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53 साल में झामुमो का 13वां महाधिवेशन, रांची लगातार दूसरी बार

JMM Mahadhiveshan History: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का केंद्रीय महाधिवेशन लगातार दूसरी बार रांची में हो रहा है. इसके पहले भी रांची में महाधिवेशन हुए हैं, लेकिन पार्टी के सत्ता में रहते यह दूसरा मौका है, जब केंद्रीय महाधिवेशन यहां आयोजित हो रहा है. झामुमो 4 फरवरी 1972 को अस्तित्व में आया. इसका पहला महाधिवेशन 1 और 2 जनवरी 1983 में हुआ. 53 साल की पार्टी अपना 13वां महाधिवेशन कर रही है.

JMM Mahadhiveshan Ranchi| रांची, सतीश कुमार : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने झारखंड आंदोलन से लेकर अब तक राजनीति का लंबा सफर तय किया है. 53 वर्षों के संघर्ष के बाद पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आयी है. झारखंड अलग राज्य निर्माण में झामुमो की अहम भूमिका रही. 4 फरवरी 1972 को झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ. एक वर्ष बाद 4 फरवरी 1973 को धनबाद में अपना पहला स्थापना दिवस मनाया और अपनी ताकत दिखायी. यहीं से झारखंड के मुद्दों को एक फलक मिला. झामुमो के गठन के लगभग 11 वर्ष बाद पहला महाधिवेशन 1 और 2 जनवरी 1983 को धनबाद में हुआ. इसमें झारखंड अलग राज्य गठन समेत 18 प्रस्ताव पारित किये गये थे.

रांची में लगातार दूसरी बार हो रहा महाधिवेशन

झारखंड की सत्ता में रहते में रांची में लगातार दूसरी बार झामुमो महाधिवेशन हो रहा है. रांची में अब इससे पहले 3 बार महाधिवेशन का आयोजन हुआ है. अब 14 और 15 अप्रैल को चौथी बार आयोजन हो रहा है. शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर झामुमो की नींव रखी थी. पार्टी का गठन 4 फरवरी 1972 को हुआ था.

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अलग-अलग संघर्ष कर रहे थे एके राय, शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो

इससे पहले पार्टी के संस्थापक तीनों सदस्य एके राय, शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो अलग-अलग संगठन बनाकर काम करते थे. शिबू सोरेन सोनोत संताल समाज के जरिये आदिवासी समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए अभियान चलाते थे. वह महाजनों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ रहे थे. आदिवासियों की जमीन को महाजनों से मुक्त कराने का अभियान चला रहे थे.

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3 नेता मिले, तो अस्तित्व में आया झामुमो

उधर, बिनोद बिहारी महतो कुड़मी समुदाय के उत्थान के लिए शिवाजी समाज नामक सामाजिक संगठन चलाते थे. एके राय कोयला खनन के क्षेत्र में मजदूरों का संगठन बनाकर उनकी लड़ाई लड़ते थे. इन तीनों ने महसूस किया कि अगर मिलकर और एक संगठन बनाकर लड़ाई लड़ें, तो ताकत कई गुना बढ़ जायेगी. इसके बाद झामुमो एक राजनीतिक दल के रूप में अस्तित्व में आया.

झामुमो के अब तक के अधिवेश

महाधिवेशमहाधिवेशन की तिथिमहाधिवेशन का स्थल
पहला1-2 जनवरी 1983धनबाद
दूसरा26, 27, 28 अप्रैल 1986रांची
तीसरा10, 11, 12 मई 1989दुमका
चौथा10, 11, 12 जून 1994बोकारो
पांचवां24, 25, 26 जून 1997जमशेदपुर
छठा11, 12, 13 जून 2000रांची
सातवां11, 12, 13 जून 2003जमशेदपुर
आठवां27, 28, 29 जनवरी 2007देवघर
नौवां20, 21, 22 सितंबर 2010दुमका
दसवां16, 17, 18 अप्रैल 2015जमशेदपुर
ग्यारहवां6, 7, 8 मई 2018धनबाद
बारहवां18 दिसंबर 2021रांची
तेरहवां14-15 अप्रैल, 2025रांची

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Mithilesh Jha
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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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