सावन की पहली सोमवारी पर पहाड़ी मंदिर में आस्था का जनसैलाब

Published by :MUNNA KUMAR SINGH
Published at :15 Jul 2025 12:59 AM (IST)
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सावन की पहली सोमवारी पर पहाड़ी मंदिर में आस्था का जनसैलाब

राजधानी में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर पहाड़ी मंदिर में 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया.

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60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक

रांची. राजधानी में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर पहाड़ी मंदिर में 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया. रात एक बजे के बाद से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होने लग गये थे. अलसुबह तीन बजे से सरकारी पूजा-अर्चना शुरू हुई. सबसे पहले बाबा को नमन कर उन्हें स्नान कराया गया. बाबा का 11 लीटर दूध से अभिषेक हुआ. पंचामृत स्नान आदि कराकर भगवान को विभिन्न प्रसादों का भोग लगाकर आरती उतारी गयी. पूजा में शामिल होने के लिए सचिव उत्कर्ष कुमार और डायरेक्टर खनन विभाग राहुल कुमार सिन्हा समेत अन्य उपस्थित थे. उन्होंने पूजा-अर्चना कर सबकी मंगलकामना के लिए प्रार्थना की. पूजा में कोषाध्यक्ष कृष्ण कन्हैया और कमेटी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे. पंडित कबीर दास, पिंटू, सुबोध पांडेय समेत अन्य ने पूजा करायी.

साढ़े तीन बजे भक्तों के लिए खुला बाबा का दरबार

बाबा की जयकारा के साथ साढ़े तीन बजे पहाड़ी मंदिर का पट खोल दिया गया. इसके बाद से बाबा को जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. दिन के ढाई बजे के बाद से भक्तों की भीड़ कम होने लगी. शाम चार बजे के करीब अरघा खोल दिया गया. इसके बाद से भक्तों ने बाबा का स्पर्श पूजन किया. शाम साढ़े छह बजे बाबा का अभिषेक कर उनकी पूजा-अर्चना की गयी. उसके बाद बाबा का शृंगार किया गया. आरती उतारकर प्रसाद अर्पित किया गया और श्रद्धालुओं में वितरण किया गया. बाबा का संध्या शृंगार देखने के लिए काफी संख्या में भक्त आये थे. रात नौ बजे के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया गया. बाबा को जलाभिषेक करने के लिए शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे.

त्रिपुंड और रूद्राक्ष में सजी आस्था

पहाड़ी मंदिर परिसर पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं में विशेष रूप से युवाओं में त्रिपुंड लगाने, ‘महाकाल’ लिखे कुर्ते पहनने और हाथों में रुद्राक्ष धारण करने का उत्साह दिखा. बच्चों में भी पारंपरिक वेशभूषा का आकर्षण देखने लायक था. जो श्रद्धालु मुख्य मंदिर तक नहीं पहुंच सके, उन्होंने मंदिर परिसर स्थित महाकाल मंदिर में जलाभिषेक कर प्रार्थना की.

व्यवस्था चाक-चौबंद, श्रद्धालुओं को नहीं हुई परेशानी

भक्तों को परेशानी न हो इसके लिए स्वयंसेवक, पहाड़ी मंदिर के कर्मचारी, पुलिस प्रशासन और मजिस्ट्रेट समेत वॉलंटियर तैनात थे.

पहाड़ी बाबा के सभी मंदिरों को फूलों से सजाया गया था.

48 सीसीटीवी कैमरा से निगरानी की गयी.

महिला-पुरुष को जाने के लिए बैरिकेडिंग की गयी थी.

मुख्य मंदिर के समीप कलश और जल रखा गया था.

कई स्वयंसेवी संस्था व धार्मिक संगठनों ने पूजन सामग्री का वितरण किया.

जो श्रद्धालु मुख्य मंदिर में भीड़ की वजह से नहीं जा पा रहे थे वह महाकाल मंदिर में ही जलाभिषेक कर प्रार्थना की.

पूरा पहाड़ी मंदिर परिसर केशरिया रंग से पट गया था.

युवा में त्रिपुंड लगाने और महाकाल वाले कुरता व हाथों में रुद्राक्ष पहनने का क्रेज था.

छोटे-छोटे बच्चे भी त्रिपुंड में खूब फब रहे थे.

पूरा पहाड़ी मंदिर रोड पूजा सामग्री की दुकानों से पट गया था.

मेडिकल टीम को भी तैनात किया गया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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