मारवाड़ी कॉलेज: एक शिक्षक के भरोसे कॉमर्स के 500 छात्र
Updated at : 18 Feb 2020 8:37 AM (IST)
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दिवाकर सिंह कॉलेज में हैं कुल सात शिक्षक, चार ही रेगुलर रांची : रांची में कॉमर्स की पढ़ाई के लिए जब भी किसी कॉलेज का नाम लिया जाता है तो उसमें सबसे पहले मारवाड़ी कॉलेज का नाम आता है. यहां के शिक्षकों से पढ़ने कभी दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थी आते थे. लेकिन धीरे-धीरे शिक्षक रिटायर […]
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दिवाकर सिंह
कॉलेज में हैं कुल सात शिक्षक, चार ही रेगुलर
रांची : रांची में कॉमर्स की पढ़ाई के लिए जब भी किसी कॉलेज का नाम लिया जाता है तो उसमें सबसे पहले मारवाड़ी कॉलेज का नाम आता है. यहां के शिक्षकों से पढ़ने कभी दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थी आते थे. लेकिन धीरे-धीरे शिक्षक रिटायर होते गये. अब स्थिति यह है कि यहां कॉमर्स के 500 विद्यार्थी एक शिक्षक के भरोसे हैं. कॉलेज में कुल सात शिक्षक हैं, जिसमें चार रेगुलर और बाकी अनुबंधित हैं.
स्नातक में है 3000 से अधिक विद्यार्थी : मारवाड़ी कॉलेज के ब्वायज और गर्ल्स सेक्शन में इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कॉमर्स की पढ़ाई होती है. इसमें इंटर कॉमर्स में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है.
वहीं स्नातक और स्नातकोत्तर मॉर्निंग सेशन मिलाकर लगभग 3500 विद्यार्थी हैं. यहां इवनिंग सेशन भी स्नातक और स्नातकोत्तर का चलाया जाता है. लेकिन उनके लिए चार शिक्षक अलग से हैं. कॉलेज में स्नातक के लगभग 3000 से अधिक विद्यार्थी हैं. ये संख्या गर्ल्स और ब्वॉयज दोनों सेक्शन मिलाकर है. ब्वॉयज में तीन सेक्शन चलाये जाते हैं. एक सेक्शन में 500 विद्यार्थी है. यही संख्या गर्ल्स सेक्शन में भी है. यहां भी ब्वॉयज सेक्शन के रेगुलर शिक्षक ही क्लास लेने जाते हैं. इसके अलावा स्नातकोत्तर में फर्स्ट सेमेस्टर में 150 और सेमेस्टर सेमेस्टर में 150 विद्यार्थी हैं. गर्ल्स सेक्शन में भी यही स्थिति है.
शिक्षकों की संख्या केवल सात : स्नातक और स्नातकोत्तर में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या मात्र सात है. जबकि कुल विद्यार्थी 3500 हैं. इस हिसाब से एक शिक्षक के भरोसे 500 विद्यार्थी है. वहीं यूजीसी के मानक के अनुसार स्नातकोत्तर में 20 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए. वहीं स्नातक में 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए. लेकिन मारवाड़ी कॉलेज में ऐसा नहीं है.
क्या कहते हैं प्राचार्य
विवि की ओर से कुछ अनुबंध शिक्षक भेजे गये थे. इसके बावजूद शिक्षकों की कमी है और विद्यार्थी उसकी तुलना में अधिक हैं. हमारी ओर से शिक्षकों की मांग विवि से की गयी है.
डॉ यूसी मेहता, प्राचार्य, मारवाड़ी कॉलेज
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