झारखंड में आरक्षण का लाभ लेने के लिए विकलांगता प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा, सक्रिय है गिरोह

Updated at : 24 Jun 2024 8:37 AM (IST)
विज्ञापन
झारखंड में आरक्षण का लाभ लेने के लिए विकलांगता प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा, सक्रिय है गिरोह

फर्जीवाड़ा करने वाला गिरोह डिसेबिल्टी आइडी में विकलांगता के प्रतिशत को बढ़ा देते हैं. ताकि संबंधित व्यक्ति सरकारी सेवाओं व पदों में आरक्षण के लिए पात्र हो सके.

विज्ञापन

सतीश कुमार, रांची : राजधानी रांची में विकलांगता प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा का मामला प्रकाश में आया है. सदर अस्पताल में इसको लेकर एक गिरोह सक्रिय है. गिरोह के सदस्य सक्षम पदाधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ कर विकलांगता के प्रतिशत को बढ़ाने का काम करते हैं. इसके लिए संबंधित व्यक्ति से आठ से 10 हजार रुपये लिये जाते हैं. गिरोह में शामिल सदस्य सिविल सर्जन कम चीफ मेडिकल ऑफिसर रांची की ओर से जारी यूनिक डिसेबिल्टी आइडी में विकलांगता के प्रतिशत को बढ़ा देते हैं. इनकी ओर से विकलांगता के प्रतिशत को बढ़ा कर 45 प्रतिशत किया जाता है, ताकि संबंधित व्यक्ति सरकारी सेवाओं व पदों में आरक्षण के लिए पात्र हो सके.

साथ ही विकलांगता पेंशन के लिए हकदार हो सके. हालांकि जांच में इस तरह के फर्जी प्रमाण पत्र की पहचान आसानी से हो सकती है. बताते चलें कि सदर अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को विकलांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए जांच होती है. इसमें चिकित्सा पदाधिकारी की मौजूदगी में हर दिव्यांग व्यक्ति की भौतिक जांच होती है. जिसके बाद उन्हें अलग-अलग बिंदुओं पर ग्रेडिंग की जाती है. इसके बाद बोर्ड की ओर से संबंधित व्यक्ति को विकलांगता का सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिसमें उसके विकलांगता का उल्लेख रहता है. इसी आधार पर संबंधित व्यक्ति सरकारी सेवाओं व पदों में आरक्षण के लिए दावा कर सकता है. यहां से जारी असली प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ करके उसमें विकलांगता का प्रतिशत बढ़ाया जा रहा है.

आरक्षण के लिए 40 प्रतिशत विकलांगता का सर्टिफिकेट जरूरी :

केवल ऐसे व्यक्ति ही सेवाओं/पदों में आरक्षण के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 40 प्रतिशत प्रासंगिक विकलांगता से पीड़ित हों. जो व्यक्ति आरक्षण का लाभ उठाना चाहता है, उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा.

गिरोह करता है सर्टिफिकेट में छेड़छाड़ :

प्रभात खबर के पास विकलांगता प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा के दस्तावेज मौजूद हैं. एक 13 वर्षीय छात्र को पहले 10 प्रतिशत विकलांगता का सर्टिफिकेट जारी किया गया. बाद में इसी सर्टिफिकेट में छेड़छाड़ कर उसे 45 प्रतिशत कर दिया गया. इसी प्रकार एक 19 वर्षीय छात्र को पहले 30 प्रतिशत विकलांग सिविल सर्जन की ओर से जारी किया गया. बाद में गिरोह के सदस्यों ने सर्टिफिकेट में इसी व्यक्ति के विकलांगता प्रतिशत को बढ़ा कर 45 प्रतिशत कर दिया. इसी प्रकार 51 वर्षीय व्यक्ति के विकलांगता सर्टिफिकेट में छेड़छाड़ कर उसे 45 प्रतिशत कर दिया गया. सिविल सर्जन की ओर से जारी इन तीनों लोगों के सर्टिफिकेट में 29 मई व 30 मई 2024 की तिथि दर्ज है.

Also Read: GST News: झारखंड के हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स को नहीं देना पड़ता जीएसटी

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola