100 साल पहले गायब हुआ टांगीनाथ धाम के त्रिशूल का अग्र भाग मिला, किया गया स्थापित
Updated at : 17 Jun 2024 12:40 AM (IST)
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गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के मंझगांव स्थित टांगीनाथ धाम में त्रिशूल के खंडित भाग को मूल स्थान पर रविवार को स्थापित किया गया. छत्तीसगढ़ के एक गांव से त्रिशूल के खंडित भाग को लाया गया.
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जगरनाथ पासवान/प्रेमप्रकाश (गुमला).
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के मंझगांव स्थित टांगीनाथ धाम में त्रिशूल के खंडित भाग को मूल स्थान पर रविवार को स्थापित किया गया. छत्तीसगढ़ के एक गांव से त्रिशूल के खंडित भाग को लाया गया. इसके बाद विधि विधान के साथ खंडित भाग की स्थापना की गयी. करीब सौ साल पहले टांगीनाथ धाम परिसर से साधना के लिए त्रिशूल के अग्र भाग को कोई भक्त काटकर ले गया था. बाबा टांगीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रामकृपाल बैगा ने बताया कि ढाई साल पहले किसी अनजान व्यक्ति ने फेसबुक में त्रिशूल के अवशेष को पोस्ट कर लिखा था कि यह तस्वीर छत्तीसगढ़ के एक गांव की है. उसके बाद टांगीनाथ धाम समिति के लोग उसकी तलाश में जुट गये. इसी क्रम में उन्हें पता चला कि जशपुर के डाकईभट्टा गांव में बैर पेड़ के नीचे त्रिशूल का अग्र भाग गाड़ा गया है.पेड़ के नीचे बनेगा मंदिर :
दो वर्ष पहले डाकईभट्टा गांव में मुखिया और ग्रामीणों ने बैठक की. इसमें त्रिशूल के अग्र भाग को टांगीनाथ धाम परिसर ले जाने पर सहमति बनी. इसके बदले टांगीनाथ धाम समिति ने कहा कि जिस पेड़ के नीचे त्रिशूल का अग्र भाग था, वहां मंदिर बनाया जायेगा. मंदिर निर्माण में जो भी खर्च आयेगा. आधा सन्ना क्षेत्र के लोग और आधा खर्च टांगीनाथ विकास समिति की ओर से देने पर सहमति बनी. इसके बाद त्रिशूल के अग्र भाग को सन्ना क्षेत्र के लोगों ने टांगीनाथ धाम समिति को शुभ मुहूर्त में देने का निर्णय लिया. जिसकी स्थापना रविवार को की गयी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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