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16 गुणा हुआ झारखंड का वार्षिक रेल बजट, नया ट्रैक बिछाने पर खर्च होंगे 56,694 करोड़ रुपए

Updated at : 03 Feb 2025 5:59 PM (IST)
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रेलवे के बजट में झारखंड के हिस्से क्या-क्या आया. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रांची मंडल के डीआरएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी. फोटो : प्रभात खबर

Indian Railways News: झारखंड का रेलवे बजट बढ़कर 16 गुणा हो गया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये झारखंड के पत्रकारों को यह जानकारी दी.

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Indian Railways News: झारखंड में रेलवे का वार्षिक बजट 16 गुणा बढ़ गया है. वर्ष 2009-14 तक रेल बजट में झारखंड की हिस्सेदारी 457 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर 7,302 करोड़ रुपए हो गयी है. यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार (3 फरवरा 2025) को दी. रेल मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2025 में रेलवे के लिए जो प्रावधान किया है, उसमें झारखंड के हिस्से क्या-क्या आया है. उन्होंने बताया कि झारखंड में नये रेलवे लाइन बिछाने के 34 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इसके तहत 3,251 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाये जा रहे हैं. इस पर 56,694 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

2009-14 में बिछे थे 57 किमी रेलवे ट्रैक, 2014-25 तक 86 किमी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि झारखंड में वर्ष 2009 से 2014 के बीच कुल 57 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाये गये थे. वर्ष 2014 से 2025 के बीच 119 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाये गये हैं. यह पिछली सरकार की तुलना में 2 गुणा है. इतना ही नहीं, 2009-2014 में रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण 0 (शून्य) रहा. वहीं, वर्ष 2014-2025 के बीच 86 किलोमीटर रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया.

झारखंड में 100 फीसदी रेलवे लाइन का विद्युतीकरण

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे रांची मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सह मुख्य जनसंपर्क अधिकारी निशांत कुमार ने जो आंकड़े जारी किये, उसमें बताया गया कि इस दौरान 100 फीसदी रेलवे लाइन का विद्युतीकरण किया गया. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि झारखंड में वर्ष 2014 से अब तक 1,311 किलोमीटर नये रेलवे ट्रैक बिछाये गये हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के कुल रेल नेटवर्क से ज्यादा है.

2014 से अब तक 943 किमी रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा

उन्होंने कहा कि झारखंड में रेलवे का 100 फीसदी विद्युतीकरण हो चुका है. वर्ष 2014 से अब तक 943 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण किया गया है. झारखंड में नये रेलवे ट्रैक के 34 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इसके तहत 3,251 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाये जायेंगे और इस पर 56,694 करोड़ रुपए खर्च होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि 57 अमृत स्टेशनों को विकसित करने पर 2,134 करोड़ रुपए खर्च किये जायेंगे.

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1693 किमी रेलवे ट्रैक को ‘कवच’ के दायरे में लाया जायेगा – वैष्णव

रेल मंत्री ने कहा कि झारखंड में 1,693 किलोमीटर रेलवे ट्रैक को कवच के दायरे में लाया जायेगा. इसमें से 400 किलोमीटर में काम चल रहा है या उसके टेंडर की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक 445 रेलवे फ्लाईओवर और अंडर ब्रिज का निर्माण हुआ है.

यात्री सुविधाओं का हुआ विकास – अश्विणी वैष्णव

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्ष 2014 से झारखंड में यात्री सुविधा का भी विकास किया गया है. रेलवे स्टेशनों पर 34 लिफ्ट लगाये गये हैं. 14 एस्कलेटर लगाये गये हैं. 215 स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

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झारखंड में दौड़ रही 12 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि झारखंड में 12 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें दौड़ रहीं हैं. ये ट्रेनें राज्य के 24 में से 14 जिलों को कवर करतीं हैं. झारखंड में 22 स्टेशनों पर वंदे भारत ट्रेनें रुकतीं हैं.

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झारखंड के लिए 2009-14 में 457 करोड़ था रेलवे का वार्षिक बजट

रेल मंत्री ने कहा कि वर्ष 2009-14 के बीच झारखंड के लिए रेलवे का वार्षिक बजट 457 करोड़ रुपए था. केंद्र में जब नरेंद्र मोदी की सरकार आयी, तो झारखंड में रेलवे का बजट अप्रत्याशित रूप से बढ़ा. वर्ष 2025-26 में झारखंड का रेल बजट 16 गुणा बढ़कर 7,302 करोड़ रुपए हो गया है.

ये 57 स्टेशन बनेंगे अमृत स्टेशन

  1. बालसिरिंग
  2. बानो
  3. बड़ाजामदा जंक्शन
  4. बरकाकाना
  5. बासुकिनाथ
  6. भागा
  7. बोकारो स्टील सिटी
  8. चाईबासा
  9. चक्रधरपुर
  10. चांडिल
  11. चंद्रपुरा
  12. डाल्टेनगंज
  13. डांगुवापोसी
  14. देवघर
  15. धनबाद
  16. दुमका
  17. गम्हरिया
  18. गंगाघाट
  19. गढ़वा रोड
  20. गढ़वा टाउन
  21. घाटशिला
  22. गिरिडीह
  23. गोड्डा
  24. गोविंदपुर रोड
  25. हैदरनगर
  26. हटिया
  27. हजारीबाग रोड
  28. जामताड़ा
  29. जपला
  30. जसीडीह जंक्शन
  31. कतरासगढ़
  32. कोडरमा जंक्शन
  33. कुमारडुबी
  34. लातेहार
  35. लोहरदगा
  36. मधुपुर जंक्शन
  37. मनोहरपुर
  38. मोहम्मदगंज
  39. मुरी जंक्शन
  40. एनएससीबी जं (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन), गोमो
  41. नगरऊंटारी
  42. नामकुम
  43. ओरगा
  44. पाकुड़
  45. पारसनाथ
  46. पिस्का
  47. राजखरसवां
  48. राजमहल
  49. रामगढ़ कैंट
  50. रांची जंक्शन
  51. साहिबगंज
  52. शंकरपुर
  53. सिल्ली
  54. सीनी
  55. टाटानगर
  56. टाटीसिल्वाई
  57. विद्यासागर

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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