बासी भात खाने की परंपरा का किया निर्वहन
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Birsa Munda
सिल्ली, मुरी व आसपास तथा पश्चिम बंगाल के झालदा, तुलीन आसपास क्षेत्रों में मंगलवार को महीने की षष्ठी तिथि के दिन बंगाली समुदाय के लोगों ने बासी भात खाने की परंपरा का निर्वहन किया.
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सिल्ली.
सिल्ली, मुरी व आसपास तथा पश्चिम बंगाल के झालदा, तुलीन आसपास क्षेत्रों में मंगलवार को महीने की षष्ठी तिथि के दिन बंगाली समुदाय के लोगों ने बासी भात खाने की परंपरा का निर्वहन किया. इस दौरान बंग समुदाय के घरों के महिलाओं ने सुबह स्नान कर मां षष्ठी की पूजा-अर्चना की. इसके बाद पूरे परिवार के लोगों ने बासी भात सहित अन्य व्यंजन खाये. साथ ही लोगों ने अपने घरों में सगे संबंधियों व मित्रों को भी बासी भात खाने के लिए आमंत्रित किया. ऐसी मान्यता है कि आज के दिन बंगाली परिवारों के घरों में चूल्हा नहीं जलता है. शीतला षष्ठी की पूजा करके बसंत पंचमी के दिन ही तैयार किये गये भात और कम से कम पांच से सात प्रकार के व्यंजनों का सेवन किया जाता है. मान्यता है कि इस प्रकार पूजा करने व बासी खाने से साल भर शीतला माता की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है. साथ ही किसी को भी चेचक सहित अन्य संक्रमण नहीं होता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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