गरीब मरीजों के लिए अच्छी खबर, झारखंड के निजी अस्पतालों में इलाज व जांच की समान दर होगी लागू

Updated at : 02 Apr 2024 12:59 PM (IST)
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Hospital Symbolic Pic

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यह पूरी कवायद आयुष्मान योजना और केंद्र सरकार स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज का दावा भुगतान में आनेवाली परेशानियों को दूर करने के लिए हो रही है. बीमा के दायरे से बाहर के लोगों को सुलभ इलाज दिलाना भी उद्देश्य है.

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बिपिन सिंह, रांची : महंगी जांच और इलाज का दंश झेल रहे मध्यमवर्गीय और गरीब मरीजों के लिए अच्छी खबर आ रही है. देश भर के निजी अस्पतालों में जांच (रेडियोलॉजी/पैथोलॉजी) और इलाज की दरों में समानता लाने की कवायद तेज हो गयी है. मार्च के पहले सप्ताह में एक पीआइएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को निर्देश दिया था. सचिवों से कहा गया था कि वह बैठक कर अगले छह सप्ताह में उक्त विषय पर ठोस प्रस्ताव तैयार करें और अगली सुनवाई में उसे खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करें. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई इसी महीने के अंतिम सप्ताह में हो सकती है. इसके तहत झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने विभाग के सभी क्षेत्रीय उपनिदेशक, सिविल सर्जनों और अस्पतालों के उपाधीक्षकों को पत्र भेज कर बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है.

दावा भुगतान की परेशानी दूर होगी :

यह पूरी कवायद आयुष्मान योजना और केंद्र सरकार स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज का दावा भुगतान में आनेवाली परेशानियों को दूर करने के लिए हो रही है. बीमा के दायरे से बाहर के लोगों को सुलभ इलाज दिलाना भी उद्देश्य है. अगर स्वास्थ्य विभाग से मिले प्रस्तावों पर अमल होता है, तो ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010’ के तहत संचालित अस्पताल, क्लिनिकों और रेडियोलॉजी सेंटरों को इसके दायरे में लाया जायेगा. उक्त एक्ट में 2012 में जोड़े गये नियम-9 के तहत लागू किया जायेगा. नियम के तहत निजी अस्पतालों, क्लिनिकों और रेडियोलॉजी सेंटरों में सभी तरह की जांच और इलाज के शुल्क में एकरूपता लायी जायेगी.

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कैशलेस एवरीव्हेयर प्लान के तहत हो रहा विचार :

कैशलेस एवरीव्हेयर प्लान के तहत इन योजनाओं पर विचार चल रहा है. जहां एक सरकारी योजना का लाभ लेनेवाला या किसी बीमा के तहत पॉलिसीधारक देश के किसी भी अस्पताल से इलाज प्राप्त कर सकते हैं. वर्तमान में, अलग-अलग अस्पताल इलाज के लिए अलग-अलग दर वसूलते हैं, जिससे देश में कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रणाली को लागू करना मुश्किल हो रहा है.

सिर्फ 408 निजी अस्पतालों ने कराया है रजिस्ट्रेशन :

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रांची जिले में लगभग 518 छोटे-बड़े निजी अस्पताल-क्लिनिक और रेडियोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं. इनमें से भी महज 408 निजी अस्पताल व क्लिनिकों ने ही स्वास्थ्य विभाग में एक्ट के तहत पोर्टल के जरिये अपना रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है.

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