खलारी के करकट्टा में पेयजल का संकट, एकमात्र चानक कुआं पर निर्भर हैं सैकड़ों लोग

Updated at : 16 Jun 2025 6:26 PM (IST)
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खलारी के करकट्टा में पेयजल का संकट, एकमात्र चानक कुआं पर निर्भर हैं सैकड़ों लोग

खलारी के करकट्टा एवं खिलानधौड़ा में कई वर्षों से पेयजल का बड़ा संकट है. लोग प्रतिदिन पानी की समस्या से जूझ रहे हैं.

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खलारी. खलारी के करकट्टा एवं खिलानधौड़ा में कई वर्षों से पेयजल का बड़ा संकट है. लोग प्रतिदिन पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में वहां के लोग खिलानधौड़ा स्थित प्रसिद्ध 60 साल से ज्यादा पुराने चानक कुआं या दूर-दराज से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं. वहीं इन दिनों पड़ रही गर्मी के कारण पानी की समस्या ज्यादा हो गयी है. जानकारी के अनुसार करकट्टा क्षेत्र में पेयजल के लिए एक भी डीप बोर की व्यवस्था नहीं है, जहां से लोग पीने के लिए पानी ला सकें. जिसके कारण लोग दूर-दराज से पेयजल की व्यवस्था में दिनभर लगे रहते हैं. हालांकि एक दशक पूर्व सीसीएल द्वारा करकट्टा बिजली घर सब-स्टेशन के नजदीक डीप बोर से पेयजल की व्यवस्था की गयी थी. परंतु पांच वर्ष बाद वो भी खराब हो गया. उसके बाद पुनः वहीं कुछ दूरी पर डीप बोर कर सबमर्सिबल डाला गया. वो भी तीन वर्ष बाद खराब हो गया. उसके बाद से अब तक वहां डीप बोर की व्यवस्था नहीं की गयी. करकट्टा-विश्रामपुर कॉलोनी एवं खिलानधौड़ा की आबादी व्यापक जल संकट से जूझ रही है. इस इलाकों के आसपास के जल स्रोत सूख गये हैं. दिन भर मशक्कत के बाद जहां-तहां से थोड़ा पेयजल की व्यवस्था हो पाती है, जिससे जिंदगी कट रही है. उल्लेखनीय है कि खलारी प्रखंड की आधी आबादी कोयले की खान से घिरी है. इस कारण वैसे इलाकों में लगभग चापानल और कुआं सफेद हाथी साबित हो रहा है. हालाकि इन इलाकों में पिछले वर्ष विधायक फंड से बोर किया गया, लेकिन कहीं का बोर सक्सेस नहीं किया. जिसका मुख्य कारण कोयले की खान नजदीक होना बताया जा रहा है. जानकार बताते हैं कि इस इलाकों में नॉर्मल बोर के जगह डीप बोर ही सक्सेस हो सकते हैं.

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पेयजल सुविधा बहाल कराये सीसीएल : ग्रामीण

करकट्टा परियोजना को पुरनाडीह परियोजना में समाहित के बाद से ही करकट्टा की उपेक्षा शुरू हो गयी. परंतु पानी हर किसी को मिलना चाहिए, क्योंकि ये मूलभूत सुविधाओं में से एक है और पेयजल की सुविधा बहाल कराना सीसीएल की जवाबदेही बनती है. ऐसे में चानक कुआं से पानी भर रहीं महिला भारती देवी, सरिता देवी, मोनिका देवी, मुस्कान देवी, कुसुम कुमारी, कोमल देवी ने बताया कि चानक कुआं गत 60 वर्षों से लोगों की प्यास बुझा रहा है. परंतु कोयले की खान नजदीक होने के कारण पानी धरातल में चला गया है. वहीं अशोक राम, दीपू साव सहित अन्य लोगों ने बताया कि खिलान धौड़ा में एक जलमीनार लगी है. परंतु जलमीनार का पानी पीने योग्य नहीं है.

कोयले की खान होने के कारण इलाके के डीप बोर में नहीं आता है पानी

फोटो:-16खलारी01:-खलारी के खिलान धौड़ा स्थित चानक कुआं से पानी भरते लोग.

फोटो:-16खलारी02:- करकट्टा बिजली घर के पीछे बेकार स्थित टंकी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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