सोरेन परिवार से पहली बार बाहर निकली सत्ता

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Feb 2024 4:16 AM

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हेमंत सोरेन की सरकार जब भ्रष्टाचार में घिरती रही. सरकार पर संकट छाये, तो हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर अटकलें लगने लगी. मंगलवार को सत्ता पक्ष की बैठक में हेमंत सोरेन ने कल्पना सोरेन के साथ बैठक में भी आयीं.

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आनंद मोहन, रांची

झारखंड की राजनीति में शिबू सोरेन परिवार का बड़ा दखल रहा है. यह परिवार सत्ता के इर्द-गिर्द रहा है. शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे, तो उनके पुत्र हेमंत सोरेन ने शिबू की विरासत संभाली. हेमंत सोरेन भी दो बार मुख्यमंत्री बने. हेमंत सोरेन के युग में झामुमो सत्ता के उत्कर्ष तक पहुंचा. कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी. झामुमो के वरिष्ठ विधायक और टाइगर के नाम से मशहूर चंपई सोरेन को शिबू परिवार ने सत्ता सौंप दी. चंपई झारखंड आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे हैं. पार्टी के अंदर इनकी साख है. झामुमो जब-जब सत्ता में आयी, चंपई सोरेन को जगह मिली.

चंपई ने मंत्री पद संभाला. झामुमो में इनकी अपनी साख है. हेमंत सोरेन की सरकार जब भ्रष्टाचार में घिरती रही. सरकार पर संकट छाये, तो हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर अटकलें लगने लगी. मंगलवार को सत्ता पक्ष की बैठक में हेमंत सोरेन ने कल्पना सोरेन के साथ बैठक में भी आयीं. सत्ता के गलियारे में संकेत था कि कल्पना कुर्सी संभाल सकती हैं. पर झामुमो ने अपनी रणनीति बदली. बुधवार की शाम सत्ता पक्ष की बैठक में आनन-फानन में चंपई सोरेन के नाम पर सहमति बन गयी. सत्ता की चाबी बदलने के मामले में हेमंत सोरेन पारिवारिक विवाद से बाहर निकलना चाहते थे.

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हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम आगे आते ही, घर की बड़ी बहू सीता सोरेन भड़क गयीं. सीता सोरेन शिबू सोरेन के बड़े बेटे स्व दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं. सीता सोरेन ने मंगलवार को कल्पना सोरेन का नाम आगे सुनते ही प्रतिक्रिया दे दी थी कि हमें स्वीकार नहीं होगा. मैं घर की बड़ी बहू हूं. मेरा पहला अधिकार है. उधर हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन, जो दुमका से विधायक उनको लेकर भी अटकलें लग रही थीं कि शायद वह भी फैसले का विरोध कर दें. इन सारे कयासों और संभावनाओं को हेमंत सोरेन ने खारिज कर दिया.

राज्य गठन के बाद पहली बार 2005 में शिबू परिवार के पास आयी सत्ता

वर्ष 2000 हजार में राज्य गठन के बाद पांच वर्षों के बाद यानी 2005 में शिबू परिवार ने पहली बार सत्ता संभाली. खुद पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन 2003 में 12 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने. इसके बाद शिबू सोरेन ने ही 2008 में तत्कालीन मधु कोड़ा को हटा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. हालांकि शिबू विधानसभा चुनाव हार गये और सत्ता हाथ से निकल गयी. इसके बाद शिबू के बेटे हेमंत सोरेन ने राजनीति में पकड़ बनायी और हेमंत 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बने. करीब 13 महीने सरकार चलायी. वर्ष 2019 में हेमंत सोरेन ने पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. विवादों में सरकार घिरती गयी. हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा और चंपई सोरेन के हाथ सत्ता आयी.

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