राधा गोविंद यूनिवर्सिटी में मनाई गई खोरठा साहित्यकार गोविंद महतो ‘जंगली’ की 81वीं जयंती

Updated at : 06 Feb 2026 4:22 PM (IST)
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खोरठा साहित्यकार गोविंद महतो की जयंती मनी

खोरठा साहित्यकार गोविंद महतो की जयंती मनी

Ranchi (पिठोरिया): राधा गोविंद यूनिवर्सिटी में खोरठा के साहित्यकार गोविंद महतो 'जंगली' की 81वीं जयंती मनाई गई. गोविंद महतो ने खोरठा को पहचान दिलाने के लिए काफी काम किया है. आज उनके इसी काम को याद किया गया.

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Ranchi (पिठोरिया): राधा गोविंद यूनिवर्सिटी के खोरठा विभाग में खोरठा साहित्य के अग्रदूत, प्रख्यात साहित्यकार गोविंद महतो ‘जंगली’ की 81वीं जयंती मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत गोविंद महतो ‘जंगली’ की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की गई. इसके बाद खोरठा विभागाध्यक्ष ओहदार अनाम ने स्वागत भाषण में कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि गोविन्द महतो ‘जंगली’ ने खोरठा भाषा और साहित्य को सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया. उनका साहित्य खोरठा समाज की चेतना और अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है.

गोविंद महतो खोरठा के सच्चे साधक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति बीएन साह ने कहा कि गोविंद महतो ‘जंगली’ खोरठा भाषा के सच्चे साधक थे. उन्होंने अपने लेखन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी मातृभाषा को पहचान दिलाई. उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है. सचिव प्रियंका कुमारी ने कहा कि जंगली जी ने खोरठा भाषा को केवल साहित्य तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आमजन के जीवन से जोड़ा. खोरठा विभाग उनके साहित्यिक योगदान को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य निरंतर कर रहा है.

आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो (डॉ) रश्मि ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा और शोध किसी भी भाषा के संरक्षण का सशक्त माध्यम है. गोविंद महतो ‘जंगली’ का संघर्ष खोरठा भाषा के अकादमिक विकास के लिए मार्गदर्शक है. कुलसचिव डॉ निर्मल कुमार मंडल ने कहा कि जंगली जी का साहित्य ग्रामीण जीवन, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का सजीव दस्तावेज है. उनका योगदान साहित्य के साथ-साथ सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में भी देखा जाता है. लेखा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्थागत सहयोग आवश्यक है. गोविंद महतो ‘जंगली’ जैसे साहित्यकारों का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित और प्रचारित किया जाना चाहिए.

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परीक्षा नियंत्रक अशोक कुमार ने कहा कि लोकभाषाओं को शैक्षणिक मंच प्रदान करना आज की आवश्यकता है. गोविंद महतो ‘जंगली’ के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज खोरठा भाषा विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन का विषय बनी है. कार्यक्रम के अंत में खोरठा भाषा और साहित्य के संरक्षण-संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया. कार्यक्रम में शिक्षक, छात्र एवं साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

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AmleshNandan Sinha

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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