ePaper

ताकतवर क्षेत्रीय दल बनकर उभरा है झारखंड मुक्ति मोर्चा

Updated at : 14 Apr 2025 3:33 PM (IST)
विज्ञापन
jmm mahadhiveshan, history of jharkhand mukti morcha founders

ये हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा के 3 संस्थापक.

JMM Mahadhiveshan: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ताकतवर क्षेत्रीय दल बनकर उभरा है. इस पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. 90 के दशक से लेकर अब तक शिबू सोरेन के संघर्ष और इक्कीसवीं सदी में हेमंत सोरेन के राजनीतिक कौशल के दम पर पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आयी है. पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटें जीतकर हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में झामुमो की सरकार बनी है. जेएमएम के 13वें केंद्रीय अधिवेशन पर पढ़ें पार्टी के गठन से लेकर अब तक के संघर्ष की पूरी गाथा.

विज्ञापन

JMM Mahadhiveshan| रांची, अनुज कुमार सिन्हा : देश के कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों का बोलबाला रहा है और आज भी है. उन राज्यों में झारखंड भी शुमार है, जहां वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की सीटें बढ़ती रहीं हैं. स्थिति यह है कि वर्ष 2024 में जब झारखंड विधानसभा के चुनाव हुए, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए अकेले 34 सीटों पर विजय हासिल की. इतनी सीटें झारखंड (संयुक्त बिहार के समय को भी ले सकते हैं) के इतिहास में किसी भी क्षेत्रीय दल ने कभी नहीं जीतीं. 1951-52 के पहले विधानसभा चुनाव में सबसे अच्छा प्रदर्शन जयपाल सिंह की अगुवाई वाली झारखंड पार्टी (झापा) ने किया था. झापा ने तब 32 सीटें जीती थी और मुख्य विपक्षी दल बना था. इस रिकॉर्ड को भी वर्ष 2024 में झामुमो ने तोड़कर यह साबित कर दिया कि अब वह बहुत ज्यादा ताकतवर पार्टी बन चुका है. 14-15 अप्रैल को झामुमो के केंद्रीय महाधिवेशन में पार्टी की ताकत दिखेगी. इसमें पार्टी की नीतियां और प्राथमिकताएं भी दिखेंगी.

झामुमो के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन में शिबू सोरेन के साथ हेमंत सोरेन व झामुमो के अन्य नेता.

1973 में हुआ झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन

वर्ष 1973 में शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया था और अलग राज्य की लड़ाई आरंभ की थी. पहला महाधिवेशन करने में झामुमो को 10 साल लग गये. वर्ष 1973 से 1984 तक बिनोद बिहारी महतो अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव रहे. राजनीतिक हालात बदले और वर्ष 1984 में शिबू सोरेन ने निर्मल महतो को पार्टी का अध्यक्ष बनाया, खुद महासचिव के पद पर ही रहे. यही वह समय था, जब झामुमो तेजी से मजबूत हुआ. वर्ष 1986 के दूसरे महाधिवेशन के बाद निर्मल महतो और शिबू सोरेन ने रांची की सड़कों पर जुलूस निकाला और अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया.

तीर-धनुष के साथ झामुमो के कार्यक्रम में शामिल एक बुजुर्ग आदिवासी.

अलग झारखंड के लिए हर घर से एक मुट्ठी चावल के साथ चवन्नी-अठन्नी भी मिली

पार्टी को मजबूत करने के लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन और कार्यकर्ताओं ने बहुत खून-पसीना बहाया. आंदोलन के लिए हर घर से एक मुट्ठी चावल मांगा. लोगों ने साथ में चवन्नी और अठन्नी भी दिया, ताकि झारखंड राज्य की लड़ाई में उसका उपयोग हो सके. ऐसे प्रयासों से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) मजबूत हुआ और आज मजबूती के साथ सत्ता में है. वर्ष 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद खुद शिबू सोरेन ने पार्टी की कमान संभाली और उसी समय से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

2015 में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये हेमंत सोरेन

जेएमएम के रांची महाधिवेशन में केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन के साथ कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन.

गुरुजी की बढ़ती उम्र के कारण वर्ष 2015 में कार्यकारी अध्यक्ष का पद सृजित हआ. हेमंत सोरेन को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी गयी. यह बड़ा फैसला था. हेमंत सोरेन ने नये तरीके से संगठन को मजबूत किया. इसका असर वर्ष 2019 और वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में दिखा. इन चुनावों में झामुमो ने क्रमश: 30 और 34 सीटों पर जीत दर्ज की. दोनों ही चुनावों में झामुमो की सरकार बनी. यह पहला मौका था, झामुमो की अगुवाई में महागठबंधन ने लगातार 2 बार विधासनभा चुनाव में बहुमत के साथ सरकार बनायी. दोनों बार हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने. यह उनके कुशल नेतृत्व और संगठन की ताकत को दर्शाता है.

इसे भी पढ़ें : झामुमो के केंद्रीय महाधिवेशन में गरजे हेमंत सोरेन- उत्पीड़न से परेशान जनता ने डबल इंजन सरकार को उखाड़ फेंका

1973 में बने झामुमो को 1980 में मिला निबंधित पार्टी का दर्जा

झामुमो का गठन भले वर्ष 1973 में हो गया, लेकिन उसे निबंधित पार्टी का दर्जा वर्ष 1980 में मिला. उसी साल शिबू सोरेन दुमका से सांसद बने. विधानसभा चुनाव में 11 सीटों पर झामुमो के उम्मीदवारों को जीत मिली थी. तब बिहार का बंटवारा नहीं हुआ था. वर्ष 1995 के चुनाव में झामुमो को सिर्फ 10 सीटें मिलीं, लेकिन उसके बाद किसी भी चुनाव में झामुमो की सीटें घटी नहीं. लगातार बढ़ती ही गयी. वर्ष 2000 में राज्य बना, उस समय 12 विधायक थे. वर्ष 2005 में 17 विधायक चुने गये. वर्ष 2009 में 18 विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे. वर्ष 2014 में 19 विधायक चुने गये. वर्ष 2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 30 विधायक चुने गये. इसके बाद वर्ष 2024 में झामुमो के 34 विधायक चुनकर झारखंड विधानसभा पहुंचे. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत के आंकड़े (41 सीट) से महज 7 सीटें कम.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

झामुमो के महाधिवेशन में इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

झामुमो महाधिवेशन में संगठन का विस्तार करके, पार्टी को मजबूती प्रदान करने और इन सीटों को आने वाले चुनावों में और बढ़ाने की रणनीति बनेगी. झामुमो उन राज्यों में काम करेगा, जो कभी बृहत्तर झारखंड का हिस्सा हुआ करता था, जहां के लोग झारखंड आंदोलन में भाग लेते थे. इसलिए आगामी चुनावों में बिहार, बंगाल, ओडिशा समेत कई अन्य राज्यों में प्रत्याशी खड़ा करके झारखंड मुक्ति मोर्चा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने का प्रयास होगा.

इसे भी पढ़ें : सुन्नी वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला- हिसाब नहीं देने वाली संस्थाओं की मान्यता होगी रद्द

कल्पना सोरेन ने 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में दिखायी नेतृत्व क्षमता

शिबू सोरेन की बहू और हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन कद्दावर नेता के रूप में उभरीं.

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में जिस तरीके से कल्पना सोरेन ने पार्टी का नेतृत्व किया, चुनाव में झामुमो का झंडा बुलंद किया, विधानसभा चुनाव में जो उनकी भूमिका रही, उससे स्पष्ट है कि बहुत ही जल्द संगठन में उन्हें बड़ी जिम्मेवारी दी जा सकती है. महाधिवेशन में इस बात पर भी चर्चा होगी कि आरक्षित सीट या ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी सीटों पर भी झामुमो की पकड़ मजबूत हो. महाधिवेशन में शिबू सोरेन की मौजूदगी हमेशा की तरह ताकत देगी. महाधिवेशन के माध्यम से झामुमो अपनी सरकार को यह संदेश भी देगा कि किसी तरह की लड़ाई में पूरी पार्टी सरकार के साथ खड़ी रहेगी, खासकर उन मुद्दों पर, जो केंद्र के पास लंबित हैं और जिन पर केंद्र को फैसला लेना है. एक भव्य महाधिवेशन की तैयारी है, जिसमें आधुनिक तकनीक भी दिखेगी. (लेखक झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार और प्रभात खबर के पूर्व कार्यकारी संपादक हैं.)

इसे भी पढ़ें

14 अप्रैल को आपके शहर में 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की क्या है कीमत, यहां चेक करें

गुरुदास चटर्जी : लालू सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद ठुकराया, कभी बॉडीगार्ड तक नहीं लिया

झामुमो के महाधिवेशन में कल्पना सोरेन को बड़ी जिम्मेदारी और वक्फ संशोधन कानून पर होगी चर्चा

Video: हजारीबाग में नगर भ्रमण पर निकले जुलूस पर पथराव के बाद हिंसा, आगजनी, बरकट्ठा छावनी में तब्दील

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola