई बजे रांची पहुंचीं. प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ से जुड़ी बातें उन्होंने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) से साझा की. उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोग गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम (त्रिवेणी) और गंगा के तट पर पहुंचे थे. सभी मौनी अमावस्या पर शुभ और ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने का इंतजार कर रहे थे. इसलिए बहुत से लोग नदी किनारे बालू पर ही सो गये थे. महाकुंभ में आने वाले सभी श्रद्धालु संगम में स्नान करना चाहते थे. अचानक से भगदड़ मच गयी और इंसान के ऊपर इंसान गिरने लगे. इसी में कई लोगों की दबकर मौत हो गई.

28 जनवरी को प्रयागराज पहुंचीं थीं रानी देवी

रानी देवी ने बताया कि वह 27 जनवरी को रांची से प्रयागराज के लिए निकलीं थीं. 28 जनवरी को वह महाकुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचीं. उस दिन बड़े आराम से संगम में स्नान किया. अगले दिन यानी 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर पुण्य स्नान करने के लिए वहीं रुक गईं. रानी देवी ने कहा कि प्रशासन ने प्रयागराज में अच्छा इंताजम किया है, लेकिन आने-जाने का रास्ता एक ही था, जिसकी वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया.

मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान नहीं कर पायीं रांची की रानी देवी

रानी देवी ने कहा कि भीड़ और भगदड़ की वजह से मौनी अमावस्या के दिन वह संगम में स्नान नहीं कर पायीं. गंगा में पानी कम होने के बावजूद उसी में डुबकी लगाकर लौट आईं. उन्होंने बताया कि जब घटना हुई, वह वहीं पर थीं. उन्होंने एक महिला को रोते हुए देखा. वह अपने देवर के साथ कुंभ स्नान करने आई थी. उसे रोते हुए देखकर रानी देवी भी रोने लगीं.

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आने और जाने के लिए था एक ही रास्ता

रानी देवी ने कहा कि जब मेला क्षेत्र में गए, तो इतनी भीड़ थी कि हर कोई ईश्वर से सिर्फ यही प्रार्थना कर रहा था- हे भगवान, गिरने मत देना. सभी को पता था कि अगर एक बार गिर गये, तो फिर उठ नहीं पायेंगे. हजारों लोग उसे रौंदते हुए निकल जायेंगे. उन्होंने कहा कि वीआईपी रोड अलग था. उस पर रेड कार्पेट बिछा था. दूसरी ओर आम लोगों के लिए एक ही रास्ता बना था. जिस रास्ते से लोग आ रहे थे, उसी रास्ते से लोग जा भी रहे थे. अगर आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्ता बना होता, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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