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रांची की सड़कों पर धड़ल्ले से बिक रही हवा मिठाई, जानें आपकी सेहत के लिए कितना है खतरनाक

Updated at : 11 Mar 2024 5:57 PM (IST)
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रांची की सड़कों पर धड़ल्ले से बिक रही हवा मिठाई, जानें आपकी सेहत के लिए कितना है खतरनाक

हवा मिठाई रांची के विद्यानगर हरमू और पुरानी रांची की गलियों में तैयार होती है. इसके निर्माता कोई बड़े व्यवसायी नहीं हैं, जो मानकों का ध्यान रखें.

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चीनी से भी ज्यादा मीठी. हवा से भी हल्की. मुंह में रखते ही हवा की तरह उड़ जानेवाली यह मिठाई जुबान पर एक किरकिरी-सी मिठास छोड़ जाती है. स्वाद कुछ ऐसा कि बार-बार जुबान पर चखने की चाह खत्म नहीं होती. ऐसा कोई नहीं होगा, जिसका वास्ता हवा मिठाई, बुढ़िया के बाल या फिर कॉटन कैंडी नाम से प्रसिद्ध इस मिठाई से न रहा हो. गुलाबी रंग में दिखनेवाली इस मिठाई को आज भी सड़क पर देख मन ललच जाता है. हालांकि हाल ही में तमिलनाडु और पुडुचेरी में हवा मिठाई की बिक्री पर रोक लगा दी गयी है. कारण है कि हवा मिठाई में माैजूद फूड कलर का स्वास्थ्य मानक पर फेल होना. अन्य शहरों में हुई एफएसएसआइ की सैंपल जांच में हवा मिठाई में रोडामाइन-बी केमिकल पाया गया है, जो शरीर में कैंसर सेल को बढ़ावा देता है. साथ ही हार्ट, किडनी और पेट के रोग का कारण बनता है. एफएसएसआइ रांची भी इसकी सैंपलिंग में जुट गया है.

रांची की सड़कों पर धड़ल्ले से बिक रही हवा मिठाई

रांची की सड़कों पर और पर्यटन स्थलों के आस-पास ‘कॉटन कैंडी’ यानी हवा मिठाई की बिक्री होती है. 
10 से 20 रुपये में बिकनेवाली इस मिठाई पर अब तक खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नजर नहीं थी. यही कारण है कि कम लागत में तैयार होनेवाले इस खाद्य पदार्थ की बिक्री खूब होती है. बच्चे भी गुलाबी, नीले और पीले रंग में मिलनेवाली हवा मिटाई को चाव से खाते हैं. कम कीमत होने की वजह से अभिभावक भी खरीद कर बच्चों को दे देते हैं. लेकिन अभिभावकों को यह पता नहीं है कि यह सस्ती मिठाई बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है. मेन रोड, अलबर्ट एक्का चौक, मोरहाबादी मैदान, कांके रोड, पुरुलिया रोड, डोरंडा बाजार, हरमू रोड, बरियातू, हिनू चौक पर बच्चे इस मिठाई की खरीदारी करते दिख जाते हैं.

विद्यानगर और पुरानी रांची में बनती है कॉटन कैंडी

हवा मिठाई रांची के विद्यानगर हरमू और पुरानी रांची की गलियों में तैयार होती है. इसके निर्माता कोई बड़े व्यवसायी नहीं हैं, जो मानकों का ध्यान रखें. हवा मिठाई तैयार करनेवाली इलेक्ट्रिक मशीन 10-15 हजार रुपये में मिल जाती है. विद्यानगर के एक कॉटन कैंडी निर्माता ने बताया कि हवा मिठाई को चीनी और बाजार में मिलनेवाले फूड कलर से तैयार किया जाता है. मोटर युक्त मशीन में चीनी डालने पर इसे गरम किया जाता है. मशीन से 320 डिग्री तक का तापमान तैयार होने पर हवा मिठाई बन जाती है, जिसे डंटी पर घुमाकर इकट्ठा किया जाता है. एक किलो चीनी में 25 से 30 हवा मिठाई तैयार हो जाती है. फिर इसे प्लास्टिक के पैकेट में बंद कर बेचा जाता है. एक हवा मिठाई की बिक्री पर पांच रुपये का मुनाफा होता है. 

फूड कलर में होते हैं कार्सिनोजेनिक केमिकल, मस्तिष्क पर पड़ता है प्रभाव 

रिम्स के डॉ विद्यापति कहते हैं : आम तौर पर किसी भी तरह का फूड कलर इंसानी शरीर के लिए खतरनाक है. जांच के क्रम में फूड कलर में कार्सिनोजेनिक केमिकल पाये गये हैं. इस टॉक्सिक केमिकल का मनुष्य के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है. फूड कलर में पायेजाने वाले केमिकल न्यूरोटॉक्सिक होते हैं, जो हार्ट, किडनी और पेट पर नकारात्मक असर डालते हैं. ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने पर कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं. इससे सोचने-समझने, कैलकुलेट करने में परेशानी होती है. इम्युनिटी कमजोर हो सकती है. वहीं, रोडामाइन-बी लंबे समय तक हमारे शरीर में रहा, तो लिवर के साथ-साथ कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. शुरुआती लक्षण में फूड एलर्जी हो सकती है.


आजकल हर स्ट्रीट फूड में कलर का होने लगा है इस्तेमाल, जो खतरनाक


रिम्स की डायटिशियन डॉ कुमारी मीनाक्षी ने कहा कि फूड कलर कम मात्रा में हो, तो नुकसानदायक नहीं है. आजकल हर स्ट्रीट फूड में कलर का इस्तेमाल होने लगा है. फूड कलर कैंसर सेल को बढ़ावा देते हैं. हवा मिठाई को चटकदार रंग देने के लिए सस्ते फूड कलर का इस्तेमाल हो रहा है. यदि फूड कलर में रोडामाइन-बी हो, तो यह खतरनाक है. इस सिंथेटिक डाई से कपड़े, कागज और चमड़े से बननेवाले उत्पाद को अलग रंग दिया जाता है, जो, मुंह से पेट में पहुंचने पर सेरेबेलम को नुकसान पहुंचाता है. खाद्य सुरक्षा मानक के तहत फूड कलर में एलोरा रेड को मान्यता दी गयी. इसके इस्तेमाल का भी मानक तय है. एक किलो में सात एमएल ही मिलावट कर सकते हैं. इससे ज्यादा हुआ तो जहर से कम नहीं है.


हवा मिठाई में नुकसानदेह केमिकल मिला, तो इसपर रोक लगायी जायेगी


खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन ने कहा कि बाजार में सिंथेटिक कलर की बिक्री हो रही है. इसपर रोक लगाने की जरूरत है. खाद्य सामग्री में इसके इस्तेमाल से शारीरिक नुकसान हो रहा है. खाद्य सुरक्षा मानक के तहत फूड कलर को 100 पीपीएम प्रति केजी ही इस्तेमाल करने की अनुमति दी गयी है. जबकि, खाद्य पदार्थ बनानेवाले लोग इस मानक पर ध्यान नहीं दे रहे. आये दिन मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से खाद्य पदार्थ की जांच की जा रही है. फूड कलर निर्धारित मात्रा से अधिक पाये जाने पर दंड लगाया जा रहा है. जागरूक भी किया जा रहा है. एफएसएसएआइ रांची को शहर में मिलनेवाली हवा मिठाई की सैंपलिंग की जिम्मेदारी दी गयी है. हवा मिठाई में नुकसानदेह केमिकल मिला, तो इसपर रोक लगायी जायेगी.


रोडामाइन-बी शरीर के लिए हानिकारक


हाल ही में तमिलनाडु और पुडुचेरी में हवा मिठाई की जांच की गयी, जिसमें सिंथेटिक डाइ मिला है. केमिकल का नाम रोडामाइन-बी बताया जा रहा है, जिसके शरीर पर घुलने से कैंसर सेल्स को बढ़ावा देने की पुष्टि हुई है. यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा और मानक विभाग 2006 के तहत हवा मिठाई की ब्रिकी पर रोक लगा दी गयी है. रोडामाइन-बी का इस्तेमाल टेक्सटाइल इंडस्ट्री में होता है. यह केमिकल इंसानी शरीर के लिए हानिकारक है. जब खाने के जरिये यह शरीर में घुलता है, तो उत्तकों और कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा कर सकता है, जो लंबे समय तक रहने की स्थिति में कैंसर पैदा कर सकता है या लिवर को खराब कर सकता है. अब तक इंसानों पर इसके असर के कम मामले सामने हैं, जबकि जानवरों पर किये गये शोध से पता चलता है कि 150 ग्राम से कम सेवन पर संभावित घातक परिणाम हो सकते हैं. रोडामाइन-बी को अमेरिका और यूरोप के कई देशों में कार्सिनोजेनिक कैटेगरी में रखा गया है.

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