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GST News: झारखंड के हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स को नहीं देना पड़ता जीएसटी

Updated at : 23 Jun 2024 2:41 PM (IST)
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रांची के एक हॉस्टल की अंदर की तस्वीर. फोटो : प्रभात खबर

GST News: जीएसटी काउंसिल ने हॉस्टल को जीएसटी से मुक्त कर दिया है. लेकिन, आपको मालूम होना चाहिए कि झारखंड में हॉस्टल पहले से ही जीएसटी से मुक्त हैं.

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GST News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने स्टूडेंट्स को बड़ी राहत दी है. कहा है कि हॉस्टल खर्च पर जीएसटी का भुगतान नहीं करना होगा. झारखंड में पहले से ही हॉस्टल और लॉज में रहने वालों को जीएसटी का भुगतान नहीं करना होता.

झारखंड में 5000 से अधिक हॉस्टल, रजिस्टर्ड हैं सिर्फ 400 से 500

झारखंड हॉस्टल ओनर एसोसिएशन के सचिव राजेश सिन्हा ने बताया कि पूरे प्रदेश में करीब 5000 से अधिक हॉस्टल हैं. हालांकि, इनमें से 400 से 500 ही रजिस्टर्ड हैं. यही सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हैं. नियमों के अनुरूप हॉस्टल का संचालन करते हैं. उन्होंने बताया कि रांची में 400 से 500 हॉस्टल होंगे. इनमें से महज 200 हॉस्टल ही रजिस्टर्ड होंगे.

हॉस्टल से कमाई पर आईटी देते हैं, जीएसटी नहीं : जसमीत

राजधानी रांची में रेनबो गर्ल्स हॉस्टल का संचालन करने वाले जसमीत ने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) को बताया कि उन्हें जीएसटी का भुगतान नहीं करना होता. न ही उनके हॉस्टल में रहने वाले किसी व्यक्ति को किराए पर जीएसटी देना होता है. हां, हॉस्टल के किराए से होने वाली कमाई पर आयकर (इनकम टैक्स) जरूर देना होता है.

हॉस्टल के लिए नहीं करना होता जीएसटी का भुगतान : अखिलेश

गणपति गर्ल्स हॉस्टल के संचालक अखिलेश ने भी कहा कि रांची में हॉस्टल के संचालन के लिए जीएसटी का भुगतान नहीं करना होता. किराए से होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स पे करते हैं.

झारखंड में हॉस्टल संचालक जीएसटी के दायरे में नहीं : राजेश सिन्हा

झारखंड हॉस्टल ओनर एसोसिएशन के सचिव राजेश सिन्हा कहते हैं कि वह खुद रांची में कई हॉस्टल चलाते हैं. बाकायदा उनका रजिस्ट्रेशन करवा रखा है. सभी नियम-कानून का पालन करते हैं. उन्होंने कहा कि वह भी जीएसटी का भुगतान नहीं करते. न ही अपने हॉस्टल में रहने वाले किसी से जीएसटी लेते हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड में हॉस्टल चलाने वालों से जीएसटी नहीं लिया जाता है. यहां हॉस्टल में अधिकतर गरीब बच्चे गांव से आकर पढ़ते हैं.

रांची नगर निगम क्षेत्र में 150 से ज्यादा पंजीकृत हॉस्टल/लॉज नहीं

रांची नगर निगम से मिले आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में डेढ़ सौ के आसपास हॉस्टल और लॉज ही पंजीकृत हैं. गैर-पंजीकृत लॉज की बात करें, तो इनकी संख्या 5,000 या उससे भी अधिक होगी. ये हॉस्टल या लॉज स्टूडेंट्स और कामकाजी लोगों (पुरुष, महिला दोनों) को अपने यहां रखते हैं.

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं रांची के कई हॉस्टल. फोटो : प्रभात खबर

गैर-पंजीकृत हॉस्टल वाले नहीं करते नियमों का पालन

झारखंड हॉस्टल ओनर एसोसिएशन के सचिव भी मानते हैं कि झारखंड में बड़ी संख्या में हॉस्टल और लॉज हैं, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. ऐसे हॉस्टल संचालक लोगों को पेइंग गेस्ट के रूप में अपने यहां रख लेते हैं या एग्रीमेंट करके उन्हें कमरा किराए पर दे देते हैं.

जीएसटी काउंसिल ने हॉस्टल को कर दिया जीएसटी से मुक्त

एक दिन पहले यानी 22 जून को दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई. इस बैठक में शिक्षण संस्थानों के बाहर संचालित हो रहे हॉस्टल को जीएसटी से मुक्त करने का निर्णय लिया गया. महानगरों में रहने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह बड़ी राहत है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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