पेयजल के लिए निजी कुएं पर आश्रित है केकराही गढ़ा बस्ती की 300 आबादी
Published by :DINESH PANDEY
Published at :25 Apr 2025 6:16 PM (IST)
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खलारी प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत अंतर्गत केकराही गढ़ा बस्ती में वर्षों से पेयजल की समस्या है.
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प्रतिनिधि, खलारी.
खलारी प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत अंतर्गत केकराही गढ़ा बस्ती में वर्षों से पेयजल की समस्या है. गर्मी के दिनों में पेयजल की समस्या और भी गहरा जाता है. रोजमर्रा के कामों के लिए लोगों को दूर कुएं से पानी लाना पड़ रहा है. ऐसे में केकराही गढ़ा बस्ती के 50 घरों में लगभग 300 की आबादी को पेयजल का एकमात्र जलस्रोत बलराम भोगता का निजी कुआं है. केकराही गढ़ा बस्ती में हर घर जल नल योजना शुरू नहीं हुई है. वहीं 15वें वित्त की राशि से सोलर जलमीनार का निर्माण तो किया गया, परंतु जलमीनार के लिए नया डीप बोर नहीं किया गया. बल्कि पूर्व से स्थित हैंडपंप की क्षमता रखने वाले चापानल में ही डीसी सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है. उसमें भी जलमीनार आयरन (लाल) पानी दे रहा है. वहां की हेमा देवी, अनिता देवी, सुमन देवी, फूलमनी देवी सहित कई लोगों ने बताया कि बस्ती में सरकारी कुआं और चापानल नहीं है. हालांकि बस्ती में तीन सोलर जलमीनार, एक चापानल और दो कुएं हैं. उसमें भी एक जलमीनार खराब पड़ा है. कुआं सूख गया है. जलमीनार और चापानल का पानी पीने लायक नहीं है.जलमीनार व चापानल का पानी लाल : केकराही गढ़ा के गेंदिया देवी, राधा देवी, ललिता देवी, मनीषा देवी, विजय तुरी, रितिका कुमारी, राम प्रसाद तुरी सहित कई लोगों ने पेयजल के लिए जलमीनार की मरम्मत की मांग की. बताया कि 15वें वित्त से पांच वर्ष पूर्व दो जलमीनार लगाये गये थे. जिसमें एक जलमीनार का सोलर प्लेट छह माह पूर्व चोरी हो गयी. तभी से जलमीनार बंद पड़ा है. जबकि दूसरा जलमीनार ठीक है, लेकिन जलमीनार से निकलने वाले लाल पानी से जीवन प्रभावित हो रहा है. बाद में डेढ़ वर्ष पूर्व एक और छोटा टंकी का जलमीनार स्थापित किया गया, वहां भी आयरनयुक्त पानी निकल रहा है. चापाकल एक है, लेकिन उसका भी पानी खराब आता है.क्या कहते हैं बस्ती के ग्रामीण : सुनीता सिन्हा कहती हैं कि केकराही गढ़ा के ग्रामीण हर घर जल नल योजना को लेकर सालों से आवाज उठाते आ रहे हैं. लेकिन किसी ने अमल नहीं किया. उन्होंने बताया कि 15वें वित्त के तहत जलमीनार से पानी आपूर्ति की व्यवस्था है. परंतु जलमीनार से लाल पानी मिलने के कारण सिर्फ बर्तन धोने के काम में आता है. बाद में एक चापानल भी लगाया गया है, लेकिन उसका पानी भी पीने के योग्य नहीं है.
ग्रामीणसंतोष कुमार सिन्हा
ने केकराही गढ़ा बस्ती में डिपबोर कर कंक्रीट जलमीनार की मांग की. बस्ती के 300 लोगों को सुबह से लेकर शाम तक मात्र एक निजी कुआं पर आश्रित रहना पड़ता है. अगर वोवह भी सूख गया तो पानी के लिए हाहाकार मच जयेगा.हर घर जल नल योजना की मांग करते हुए
राम प्रसाद तुरी
ने बताया कि केकराही गढ़ा बस्ती में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. बढ़ती गर्मी से पानी भी धरातल में जा रही है. एक निजी कुआं से इतनी बड़ी आबादी को पेयजल कैसे संभव है. उन्होंने बस्ती में आबादी को देखते जल्द कुआं और चापानल की भी मांग की है.25 खलारी01:- केकराही गढ़ा बस्ती का खराब पड़ा सोलर जलमीनार.
25 खलारी02:- बलराम भोगता का कुआं से पानी भरते केकराही गढ़ा बस्ती की महिलाएं.
25 खलारी03:- सुनीता सिन्हा.
25 खलारी04:- संतोष कुमार सिन्हा.
25 खलारी05:- राम प्रसाद तुरी.B
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