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झारखंड में सोरेन परिवार को किसकी लगी नजर, पांचवीं बार लगा झटका

Updated at : 28 Aug 2022 5:37 PM (IST)
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झारखंड में सोरेन परिवार को किसकी लगी नजर, पांचवीं बार लगा झटका

झारखंड की वर्तमान राजनीतिक हालात के बीच यह चर्चा भी है कि सोरेन परिवार की किसकी नजर लग गयी है. झारखंड आंदोलन से लेकर अब तक सोरेन परिवार ने कई संघर्ष किए. पिता-पुत्र सीएम भी बने, लेकिन किसी ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया.

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Jharkhand Political Criris: राज्यपाल रमेश बैस ने ऑफिस ऑफ प्रोफिट मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने का फैसला सुनाया है. इन्हें भी अब सीएम की कुर्सी फिलहाल छोड़नी पड़ेगी. इस फैसले के साथ ही झारखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी है. झारखंड में यूपीए की पिकनिक पॉलिटिक्स शुरू हुई, तो वहीं लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गयी है कि सोरेन परिवार की किसकी नजर लग गयी. सोरेन परिवार में पिता-पुत्र मुख्यमंत्री बने, लेकिन किसी ने अब तक पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया. झारखंड गठन के बाद एकमात्र मुख्यमंत्री रघुवर दास रहें जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया.

शिबू सोरेन मात्र 10 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने

राज्य की सत्ता के शीर्ष पर अब तक पांच बार सोरेन परिवार पहुंचे हैं, लेकिन किसी ने कार्यकाल पूरा नहीं किया है. JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन तीनों बाद उन्हें पांच साल के कार्यकाल से पहले ही हटना पड़ा. शिबू सोरेन पहली बार दो मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2005 तक मुख्यमंत्री रहे. झारखंड में सबसे कम समय के लिए मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ही रहे. इन्होंने मात्र 10 दिन मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे. तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने भाजपा और जेडीयू के NDA के पास 36 सीट होने और पांच निर्दलीय विधायकों का समर्थन होने के बावजूद उन्होंने शिबू सोरेन को सरकार बनाने का न्योता दिया था. लेकिन, शिबू सोरेन सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाये. यही कारण है कि उन्हें 10 दिनों में ही मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था.

सीएम रहते शिबू सोरेन हारे थे चुनाव

इसके बाद दूसरी बार शिबू सोरेन 145 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने. 27 अगस्त, 2008 से 19 जनवरी, 2009 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री रहे. मधु कोड़ा की सरकार गिरने के बाद शिबू सोरेन दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बने. उस वक्त शिबू सोरेन सांसद थे. एेसे में छह माह के अंदर विधानसभा का सदस्य बनना अनिवार्य था. शिबू सोरेन रांची के तमाड़ विधानसभा से चुनाव लड़े, लेकिन हार गये. इस वजह से उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी. झारखंड के दूसरी विधानसभा 2005 से 2010 के बीच शिबू सोरेन दो बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया.

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तीसरी बार 153 दिनों के लिए बने थे सीएम

इसके बाद तीसरी बार शिबू सोरेन 30 दिसंबर, 2009 से एक जून, 2010 को राज्य का बागडोर संभाले, लेकिन इस बार 153 दिनों में ही सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी. राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा बनी थी. राजनीतिक दावं-पेच में शिबू सोरेन तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. इन्हें बीजेपी, आजसू और जदयू का समर्थन मिला था. लेकिन, शिबू सोरेन ने केंद्र में यूपीए सरकार को समर्थन दे दिया. इससे एनडीए ने समर्थन वापस लिया और शिबू को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.

हेमंत सोरेन दो बार रहे सीएम

शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन राज्य में पहली बार 13 जुलाई, 2013 से 28 दिसंबर, 2014 तक मुख्यमंत्री बने. हेमंत सोरेन पहली बार एक साल 168 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने. इसके बाद दूसरी बार 29 दिसंबर, 2019 से अब तक मुख्यमंत्री रहे. लेकिन, राज्यपाल रमेश बैस द्वारा हेमंत सोरेन के खिलाफ विधानसभा की सदस्यता रद्द करने का फैसला सुनाये जाने तक उन्होंने दो साल 241 दिन सीएम की कुर्सी पर बने रहे.

Posted By: Samir Ranjan.

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